अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज

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मैरा  नाम है राजू और मुझे antarvasna की  sex stories पड़ने में बहुत मजा आता है. मै उत्तरप्रदेश के एक छोटे से गाव रामनगर का रहने वाला हु. मै घर का मम्मी-पापा का इकलौता बेटा हूँ और बाकि दो बेटी है. मेरे दोनों दीदी का एक साल पहले ही बिबाह हो गया था. तो घर में मै अकेला ही था. मैरे मम्मी-पापा  दोनों ही sarkari naukari करते है . और मै एक private company में job करता हु . मुझे अलग-अलग प्रकार के  antarvasna (अन्तर्वासना ) की कहानी जैसे , maa ki chudai, maa ki antarvasnaindian sex stories , kamukta जैसे सभी hot sex story पड़ना बहुत पसंद है.

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मैरे चाचा हमारे गाव से करीब 15 किलोमीटर दूर एक गाव में रहते है. आपलोगों को बता दू की चाचा मुझसे 10 साल बड़े है. और चाची सिर्फ 3 साल . चाचा बहुत ही खुस-किस्मत है जिन्हें चाची जेसे नाजुक कलि मिल गयी. मेरे चाचा-चाची एक कमरे वाले घर में ही रहते हैं ।चाचा  की शादी लगभग 1साल  पहले हुई थी मेरे दोनों दीदियो के शादी  के बाद. आपलोगों को बतादू की मेरे चाची का उम्र 23 साल और चाचा का उम्र 30 साल है.

कुछ दिन पहले लगभग 28 से 45 दिन होगा. चाचा जी जिस कारखाना में काम करते थे. उस कारखाना में एक भयानक हादसा हुआ जिस हादसा का शिकार चाचा जी भी हो गए थे. और लगभग एक हप्ते तक अस्पताल में दाखिल रहना पड़ा. घर में और कोई भी नहीं था तो चाची जी के बुलाने पर मुझे चाची जी का मदत करने के लिए अस्पताल में जाना पड़ा. चाची जी दिन में जब घर जाती थी तब मैं चाचा  के पास अस्पताल में ही रहता था और जब फिर चाची जी अस्पताल आती थी तब  मैं काम पर  चला जाता था। रात के समय चाची जी तो चाचा के पास अस्पताल में ही रह जाती  थी और मैं चाची जी के घर में जा कर चाची जी के कमरे में  सोया करता थ.

कुछ दिनों बाद मै और चाची जी चाचा को हस्पताल से घर लेकर आए . चाचा जी बहुत ही कमजोर हो गए थे. इस लिए चाचा जी के देख भाल करने के लिए मै रुक गया. और मुझे चाची जी के पास  रहने को मोका मिला और चाची जी स्वभाव के बारे में  जान सका की चाची जी किस स्वभाव की है.

चाची जी देखने में  बहुत ही सुन्दर हैं, बदन का  रंग बहुत ही गोरा, नैन बहुत ही आकर्षक हिरन जेसा तीखे  हैं.  चाची शृंगार आदि नहीं करती लेकिन इसके बाबजूद  वह एक सुन्दरी अपसरा लगती  हैं। उसका चेहरा बहुत ही गोल और गोरा है. और आँखें हिरणी की तरह है , गाल  गुलाबी, होंठ गुलाब की  तरह पतले, बाल काले लंबे और घने हैं। वह कभी भी ब्रा नहीं पहनती और हमेसा पतले ब्लाउज पहनती है . और इसी कारण  उसके पतले ब्लाउज में से उसके गोल गोल  चुचिया  दिखाई देते है. उसकी पतली कमर और नाभि मुझे हमेशा  आकर्षित करता रहता है, उसकी जांघें बहुत ही मस्त है  और टांगें लंबी और पतली  हैं जिससे वह बहुत ही मस्त दिखती है .

