माँ बेटी दोनों एक ही लंड से चुदीं-2 (Maa Beti Dono Ek Hi Lund Se Chudi- Part 2)

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अब तक आपने मेरी इस चुदाई की कहानी के पहले भाग
माँ बेटी दोनों एक ही लंड से चुदीं-1
में पढ़ा कि शान मुझे एक होटल में चोदने की कोशिश करने लगा था … जिस पर मैंने उससे होटल में चोदने से मना कर दिया था.

अब आगे:

मैंने शान के पैंट के ऊपर से ही लंड पर हाथ फेरा और उसे जोर से दबाते हुए कहा- चिंता न करो. मैंने सारा इंतजाम कर दिया है. हम दोनों मेरी एक सहेली के घर चलते हैं. उसके घर में अभी उसके अलावा कोई नहीं है.

शान ने कहा- अरे लेकिन वो तो है न!
मैं- अरे तुम चिंता मत करो उसके होने से हमें कोई प्रॉब्लम नहीं होगी.
शान- अरे लेकिन …

वो आगे कुछ कहे, उससे पहले मैंने फिर से उसके लंड को दबाया और कहा- क्यों चिंता कर रहे हो. अगर चाहो तो उसकी चूत भी दिलवा दूंगी. एक चूत पर दूसरी चूत मुफ्त.

उसने मेरी चूत पर हाथ फेरते हुए कहा- अरे नहीं जान … मेरे लिए तो तेरी यही काफी है.
मैं- तो अब बिना वक़्त जाया किए जल्दी से चलो.

हम दोनों फिर से रेडी होकर होटल से बाहर निकले. हमने ऑटो लिया और सीधा अपनी सहेली घर जाने लगे. तभी मेरी फ़ोन की घंटी बजी. मैंने देखा तो माँ का फ़ोन था. मैंने शान को चुप रहने का इशारा किया और फ़ोन ले लिया.

मैं- हां माँ क्या बात है?
माँ- बेटा तेरे पिताजी को बिज़नेस के सिलसिले में बाहर जाना पड़ा. वो अभी घर आए थे. उन्होंने खाना खाया और वो सामान लेकर निकल गए. अब तू भी रात को घर खाना खा कर ही आने वाली है, तो मैंने सोचा मैं भी अपने सहेलियों के साथ बाहर खाने का प्लान बना लेती हूँ.
मैं- तो आप कितने बजे जा रही हो?
माँ- मैं तो अभी निकल रही हूँ. मैंने ये पूछने के लिए फ़ोन किया कि क्या तेरे पास घर की चाबी है?

मैं सुनकर बहुत खुश हुई- हां माँ मेरे पास घर की एक्स्ट्रा चाबी है. तुम चिंता मत करो तुम आराम से जाओ.

बात पूरी होते ही मैंने फ़ोन रख दिया. मैंने ऑटो वाले भैया को अपने घर का पता बताया और घर की ओर चलने को कहा.

शान ने पूछा- क्या हुआ?

मैंने उसे इशारे से ही चुप रहने को कहा. फिर दस मिनट बाद हम घर पहुंचे. मैंने देखा तो घर बंद था. शान ने ऑटो वाले को पैसे दिए और वो मेरे पास आया.

वो कुछ कहने से पहले ही मैंने उससे कहा- यार माँ अभी अभी अपनी सहेली के घर गई हैं. वो अब रात को आराम से आएंगी. अब तो हमारे पास बहुत टाइम है.

मैंने घर का दरवाजा खोला और झट से शान को अन्दर खींच लिया. मैं तो पूरी तरह से पागल हो चुकी थी. अन्दर आते ही मैं उससे लिपट गई और उसे चूमने लगी. मैंने दरवाजा जोर से धकेल दिया. हम किस करते हुए सोफे तक आए. हम दोनों में बुरी तरह से वासना जगी हुई थी. मैं सोफे पर बैठी और शान की पैंट और अंडरवियर जल्दी से उतार दी.

आअअहह … जिस लंड को फोटो में देख इतने दिनों से मेरी चूत गीली हो रही थी, वो लंड आज मेरे सामने था. सच में उसका लंड काफी मोटा था. मैंने उसे अपने दोनों हाथों से पकड़ा. उसके टोपे पर जैसे ही मैंने अपनी जीभ फेरी, शान की मुँह से आह्ह की आवाज़ आयी. मैं धीरे धीरे लंड को पूरा मुँह में लेने लगी. मैं अब काफी मस्त हो चुकी थी. मैं लंड को बड़ी प्यार से चूसने लगी. लंड चूसते चूसते मैंने अपनी आंखें ऊपर की ओर शान की तरफ देखा, तो वो अपनी आंखें बंद करके लंड चुसाई का मजा ले रहा था.

मैं उसके लंड को और जोर जोर से चूसने लगी. साथ ही साथ मैं उसके अंडकोष के साथ खेलने लगी.

लगभग दस मिनट तक मैंने उसके लंड को बड़ी प्यार से चूसा. फिर उसने मुझे उठाया और और मेरी सलवार को जल्दी जल्दी से उतारने लगा. उसने मेरी पैंटी भी उतार दी और मुझे सोफे पर लिटा दिया.

वो मेरी सफाचट चूत की ओर देखते हुए कहने लगा- आह क्या मस्त चूत है यार तेरी. आज तो इसका बुरा हाल करूंगा.

इतना कहते ही वो मेरी चूत पर एकदम से टूट पड़ा. वो बड़ी प्यार से मेरी चूत को चाटने लगा. वो अपनी जीभ को मेरी चूत के अन्दर तक ले जाता और मुझे अन्दर आग सी लगने लगती.

मेरी चुत पहेली ही काफी गीली हो चुकी थी. मैंने उससे कहा- यार, मेरी चूत काफी गीली हो चुकी है. ये तेरे लंड के लिए तरस रही है … प्लीज बाद में चाट लेना … अभी पहले अपना लंड मेरी चूत में डाल दो और फाड़ दो मेरी चूत को.

उसने बड़े प्यार से मेरी ओर देखा. फिर वो खड़ा होकर उसने अपने बाकी के कपड़े उतार दिए. उसकी पैंट तो पहले से ही उतरी हुई थी. अपनी शर्ट उतार कर मेरे कपड़े भी खींच दिए.

फिर उसने अपने लंड के टोपे को मेरी चूत के छोटे से द्वार पर रखा और वो अपने लंड को चूत के अन्दर डालने ही वाला था कि तभी एक धमाका हो गया.
“साली रंडी … ये क्या कर रही है?”

मैं और शान घबरा गए. मैंने देखा, तो दरवाजे पर माँ खड़ी थीं. मैं और शान जल्दी से अपनी कपड़े पहनने लगे. माँ बड़ी गुस्से में हम दोनों की ओर आने लगीं.

सेक्स की आग में मैंने देखा ही नहीं था कि दरवाजे की कुण्डी नहीं लगाई थी.

मेरी माँ ने शान का हाथ पकड़ लिया था और वो उसको गुस्से से देख रही थीं. मैंने देखा कि माँ की साड़ी का आंचल ढलक गया था और उनके ब्लाउज से उनको चूचियां बड़ी तेजी से उठ-बैठ रही थीं. ऐसा इसलिए हो रहा था क्योंकि उनकी सांस तेज गति से चल रही थी.

मैंने सर झुका कर माँ से कहा- मम्मी शान को जाने दीजिए प्लीज़ … उसकी कोई गलती नहीं थी.
मेरी मम्मी ने मेरी तरफ देखे बिना मुझसे तेज स्वर में चिल्लाते हुए कहा- हां ये तो मुझे मालूम है कि जब तक लड़की की चुत में चुल्ल न हो, तब तक किसी लड़के की हिम्मत हो ही नहीं सकती कि वो उसे चोदने घर में आ जाए.

मैं अपनी माँ के मुँह से चुत चोदने जैसे शब्द सुनकर हैरान थी. मगर इस वक्त मेरी समझ में ही नहीं आ रहा था कि मैं क्या जवाब दूँ.

माँ लगातार शान और मुझे बहन की लौड़ी छिनाल और मादरचोद कुत्ते कहते हुए चुत लंड चुदाई जैसे शब्दों का होलसेल में इस्तेमाल कर रही थीं. मुझे आज माँ को इस रूप में देख कर एक अजीब सी फीलिंग आ रही थी.

जब काफी देर तक माँ ने शान को गालियां दीं, तो शान का टेलेंट सामने आ गया.

माँ बोलीं- साले तू ऐसे ही घर में घुस कर लौंडिया चोदता है … तुझे अपने घर में अपनी माँ बहन चोदने के लिए नहीं दिखती हैं.
शान ने पलट कहा- हां मुझे आपकी चुदक्कड़ लौंडिया ने ही चोदने के लिए बुलाया था. अब आपका भी मन हो तो मैं आपको भी चोद सकता हूँ.

मैं शान के मुँह से ये सुनकर एकदम से हैरान थी कि अब मर गए, ये साला मेरी माँ से ही उनको चोदने की बात कह रहा है.

मेरी माँ ने फुंफकार भरते हुए कहा- अच्छा तू मादरचोद भी है … साले तेरे जैसे कई लंड मैंने अपनी चुत से छील कर बाहर निकाल दिए. भोसड़ी के तू क्या मुझे चोदेगा.

अब शान की जुबान के साथ हिम्मत भी खुल गई. उसने अपनी शर्ट के बटन खोले और मेरी माँ को पकड़ कर अपने सीने से लगाया और कहा- साली रांड … खाए होंगे तूने लंड … लेकिन एक बार मेरे लौड़े का स्वाद चख कर देख तुझे मजा न आ जाए तो कहना. आज तुझे तेरी लौंडिया के साथ एक ही बिस्तर पर चोद चोद कर मस्त कर दूँगा.

इतना सुनते ही मेरी माँ ने उसकी खुली हुई शर्ट खींचते हुए निकाल फेंकी और बोलीं- आ जा कमीने … आज तुझे ही चख कर देखती हूँ.

मैं ये सब देख कर पागल हो गई थी कि मेरी माँ ने तो सीन ही बदल दिया था. मैंने माँ की तरफ देखा, तो उन्होंने मुझसे कहा- खड़ी खड़ी क्या देख रही है साली कुतिया … चल अपने कपड़े उतार और इसके लंड को चूस … आज मैं इसकी माँ चोदती हूँ.

तभी शान ने मुझे खींचा और मेरे सर को अपने हाथ से दबाते हुए मुझे घुटने पर बैठने को मजबूर कर दिया. उसी समय माँ ने शान की पेंट खोल कर नीचे सरका दी. शान ने जल्दीबाजी में चड्डी नहीं पहनी थी. पेंट खुलते ही उसका लटका हुआ लंड मेरी आँखों के सामने लहराने लगा.

मेरी माँ ने उसके लंड को पकड़ा और मेरे मुँह से लगा दिया और बोलीं- चल चूस इसका लंड और इसे मेरी चुत के लिए खड़ा कर.

मैंने भी अब सोचना बंद कर दिया था और लंड चूसना शुरू कर दिया था.

उधर मेरी माँ ने एक मिनट से कम समय में अपनी साड़ी ब्लाउज पेटीकोट सब उतार दिए थे. वो सिर्फ ब्रा पैंटी में रह गई थीं. शान ने हाथ बढ़ा कर माँ की ब्रा को खींचते हुए फाड़ दिया और उनको अपनी तरफ खींच लिया. वो मेरी माँ की चूचियां पीने लगा. उसका एक हाथ मेरी माँ की चुत पर चला गया और उसी वक्त मैंने माँ की पेंटी नीचे कर दी.

शान ने मुझे भी नंगा कर दिया. अब हम तीनों ही नंगे थे.

शान का लंड खड़ा हो गया था उसने मेरी माँ को बिस्तर पर चित लिटाया और उनकी चुत में लंड फंसा दिया. मैं हक्की बक्की खड़ी थी. शान ने मुझे इशारा किया और मैंने उसके लंड को अपनी माँ की चुत में सैट कर दिया.