अस्पताल में जब चाची जी  चाचा  के पास  बिस्तर पर टांगें ऊंची करके बैठ कर चाचा जी को  खाना खिला रही थी तब चाची की साड़ी उनके जंगो से थोड़ी ऊपर उठ गई थी जिस से मुझे उनके चूत की थोरी झलक दिख गया था । चाची जी ने अन्दर उस दिन पैंटी पहनी हुई नहीं थी और उसके चूत पर घने काले  बाल मुझे देखनो कको मिला  थे .  मुझे उस के  चूत के पतले होंठ खुले हुए दिखाई दे रहा था । चाची जी का मस्त चूत देखने के बाद मै antarvasna (अन्तर्वासना ) में खो गाया था.

हस्पताल से लोटने के बाद चाचा जी शहर के बहार काम करने के लिए जाने को तयार हो गए पर वह चाची को आपने साथ ले जाने को तेयार नहीं थे. इस बातको लेकर चाची बहुत ही नाराज थी . चाचा जी ने चाची को बताया की वह जहा काम के लिए जा रहे है वहा पर कोई भी महिला नहीं रहती है . वहा पर सिर्फ पुरुस ही रहते है. चाचा जी ने चाची से वादा किया की जब वह एक अलग से रूम भाड़ा पर ले लेंगे तब वह चाची को आपने साथ जरुर ले जायेंगे. तब जाकर चाची जी मान गई. चाचा जी ने चाची से कहा की  जब तक में वापस नहीं  लटता हु तुम हरा खयाल राजू रखे गा. जब मै शहर के बहार जाऊ गा तो भैया-भाबी से कहा दूंगा की जबतक में ना वापस आऊ राजू को उसकी चाची के साथ ही रहने देना. चाची जी मान गई और मैरे मम्मी-पापा भी मान गए . मै मन ही मन बहुत खुस हो रहा था की मेरी antarvasna (अन्तर्वासना ) की प्यास जरुर मिटेगा. पर सायद कुछ और होने वाला था जो मुझे पता भी नहीं था की chachi ki antarvasna (अन्तर्वासना ) इस प्रकार जाग जाएगी.

जब सुबह होता था तो चाची जी मेरे लिए नास्ता बना देती थी और में खाकर ऑफिस चला जाता था. और जाब वापस आता था तो चाची जी जो भी जरुरत के समान मंगवाती थी मै ले आया करता था. जब भी मुझे छुट्टी मिलता था मम्मी-पप्पा से मिल आया करता था पर रात को जरुर चाची के वापस आ जाता था क्युकी चाची को रात को अकेले बहुत ही डर लगता था. चाची की तबियत आचानक ख़राब हो गई तो मैंने ऑफिस भी जाना छोर दिया और सारा दिन चाची का ही सेवा करने लगा. उन्हें डॉक्टर के पाश ले गया और उनका इलाज करवाया. डॉक्टर ने बताया की चाची जी को किसी बात का चिंता सताए जा रही है जिसके कारण वह भीतर ही भीतर घुट रही है जो उनका तबियत ख़राब होने का कारन है.

मैने चाची से कई बार उनकी परेशानी को पूछा पर वह कुछ भी नहीं बताती थी. मेने आपलोगों कोण बताया था की मुझे antarvasna (अन्तर्वासना ) की  sex stories पड़ने में बहुत मजा आता है. मुझे जब भी समय मिलता है  मै जरुर kamukta की Hot sex story पड़ता हु. एक रात चाची जल्दी ही सो गाई और में ऑफिस के काम के बहाने indian sex stories पड़ने लगा. मै चाची के ही कमरे में सोता क्युकी सोने के लिए एक ही रूम था. sex stories पड़ते समय मै खो जाता हु. आचानक चाची की आवाजे आने लगी , मैंने सुना की चाची जी सपनो में कह रही थी की , मुझे चोदो , मुझे छोर के मत जाना , मैरे चुट की आग को मिटा दो नहीं तो में मर जाउंगी, चोदो , चोदो, चोदो. चाची जी की इस तरह के स्वभाब ने मुझे एकदम से हेरान कर दिया . चाची जी के इस प्रकार के शब्द से मेरे भीतर आग लगा दिया और मेरा लंड चाची जी को चोदने के लिया फर-फरा रहा था. पर मैने खुद को संभाल लिया.