लंड सैट होते ही शान ने एक झटका मारा और उसका मोटा लंड मेरी माँ की चुत में घुस गया. मेरी माँ वाकयी एक बड़ी चुदक्कड़ थीं, इसका अंदाजा मुझे आज हुआ था.

लंड के घुसते ही माँ के कंठ से आह की आवाज आई और उन्होंने शान का लंड लील लिया. वो गांड उठाते हुए कहने लगीं कि आह … साले भड़वे … तेरा लंड तो बड़ा मोटा है … मजा आ गया.

शान ने धकापेल चुत चुदाई चालू कर दी. कोई दस मिनट मैं उसने मेरी माँ को झड़ जाने पर मजबूर कर दिया था. माँ के झड़ जाने के बाद उन्होंने मुझे शान के लंड के नीचे आने के लिए कहा.

माँ- आ जा तू भी इसके लंड से चुद ले … साले का बड़ा मस्त लंड है … तेरी पसंद मुझे भी पसंद आ गई.

मैं क्या कहती कि माँ आज ये मेरी चुत की चुदाई पहले करने वाला था और तुमने इसको झूठा कर दिया.

शायद ये बात शान ने समझ ली थी और उसने कहा- आंटी, आज मैं आपकी बेटी की चुत की चुदाई करने ही आया था. वो तो आपकी चुत गरम हो गई इसलिए मुझे पहले आपको चोदना पड़ा.
माँ ने ये सुना तो वो चुप रह गईं.

खैर … अब तो जो होना था, सो हो ही चुका था. अच्छी बात ये थी कि अब मेरी चुत में लंड ठीक से घुसने का समय आ गया था.

मेरी माँ ने मुझे लिटा कर मेरी चुत को चूस कर शान के लंड के लिए रेडी किया और शान के लंड को भी माँ ने चूस कर कड़क कर दिया.

शान ने मेरी चुत के नीचे तकिया लगाया और लंड का सुपारा मेरी बुर की फांकों में लगा दिया. मुझे उसका सुपारा एकदम हॉट लग रहा था.

मेरी माँ ने शान से कहा- गाड़ दे झंडा … क्या देख रहा है.
शान ने एक झटका मारा और मेरी चुत में उसका लंड घुस गया. मेरी चीख निकल गई … लेकिन अभी चीखने चिल्लाने से किसी बात का कोई डर नहीं था. शान ने बिना रुके मेरी चुत में लंड आगे पीछे करना जारी रखा और कुछ ही समय में मेरी चुत ने चुदाई का मजा लेना चालू कर दिया.

माँ मेरी चूचियों को सहला रही थीं और शान मेरी नंगी माँ की गांड पर चमाट देते हुए मुझे धकापेल चोदने में लगा था.

कुछ ही समय में शान ने अपने लंड का पानी मेरी बुर में छोड़ दिया. उसी समय मैं भी निकल गई और शिथिल हो गई.

हम तीनों ने चुदाई का सुख लूट लिया था.

चुदाई के बाद मेरी माँ नंगी ही किचन से चाय बना कर ले आईं और हम तीनों ने साथ बैठ कर चाय पर चुदाई की चर्चा की.

माँ ने मुझे बताया कि पापा के चले जाने के बाद वो अपने किसी फ्रेंड से चुदने के लिए ही गई थीं. लेकिन उसके भी बाहर होने के कारण वे जल्दी घर लौट आई थीं.

अब मेरी माँ मेरी राजदार हो गई थीं और इसके बाद से चुदाई का खेल मैं अपनी माँ के साथ ही किसी न किसी लंड के साथ खेलने लगी थी.

आप सभी को मेरी और मेरी माँ की चुत चुदाई की कहानी कैसी लगी, प्लीज मुझे मेल करना न भूलें.
आपकी मोना डार्लिंग

माँ बेटी दोनों एक ही लंड से चुदीं-1 (Maa Beti Dono Ek Hi Lund Se Chudi- Part 1)

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दोस्तो, मेरा नाम मोनाली है. लेकिन सभी लोग मुझे प्यार से मोना कहते हैं. आप मुझे प्यार से मोना डार्लिंग कह सकते हो.
अन्तर्वासना पर मैंने काफी सारी कहानियां पढ़ी हैं, तो मैंने सोचा कि क्यों ना मैं भी अपनी ज़िन्दगी के एक बेहतरीन लम्हे को सेक्स कहानी के जरिए आप तक पहुंचाऊं.

दोस्तो, मेरी उम्र इक्कीस साल है. मैं दिखने में काफी हॉट एंड सेक्सी हूँ. मेरे घर में मेरी माँ पिताजी और एक भाई है. मेरा भाई मुझसे छोटा है और वो बाहर हॉस्टल में रह कर पढ़ाई करता है. मेरी माँ बहुत सुन्दर हैं और उनको सज-धज कर रहना काफी पसंद है. मेरी माँ देखने में मेरी बड़ी बहन जैसी ही लगती हैं.

मैं इंजीनियरिंग के तीसरे वर्ष में पढ़ रही हूँ. ये बात तब की है, जब मेरी इंजीनियरिंग के दूसरे वर्ष की परीक्षा ख़त्म हुई थी. इस समय तक मैं इंटरनेट की रंगीन दुनिया से वाकिफ नहीं थी. हां जी रंगीन दुनिया से मेरा मतलब ब्लू फिल्म के साथ साथ सोशल मीडिया आदि से है.

मेरी परीक्षा ख़त्म होने के बाद मेरी एक सहेली ने मुझे फेसबुक सोशल नेटवर्किंग साइट से रूबरू करवाया. पहले तो मुझे ये सब काफी बोरिंग लगता था. लेकिन धीरे धीरे मेरी नए नए लोगों से दोस्ती होने लगी और मुझे काफी मजा आने लगा.

अब मेरे दिन का ज्यादातर समय फेसबुक पर बीतने लगा था. इसी के चलते फेसबुक पर मेरी मुलाक़ात शान से हुई. वो मुझे काफी आकर्षक लगता था. शान की उम्र 24 वर्ष थी. वो दिखने में साधारण सा ही था. शान एक साढ़े पांच फिट के कद का, औसत जिस्म वाला लड़का था. अब आप सोच रहे होंगे कि इतने साधारण से लड़के से मैं क्यों आकर्षित हुई. मैं बताना चाहूंगी कि वो दिखने में भले ही साधारण सा था, लेकिन वो था काफी दिलकश.

वो काफी अच्छी बातें करता था. कुछ अलग ही अंदाज़ था उसकी बातों में. और यही वजह थी कि मैं उसकी तरफ आकर्षित हुई थी. वो किसी को भी अपनी बातों से झट से पटा लेता था. उसके अन्दर बात करने की गजब की क्षमता थी.

हम हर रोज कम से काम एक घंटा तो बात करते ही थे. हम दोनों एक दूसरे से इतने खुल चुके थे कि अब हमारी ज्यादातर बातें सेक्स को लेकर होने लगी थीं. मैं तो जब भी सेक्स के बारे में सोचती या सुनती थी, तो मेरी चूत एकदम से गीली हो जाती.

शान अपनी बातों से मुझे काफी उत्तेजित करता था. वो मुझे इतना अधिक उत्तेजित कर देता था कि मैं बिना अपनी चूत में उंगली किए सो नहीं पाती थी.

एक दिन हम दोनों बात कर रहे थे, तो मैंने उससे पूछा- शान एक बात बताओ तुम्हें सबसे ज्यादा किस में दिलचस्पी है? लड़की में या औरत में?
उसका झट से जवाब आया- औरत में.
मैं- औरत में ऐसा क्या होता है, जो लड़की में नहीं? तुम लड़के लोग औरतों में इतनी रूचि क्यों रखते हो?
शान- यार ऐसी बात नहीं है. मुझे लड़कियों में भी दिलचस्पी है, लेकिन एक औरत जो मज़ा देती है, वो ज्यादातर लड़कियां नहीं दे पाती हैं.

पता नहीं उस वक़्त मेरे मन में न जाने क्या आया, मैंने उससे कहा- ऐसा जरूरी नहीं है. एक जवान लड़की भी किसी तजुर्बेदार औरत से ज्यादा मजा दे सकती है.
शान- अच्छा, तुम तो ऐसे कह रही हो जैसे तुम खुद किसी और से ज्यादा मजा दे सकती हो.
मैं- हां … चाहो तो आजमा सकते हो.

मैंने उससे कह तो दिया था लेकिन मैं सोच में पड़ गई कि मैंने इससे ये क्या कह दिया. साथ ही मैं ये भी सोचने लगी थी कि ये भी मेरी इस बात का क्या जवाब देगा.

अगले दो मिनट तक उसका कोई जवाब नहीं आया. मैं उसको फिर से मैसेज करने ही वाली थी कि उसने एक तस्वीर भेजी.

वो तस्वीर उसके लंड की थी. मैं तो उसे देखती ही रह गई. लंड ज्यादा बड़ा नहीं था. बस सामान्य साढ़े पांच इंच का ही था. ये मोटा कुछ ज्यादा ही था.

उस समय तो मैंने उसका लंड पहली बार ही देखा था लेकिन आज तो मैं ये कह सकती हूँ कि मैंने इससे भी बड़े लंड लिए हैं. लेकिन एक बात अब भी पक्के तौर पर कह सकती हूँ कि शान का लंड खूब मोटा था. अब तक जितने भी लंड मेरी चुत में घुसे हैं, उन सब में शान का लंड सबसे मोटा था. शान के लंड की लम्बाई भले ही कम थी, लेकिन मोटाई उसके लंड को खासियत देती थी.

खैर … उससे मेरी चैट जारी थी. शान ने जब अपने खड़े लंड की फोटो भेजी, तो मैं एक मिनट तक बिना पलक झपकाए उसे देखती रही थी.

फिर मैंने देखा कि उसने एक मैसेज भी भेजा था. उसने लिखा था- क्या तुम इसे ले पाओगी … इसको खुश कर पाओगी?

उसका लंड देख कर मैं एकदम से गरम हो गई थी और मेरी चुदास ने मुझे कुछ अलग ही करवा दिया. मैंने कुछ अलग अंदाज़ में उसे जवाब दिया.

मैंने उसे अपनी चिकनी चूत की तस्वीर भेजी और लिखा- तेरे लौड़े को मेरी चुत बड़े आराम से खा जाएगी.
शान का पलट कर जवाब आया- अच्छा. अब तो लगता है तेरी चुत को आजमाना पड़ेगा. क्या तुम सच में मेरे साथ चुदाई करना चाहोगी?

मैं समझ नहीं पा रही थी कि इस सवाल का क्या जवाब दूँ. शान काफी अच्छा था. मैंने कहा- करना तो चाहूंगी लेकिन कैसे? हम दोनों तो काफी दूर रहते हैं.

दोस्तो, मैं माफ़ी चाहती हूँ मैं आपको हमारे शहर का नाम नहीं बता सकती हूँ आप मान लीजिएगा कि मैं इंदौर से हूँ. मैं आशा करती हूँ कि आप मेरी परेशानी को समझ सकते हैं. जबकि शान कोल्हापुर में रहता था, जो कि महाराष्ट्र राज्य में है. ये शान का असली शहर का नाम है.

शान- उसकी चिंता मत करो. मैं काफी दिनों से इंदौर घूमने आने की सोच रहा था. अब तो वहां आने की एक वजह भी मिल गई.

मैं तो काफी खुश हो गई. ऐसा नहीं था कि मैं शान के साथ सेक्स के लिए उतावली हो रही थी. वैसे मैं थोड़ी उत्साहित तो थी, लेकिन मैं उससे मिलने को ज्यादा बेताब थी.
उसने मुझसे कहा कि वो अगले महीने के सात तारीख को इंदौर आएगा. उसने सारी बुकिंग्स भी कर ली थीं.

फिर क्या था. अगले दिन से तो हम और भी खुल कर बातें करने लगे. लेकिन हमने दोबारा एक दूसरे को कोई भी तस्वीर नहीं भेजी. मैं तो बड़ी बेसब्री से सात तारीख का इंतज़ार करने लगी थी.