क्युकी हम दोनों एक ही कमरे मे रहते थे इस लिए कभी-कभी हम दोनों को ही दिक्कत होती थी . जब भी चाची नहाने के बाद कपरे बदलती थी तो में कमरे के बाहर चला जाता था. उसी तरह जब में कपडे बदलता था तो वह कमरे के बाहर चली जाती थी. उस रात के बाद दुसरे दिन जब सुबह हुई तो, रोज की तरह चाची नहाने चली गयी और मै जानता था की वह इस कमरे में ही कपड़े जरुर बदले गी . तो मे सोने का बहाना बनाके कमरे में लेता रहा. आपलोगों को बतादू की  चाची बेड पर और मै उनके बेड के पास निचे जमीन पर सोता हु .

chachi ki antarvasna


चाची कमरे में आई कपड़े बदलने के लिए . चाची को लगा की मै गहरी नींद में हु ओर उन्होंने मुझे जगाने का जरुरत भी नहीं समझा और आपनी सारी भीगी हुई कपड़े उतार र्दी और मै इसी मोके का इंतजार कर रहा था.  चाची को नंगी देख कर मेरा लंड एकदम से लोहे जेसा खड़ा हो गया . मै आचानक से उठ गया और चाची को घूरने लगा . चाची भी मुझे देख कर सरमा गयी और आपने एक हाथ से मेरे आख को बंद कर दिया और कहने लगी . राजू तुम्हे आचना नहीं उठना चाहिए था. मै बहुत ही डर गई , चलो आपना लुंगी दो ताकि मै आपने नंगी बदन को डाक सकू. और कहके मेरे लुंगी को खिक कर खोल दिया. मेरा खड़ा हुआ मोटा लंड को चाची ने देख लिया और बाप रे कहते हुए मुझे कमरे के बाहर धक्का देकर निकाल दिया और मेरे लुंगी को भी दे दिया यहाँ कहते हुए की,  आपने  लोहे जैसे ओजार को संभालो ओर इसे डाक लो ताकि ओर कोई भी देख कर बेहोस ना हो जाए.

रात का वक्त था सोने के लिए मैंने रूम की बत्ती ऑफ करदी हमारे कमरे में बाहर से रोशनी आती थी जिसके कारण कमरे का नाईट लैंप बंद ही रहता था. रौशनी में कमरे के आंदर का सभी चीजे अच्छी तरह दिखाई देती थी. लगभग 2 बजे मेरी आख रोजाना खुल जाती थी चाची के हॉट बदन को देख ने के लिये . उस रात भी मेरी आखे खुल गया अर्थात मे जाग उठा . मैने देखा की चाची जी लंड जैसा दिखने वाला एक वस्तु को आपने चुतं में घुसा रही है और निकाल रही है रोशनी में कुछ इसी तरह दिखाई दे रहा था . तो मुझे  विस्वास नहीं हुआ तो मेने रूम की बत्ती जला दिया . मै हैरान हो गया की चाची एकदम से नंगी बेड पर लेटकर आपने चूत में लंड की तरह वस्तु को घुसा ओर निकाल रही है. मुझे देखते ही चाची शर्मा गई और आपने नंगे बदन को कपड़ो से छुपाने लगी. चाची के पास जाकर मैने पूछा ये सब क्या है आप इस तरह की हरकत क्यू कर रही हो . मैरे इस तरह के बातो से चाची जी रोने लगी और फिर कहने लगी की राजू मै आब आपने अंदर के आग को सहन नहीं कर सकती हु . मै किस के पास जाऊ आपनी बदन ककी आग को बुझाने के लिए. तुम्हारे चाचा जी मुझे भरी जवानी मे ही छोर चले गए है . मैने चाची जी के सवालो को सुना और उनसे कहा - चाची जी आप चिंता ना करे आपका इच्छा जरुर पूरा होगा और यहाँ कह के कमरे की लाइट ऑफ कर दी और चाची जी के पास ही लेट गया और उनको सहलाते हुये सो गया.