आखिर कर इंतज़ार ख़त्म हो गया. सात तारीख की सुबह उठते ही मैंने पहले अपना फ़ोन देखा. उसका मैसेज आया हुआ था कि वो नौ बजे तक इंदौर पहुंच जाएगा. उसने अपने होटल का पता बताया. होटल पहुंचने का बाद वो फ्रेश होकर थोड़ा आराम करना चाहता था इसलिए उसने सीधा मुझे दोपहर एक बजे मिलने की इच्छा जताई. उसने आगे लिखा कि वो दोपहर का खाना मेरे साथ मेरे पसंदीदा रेस्टोरेंट में करेगा.

मैं काफी खुश थी … और उससे मिलने को अब और भी बेताब थी. मैंने बारह बजे घर से निकलने का सोचा.

फ्रेश होकर मैंने माँ से कहा- आप मेरे लिए दोपहर का खाना मत बनाना. मैं आज अपनी सहेली के घर जाने वाली हूँ, उसी के घर खा लूंगी.

आपको तो पता ही होगा कि ऐसी परिस्थिति में वक़्त जल्दी से कटता नहीं है. मेरे साथ भी वैसा ही हुआ. वक़्त काफी धीरे धीरे कट रहा था.

आखिरकार बारह बज गए. मैं ज्यादा सजधज कर तैयार नहीं हुई थी. मैंने एक सिंपल सलवार कमीज पहनी ताकि माँ को शक न हो.
मैंने माँ से कहा- मैं अपनी सहेली के घर जा रही हूँ और अभी अभी रात में भी खाना खाने का प्लान बना है, तो मैं रात का खाना खाकर ही आऊंगी.

मैं तो मन ही मन कह रही थी कि खाना तो खाऊंगी ही … लेकिन साथ में अपनी चूत को शान का लंड भी खिलाऊंगी. चुत लंड का ख्याल आते ही मेरा हाथ मेरी चूत पर आ गया.

तभी माँ ने कहा- अरे बेटी, तुम्हारे पिताजी तो आज घर देरी से आने वाले हैं. तुम्हें आने में देर भी हो जाए, तो कोई चिंता नहीं है. बस खाना खाने घर ही आ जाना.
मैं- नहीं माँ … अभी दोस्तों के साथ बाहर खाने का प्लान बना है. आज रात का खाना मैं उनके साथ ही खाऊंगी … प्लीज!

मेरे काफी मनाने के बाद माँ मान गईं. इन सब बातों में मेरे दस मिनट चले गए थे. अब मुझे जल्दी जाना था. मैंने जल्दी से ऑटो ली और उसके बताये हुए होटल के बाहर रुक गई. मैंने ऑटो वाले को रुकने को कहा और शान को फ़ोन किया.

फोन उठते ही मैंने कहा कि मैं होटल के नीचे तुम्हारा वेट कर रही हूँ.
उसने कहा- ओके मैं आ रहा हूँ.

मैं होटल के गेट की तरफ देखते हुए उसके आने का इंतज़ार कर रही थी. कुछ पांच मिनट बाद शान गेट से बाहर आया. उसने मुझे सामने खड़ा पाया और वो मेरी तरफ आने लगा. जैसे जैसे वो मेरे पास आ रहा था, वैसे वैसे मेरी दिल की धड़कनें तेज़ हो रही थीं. वो मेरे पास आया और उसने मुझे बड़े प्यार से हाय कहा.

जैसा कि मैंने पहले भी कहा था कि शान दिखने में ज्यादा हैंडसम नहीं था. साधारण सा दिखने वाला था. लेकिन उसकी आंखें किसी को भी आकर्षित कर करने वाली थीं. चेहरे पर एक दिलकश मुस्कान थी.

मैंने भी उसे हाय कहा. चूंकि हम वहां खड़े रह कर बातें नहीं कर सकते थे, इसलिए मैंने उसे ऑटो में बिठाया और मैं उसे नजदीक के ही अपने पसंदीदा रेस्टोरेंट में ले गई. वहां हमने अच्छे से खाना खाया और ढेर सारी बातें भी की. बिल पे करने के बाद जब हम बाहर आए, तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया.

उसने कहा- तो क्या तुम अब अपनी बात को साबित करना चाहोगी?
मैंने उसकी तरफ देखा और अपनी कोहनी मारते हुए उससे कहा- अच्छा तुम्हें इतनी जल्दी है. अभी तो खाना खाया है … कुछ देर रुक तो लो. मैं कहीं भागी थोड़ी जा रही हूँ.

मेरी इस बात पर वो भी मुस्कुराया और सहमति दिखाई. हमने फिर से ऑटो लिया और उसके होटल में आ गए. वो मुझे अपने कमरे में ले गया.

शान- अगर तुम फ्रेश होना चाहती हो, तो हो सकती हो.
मैं- नहीं, मैं फ्रेश ही महसूस कर रही हो.
इतना कह कर मैं बेड पर लेट गई.

शान ने अपनी कमीज के दो बटन खोलते हुए मुझे देखा. मैंने उसकी नग्न होती छाती पर अपनी मादक नजर टिका दी. वो कपड़े उतार कर धीरे धीरे मेरे ऊपर आने लगा. मेरे ऊपर आने के बाद उसने मेरे आँचल पर पड़े दुपट्टे को हटाया … और बड़ी नफासत और प्यार से मेरे माथे को चूमा.

उसके होंठों का स्पर्श मुझे अन्दर तक सनसनी दे गया. फिर धीरे धीरे नीचे आते हुए उसने मेरे ऊपरी होंठ को अपने दोनों होंठों के बीच में दबाया और मेरे होंठों को चूमने लगा. या यूँ कहूँ कि वो मेरे होंठ चूसने लगा. वो बड़े प्यार से मेरे होंठ चूस रहा था. मुझे ऐसा मजा पहले कभी नहीं आया था.

शान पूरी तरह से मेरे ऊपर लेट चुका था. जिसकी वजह मैं उसके खड़े लंड को महसूस कर पा रही थी.

बिना रुके पांच मिनट तक उसने मुझे हर खुले अंग पर चूमा … मेरे होंठों को चूसा. फिर वो खड़ा हुआ और अपने बाकी के कपड़े उतारने लगा.

मैंने उसे रोका. उसे कुछ समझ नहीं आया. वो संदिग्ध नज़रों से मुझे देख कर बोला- क्या हुआ? क्या तुम ये सब करना नहीं चाहती? मेरी जान मैं तुम्हें जबरदस्ती नहीं करूंगा. अगर तुम्हें ये सब ठीक नहीं लग रहा है, तो कोई बात नहीं मैं तुम्हारे साथ कुछ नहीं करूंगा. मैं …
मैंने उसे बीच में ही रोका और कहा- शान ऐसी कोई बात नहीं है. मैं बस ये सब होटल में नहीं करना चाहती. मैं यहां असुविधाजनक महसूस कर रही हूँ. तुम जानते हो होटल में …

मेरे इतना कहते ही वो समझ गया कि मेरे कहने का क्या मतलब है. मुझे होटल में सेक्स करना उचित नहीं लगता.

शान ने अपने दोनों हाथों को मेरे कंधों पर रखा और पूछा- तो मेरी जान, अब हम क्या करें?

मैं उसके पैंट के ऊपर से ही लंड पर हाथ फेरा और उसे जोर से दबाते हुए कहा- चिंता न करो. मैंने सारा इंतजाम कर दिया है. हम दोनों मेरी एक सहेली के घर चलते हैं. उसके घर में अभी उसके अलावा कोई नहीं है.

आपको मेरी ये सेक्स कहानी कैसी लग रही है, प्लीज मुझे मेल जरूर करें और इस गर्म चुदाई की कहानी के शीर्षक को लेकर चिंतित न हों, अगली बार आपको मेरी माँ और मेरी चुत की चुदाई का मजा पढ़ने का मिलेगा, लेकिन उसमें कुछ ट्विस्ट है जो आपको लंड हिलाने और चुत में उंगली करने पर मजबूर न कर दे, तो आप अपनी मोना डार्लिंग की चुत पर थूक देना.

तो फ्रेंड्स मुझे अपनी इस चुदाई की कहानी के लिए आपकी मेल का इन्तजार रहेगा.
आपकी मोना डार्लिंग


तीन मर्द और मां की चुदाई (Teen Mard Aur Meri Maa Ki Chudai)

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हाय दोस्तो, हम निशा और विराट एक बार फिर से आप लोगों के लिए माँ की चुदाई की कहानी लेकर हाजिर हैं. आप हमेशा हमें मेल कीजिएगा और अपने कमेंट्स भेजिए. आप हमें अपनी फंतासी भी बताइएगा कि आप क्या चाहते हैं. मेरी कहानी के लिए आपके कामुक विचारों का स्वागत है.

मेरी पिछली कहानी
मॉम को चोदने की चाहत-2
में मैं निशा अपनी मसाज करवा रही थी. उसी मसाज पार्लर वाली से तैयार होकर मैंने अपनी चूत साफ करवा ली और रेडी हो गई. नामित मेरे लिए कपड़े रख कर गया था. मैंने देखा कि उन कपड़ों में एक छोटी से मिनी स्कर्ट थी. मैंने वो मिनी स्कर्ट पहनी. अन्दर रेड कलर की बिकिनी और ऊपर से एक टॉप पहन लिया था. ये एकदम टाइट कपड़े थे, जो मेरे जिस्म से एकदम चिपके हुए थे. मैं इन कपड़ों में एक हसीन लौंडिया सी लगने लगी थी.

उस मसाज वाली ने मेरा मेकअप किया और वो चली गयी. मुझे कुछ प्यास सी लगी थी, तो फ्रिज खोला और उसमें से एक बियर का कैन लेकर पीने लगी.

बियर कुछ ज्यादा ही तेज थी, जिससे मुझे मजा आने लगा और इस वक्त न जाने क्यों मुझे चुदास सी चढ़ने लगी थी. शायद इस बियर में कुछ स्पेशल था या जो दवाई नेहा(मेरे बेटे विरत के दोस्त नामित की माँ) ने मुझे जाते समय दी थी, शायद ये उसका ही असर था.

मैं अपनी स्कर्ट उठा कर चूत पर हाथ फेरने लगी. इधर घर में नामित भी नहीं था. मैं इस वक्त बिल्कुल अकेली गर्म हुए जा रही थी.

तभी 7 बजे शाम को दरवाजे की बेल बजी तो मैंने दरवाजा खोला. सामने एक 6 फीट का एकदम काला आदमी खड़ा था, जो लगभग 45 साल का था. उसके शरीर का हर भाग एकदम किसी पहलवान जैसा कठोर और कसा हुआ था. उसने शर्ट पैन्ट पहना हुआ था. वो मुझे ऊपर से नीचे तक घूरे जा रहा था.

मैंने उससे पूछा- कौन चाहिए … क्या काम है?
उसने थोड़ी अलग ही भाषा में टूटी फूटी हिंदी में बोला- मुझे नामित ने बुलाया है.
उसने बस इतना कहा और मेरे उत्तर का इन्तजार किये बिना घर में अन्दर घुस आया.

मैं अभी उसे बोल ही रही थी कि नामित यहां नहीं है लेकिन वो अपने लंड पर हाथ फेरता हुआ सोफे पर बैठ गया और मुझे घूरने लगा. मैं भी अन्दर से गर्म तो थी ही, एक तो नेहा ने दवाई जो पिलाई हुई थी. ऊपर से पार्लर वाली ने मालिश करके और मेरी चूत साफ करके मुझे और भी गर्म कर दिया साथ ही बियर का नशा भी मुझे मदमस्त किये जा रहा था.

वो आदमी लगातार मेरे मम्मों को घूर रहा था. चुस्त बिकिनी और टाइट टॉप की वजह से मेरे बूब्स और उछाल मार रहे थे. मैंने उसकी पैन्ट में लंड के पास देखा, तो उधर मुझे लगभग 9 से 10 इंच का कड़ा लंड का उभार नज़र आ रहा था. शायद उसने अन्दर कुछ नहीं पहना था, ऐसा साफ़ दिख रहा था.