सुबह जब मै उठा तो देखा की चाची जी बिस्तर पर नहीं है . मैंने सोचा की चाची जी को  मेरे सामने आने में शर्म आ रही है इस लिए वह जल्दी सुबह उठ कर चली गई . बिना देर किये  मै तेयार होकर ऑफिस चला गया. जब मै शाम को घर लोटा तो मैने देखा की घर का माहोल कुछ बदला-बदला सा है. शाम का लगभग 5 बाज रहा था. मेरा चाय पिने का समय था. उस दिन बिना मांगे ही मुझे चाय मिल गया. चाय पीते - पीते मै सोच रहा था की चाची जी मुझसे दूर क्यू भाग रही है . तब मुझे समझ में आया की रात की घटना से चाची जी शर्मिंदा है और मुझसे बात करने में भी कतरा टी है. मैंने सोचा की कुछ देर के लिए मै बाजार चला जाऊ और चाची की मनपसंद चीज खाने के लिए ले आऊ जिस से की उनका मुड भी ठीक हो जाये गा. बाजार से जब मै वापस आया तो मैंने देखा की चाची जी का मुड पहले से काफी अच्छा है और तब मैंने चाची को उनके पसंदिता खाने को गिफ्ट के तोर पर दिया . मेरा गिफ्ट देख कर वह बहुत खुश हो गई और मुझे गले से लगा लिया. उस वक्त मुझे कुछ भी समझ में नहीं आया की मै क्या करू. रात का खाना हम दोनों ने एक ही साथ खाया और कुछ घंटे तक एक साथ टीवी भी देखे. उस दिन गरमी भी काफी थी तो चाची जी ने साड़ी उतार कर  मैरे सामने वाले कुर्सी पर आके बैठ गई .  चाची जी ब्रा नहीं पहनती थी पर उस दिन एक पतली सी ब्रा पहनी हुई थी जिससे चाची जी का गोल-गोल गुलाबी चुचिया एक दम साफ-साफ दिखाई दे रहा था. और चाची जी का पेटीकोट इतनी  छोटी थी की कुर्सी पर जब वह बैठी तो उनका चूत एक दम साफ दिखाई दे रहा था जो बड़ी बड़ी काली झांटों से भरा हुआ था.

चाची के इस मस्त नजारा को मे देखता रहा . मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था . मै आपने लंड को हाथ से दबाने लगा ताकि मेरा खड़ा हुआ लंड को चाची देख ना पाए. चाची के इस हॉट दृश्य को देख कर में खुद पर काबू नाही रख सक रहा था तो मेने वहा से तुरंत उठ कर कमरे में सोने चला गया. लगभग 12 बजने वाले थे . मेरे आने के बाद चाची भी मेरे पीछे-पीछे कमरे में चली आई और आपने बेड पर ना सोकर मेरे बगल चटाई पर सो पड़ी. मैने चाची को कहा की आप बेड पर सो जाए पर उन्होंने कोई भी जबाब नहीं दिया. लगभग 12 से 15 मिनट बाद चाची जी का हाथ मेरे  लौड़ा के ऊपर आ गया . अचानक से में नींद से जाग उठा और देखा की चाची जी मेरे लंड को आपने सुंदर  हाथो से मसल रही है. मै होश में आया और चाची जी  को खुदसे अलग करने की कोसिस की पर चाची जी तो एकदम नंगा ही मेरे पास लेती थी जिसका में कभी भी अनुमान नहीं लगा सकता था. मैंने चाची को दूर करने की बहुत प्रयास किया पर वह मुझसे चिपकती रही और मेरे लंड को जोर-जोर मसलती रही. चाची की इस हरकत से मेरे भीतर का चुदाई करने वाला सैतान जाग गाया . चाची जी जिस तरह से मेरे लंड को मसल रही थी की मुझसे खुद को संभाला नहीं गया और मै भी चाची की तरफ घूम कर चाची को आपनी बाहों में जोर से लिपटा लिया ताकि वह खुद को मुझसे जुदा ना कर सके. मै चाची को एकदम से नंगा देखना चाहता था तो मैने चाची को खुदसे दूर करके कमरे का बत्ती जला दी . रौशनी में चाची का नंगा बदन सोने जेसा  चमक रहा था और चाची मेरी ओर ही देख रही थी और मुस्कुराये जा रही थी.