मैं उसकी तरफ देखती रही, तो उसने अपने लंड को सहलाते हुए पूछा- तुम्हारा नाम क्या है?
मैं अचकचा कर बोली- निशा … और तुम्हारा?
तो उसने बोला- मेरा नाम डेविड है और मैं नामित का बॉस हूँ. मैं अफ्रीकन हूँ.
मैंने उसकी बात सुनकर ओके बोला.
डेविड बोला- जाओ जाकर फ्रिज ने वाइन की बोतल रखी है, वो ले आओ, जब तक मैं गिलास लाता हूँ. आज मैंने नामित को थोड़ा काम के लिए भेजा है, तो उसने मुझे बताया कि तुम घर पर अकेली हो, इसलिए उसने मुझे इधर भेजा है.

मैं उसकी बात सुनकर अन्दर जाकर फ्रिज से वाईन लेकर आ गई. जब तक उसने गिलास लगा लिए थे और टीवी भी चालू करके देख रहा था.
वो मुझसे बोला- आओ मेरे बगल में बैठो.
मैं उसके बाजू में बैठ गई. उसने खुद दो गिलासों में वाइन डाली और मुझे भी एक गिलास थमा दिया. मुझे थोड़ा नशा तो पहले से ही था, अब उसके साथ और चढ़ रहा था.

तभी उसने टीवी में पोर्न चालू कर दिया और देखने लगा. साथ ही उसने अपनी पैन्ट की ज़िप भी खोल दी और लंड को सहलाने लगा. उसका लंड पूरा काला बैगन की तरह बहुत मोटा और तगड़ा था. मुझे भी टीवी पर पोर्न देख कर अब चूत में आग जलनी शुरू हो गयी थी.

तभी उसने मुझसे आंख मारते हुए कहा- ले आ जा … चूस ले इसे!
मैंने उसकी बात नहीं मानी और ना बोल दिया.
उसने लंड को हिलाते हुए कहा- तुम बहुत सुंदर हो और सेक्सी भी हो. मुझे तुम जैसी संस्कारी औरत और इंडियन चूत चोदना बहुत पसंद है. मैंने नामित से तेरे लिए बात की है. तभी तो नामित ने मुझे बताया है कि उसने कैसे तुझे चोद डाला है.
मैं उसकी बात सुनकर गर्म हुए जा रही थी.

उसने आगे बोला- मुझे पता है कि तुमने अब तक सिर्फ अपने पति से और नामित से ही चुदाई करवाई है. मैं आज तुमको चोदने के लिए कुछ भी करने को तैयार हूँ. तुम जो बोलोगी, मैं वो करूँगा.
मैं सिर्फ उसको सुन रही थी और अपनी वाइन का मजा ले रही थी.

डेविड बोला- अगर तू बोलेगी तो जितना पैसा मांगेगी, मैं तुमको दे दूंगा.
मैं उससे पैसे की बात से नहीं मानने वाली थी. हां मुझे चुदना तो था, पर अगर वो सीधे मुझ पर चढ़ जाता, तो मैं भी बिछ जाती. लेकिन वो साला ऐसा नहीं कर रहा था. इसलिए मैं भी थोड़ा मजा ले रही थी और खुद को कन्ट्रोल करते हुए कुछ नहीं बोल रही थी.

मैं बस मन ही मन मुस्कुरा रही थी और अपनी स्कर्ट से झांकती टांगें उसको दिखाए जा रही थी. ये सब देख कर उससे कन्ट्रोल नहीं हो रहा था. उसने मुझे गाली देते हुए कहा- बोला- साली अभी चुदवाएगी या नहीं?
मैंने ना में सर हिलाया, तो बोला- साली मेरे को पता है … तेरा बेटा भी आया है. उसे तेरे और नामित की चुदाई के बारे में सब बता दूंगा.

यह सुनते ही मेरी गांड बिना लंड डाले ही फट गयी और मैं डर गई, मैंने उससे ‘नो नो …’ कहा, तो इससे उसकी हिम्मत बढ़ गयी और वो सीधे मेरे मम्मों को अपने हाथों में ले कर मसलने लगा और मेरे गले को अपनी जीभ से चाटने लगा.

मेरी चूत तो पहले ही गर्म थी. उसका हाथ लगते ही चूत पानी छोड़ने लगी. तभी बाहर घंटी बजी तो मैं डर गई कि कहीं विराट और नेहा तो कोई नहीं आ गए. मैं झट से रूम में भाग गई और डेविड ने जाकर दरवाजा खोला.

मैंने अन्दर से झांक कर देखा तो बाहर नामित था. मैं बाहर आई और देखा कि नामित के साथ एक और आदमी था. वो तो नामित से भी छोटा था, करीब 27 साल का रहा होगा. वो नामित जैसा ही एकदम गोरा था.

नामित बोला- ये डेविड का दोस्त है … इसका नाम निक है.
डेविड ने नामित को डांटते हुए बोला- तू बहुत गलत टाइम में आया.
नामित ने बोला- अरे कुछ नहीं सर अभी सब मिलकर मजे करेंगे.

वे सब मुझे घूरने लगे. अब मुझे डर लगने लगा तो नामित ने बोला- कुछ नहीं जान … बस आज तेरी जमकर कुटाई होगी और तुझे कई तरह के मजे मिलेंगे. हम तो तेरी दो साल से ना चुदी हुई चूत की कसर पूरी करेंगे.
तभी डेविड सर ने बोला- सबसे पहले मैं काम करूँगा … आधा तो कर ही चुका हूं और अभी मैं इसकी मदमस्त जवानी को देख कर बहुत गर्म हूँ.
इस पर नामित और निक एक साथ बोले- सर हम भी गर्म हैं, चलो सब साथ ही खेलते हैं.

ऐसे बोलते हुए निक ने मेरी टाइट स्कर्ट से उभरती हुई गांड में एक चपत लगाई और बोला- आह … क्या गांड है इसकी.