सोने के वक्त मे हमेसा छोटा सा पेंट हि पहनता था जिसे आपलोग अंडरवियर भी कहते हो . कोई भी सीजन हो मै सोने के समय हमेसा ही अंडरवियर ही पहनता हु. चाची को नंगी देख के मुझसे और बर्दाश्त नहीं हो पाया और मैंने आपनी अंडरवियर खोल कर नंगा ही चाची की तरफ दौर गया . चाची जी मेरा लंड देख कर कहने लगी आरे बाप रे बाप , देखा था चूहा ओर निकला सेर का बाप. आपलोगों को बता दू की जिस दिन चाची ने मेरा लौड़ा देखा था उस दिन मेरा लौड़ा नार्मल साइज़ में था पर आज का लौड़ा का साइज़ चाची के शोच से कही ज्यादा बड़ा था. चाची ने कहा, राजू  जब में तुम्हारे पास आने की हिम्मत की है तो तुम्हारे लंड का दर्द भी झेल लुंगी. यहाँ कहते हुए चाची जी मैरे लौड़ा को हाथो से पकड़ कर  होठो से चूमना आरम्भ किया. दोस्तों क्या बताऊ मुझे बहुत ही मजा आ रहा था. मैरे लंड को चुमते-चुमते चाची जी ने कहा की , राजू क्या तुमने कभी भी चूत को एक दम करीब से देखा है. आज मै तुम्हे आपनी चूत को करीब से दिखाती हु . यहाँ कह कर चाची जी ने आपनी दोनों टांगो को फाक कर दिया और मुझे चूत को आच्छी तरह से देखने को कहा . मैने भी चाची की बात मान ली. चाची जी का चूत बालो से भरा हुआ था . इसी कारण मुझे चूत को देखने में थोरा दिक्कत हो रहा थ. मैंने चूत को हाथो से सहलाया और चूत को चूमने लगा. मेरा हर एक चुम्मन चाची जी को मस्ती से भर दे रहा था. और चाची जी उत्तेजित होने लगी थी.

चाची का उत्तेजित तथा मस्ती इतना बढ़ गया की उसने  मैरे सिर को पकड़ कर मेरे मुहो को आपने चूत पर घसने लगी तथा  चूत को चाटने और चूसने को कहने लगी. चाची की मस्ती को देख कर मै भी मस्त हो गया और आपना जीभ को चाची के चूत में घुसा के चूसने लगा. मैंने जीभ से चूत को चोदने और जोर-जोर से चुसने लगा. जीभ की चुदाई का अनुभब चाची जी का पहला था . चाची जी आह्ह्ह… आह्ह्ह… की आवाजें निकाल रही थी . जिसको सुन कर मुझे ओर भी जोस आरहा था. मै ओर तेजी से आपने जीभ को उनके चूत में हिलाना शुरू किया जिससे की पहले की तुलना में चाची जी और तेजी से उछल ने लगी और आकड़ ते हुए आपने चूत का सारा पानी मेरे मुहो में छोर दिया और एकदम से झर गई.



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