अब डेविड ने मुझे पीछे से कसकर मेरे मम्मों को पकड़ लिया और अपने लंड को मेरी गांड के छेद में फिट करते हुए सीधे मुझे उठा लिया. अब मेरी गांड के छेद में मुझे डेविड का दस इंच वाला मूसल लंड चुभता सा महसूस हो रहा था. साथ ही मेरे पूरे शरीर में करंट दौड़ रहा था. डेविड बहुत ही कठोरता से मेरी चूचियों को मसल रहा था. उसने मेरे शरीर को समझो, मेरी चूचियों के दम पर ही पकड़ कर ही उठा रखा था.

मेरे मुँह से ‘छोड़ो मुझे …’ यही आवाज़ निकल रही थी. वो मुझे यूं ही उठाए हुए बेडरूम में ले जाने लगा.

तभी निक बोला- अरे सर हमारी मुर्गी को लेकर कहां चले?
इस पर नामित बोला- अरे सर, उधर कहां जा रहे हो आप?
डेविड- मैं इसे बेडरूम में ले जा रहा हूँ.
नामित बोला- बेडरूम क्यों … यहीं आओ सोफे में, हम भी तो है … हमारे लौड़े में भी तो आग लगी हुई है.

डेविड ने मुझे वहीं बेड पे पटक दिया और मेरी स्कर्ट उठा दी.

मुझे पता था कि मेरी चूत बहुत पानी छोड़ चुकी है. मेरी पेंटी एकदम गीली हो चुकी है. डेविड ने मेरी कच्छी हटा दी और अपनी दो उंगलियां सीधे अन्दर तक घुसेड़ दीं. उसकी मोती उंगली घुसते ही मैं चिहुंक उठी ‘अअअह … ओहह … ऊम्म …’

अब तक निक ने मेरे होंठों को अपने होंठों से लगा दिया था, वो मुझे लंबे चुम्बन देने लगा. उधर नामित मेरे टॉप को निकाल कर मेरे मम्मों को चूस रहा था. नीचे डेविड ने मेरी चुत में अपना मुँह लगा दिया था और वो मेरी चूत चूस रहा था. मेरे हर अंग की चुदाई से मुझे बहुत आनन्द आ रहा था. मैं अपने हाथों से नामित के लंड को सहला रही थी क्योंकि वहां पर एक वही लंड था, जो मुझे अपना सा लग रहा था.

अब मेरे होंठों की लंबी चटाई के बाद निक ने अपना मुँह हटाया और मेरे कपड़े उतारने लगा. उधर डेविड अभी भी लगातार मेरी चूत को चूस रहा था और हाथ से मेरी चूत और मम्मों को सहला रहा था.
अब इस चारों तरफ के मेरी मुँह से सिसकारियां निकल रही थी- अअहह … उम्म्ह… अहह… हय… याह… उम्म्म्म …. उफ़्फ़!

मैंने नामित के लंड को जोर से पकड़ा और स्पीड से हिलाने लगी. नामित भी जोर जोर से मेरे मम्मों को चूसने लगा. इस सबमें लगभग 20 मिनट तक मुझे चुदाई के पहले की धुआंधार गर्म करने के खेल में मेरा पानी छूट गया.
अब मैं उन तीनों के सामने पूरी नंगी सोफे में रंडियों की तरह अपने पैर फैलाये चिकनी चुत दिखाते लस्त पस्त पड़ी थी.

मेरे सामने तीनों मर्द अपने लंड अपने हाथों में लिए मेरे को घेर कर खड़े थे. मेरी आंखें खुल बंद हो रही थीं … क्योंकि मेरे पति ने मुझे कभी न तो मसला था और ना ही मेरी चूत को अपने हाथ या मुँह से छुआ था. मेरे पति तो सिर्फ मेरी साड़ी उठा कर अपना लंड निकाल कर चूत में धक्के मारते, अपनी धार मारते और सो जाते थे. मैं भी चुदाई का यही मतलब समझने लगी थी, यह सब कुछ मजे मैं जानती ही नहीं थी.

अब तो मैं डेविड की दीवानी हो गयी थी. उसका कसा हुआ काला शरीर मुझे बहुत पसंद आ रहा था.

मुझमें अब भी बहुत गर्मी थी, क्योंकि एक तो दवाई का असर था. ऊपर से बियर और वाइन भी पी ली थी. मुझे सच में दो साल के बाद जिंदगी में ऐसा मजा मिला था. मुझे बचपन से ही विदेश और विदेशी बहुत पसंद रहे हैं.
अब तो मैं कब चुदूँ, ऐसा ही लग रहा था.

वो तीनों फिर से शराब पीने लगे और उन तीनों ने सिगरेट सुलगा ली थीं.
निक ने मेरे मुँह को अपने हाथों से खोला और उसमें शराब टपकाने लगा और फिर अपने होंठों से मेरे होंठों को चूसने लगा. इसके बाद उसने मेरे होंठों के बीच सिगरेट फंसा दी मैंने एक लम्बा कश खींचा तो मुझे खांसी आ गई.

निक मेरे दूध सहलाते हुए मेरी खांसी को रोकने का प्रयास करने लगा. मेरी आंख बंद हो चुकी थीं.
अब डेविड ने कहा- मैं इसके पूरे मजे लेना चाहता हूँ … मुझे 2 घंटे के लिए पूरी तरह ये अकेली चाहिए.

निक और नामित ने ‘ठीक है …’ कहा और फुल वॉल्यूम में डिस्को डांस वाला गाना चला दिया. वे दारू पीते हुए मुझे और डेविड को देखने लगे. मैं भी गाने से जोश में आ गयी थी और डेविड ने अपना लंड मेरे मुँह में घुसेड़ दिया. उसका दस इंच का मूसल लंड मेरे पूरे मुँह को फाड़ रहा था. हम दोनों बिस्तर पर 69 पोजीशन में थे, तो वो अपनी जीभ और उंगली से मेरी चूत को कुरेद रहा था. साथ ही वो एक हाथ से मेरी गांड को मसल रहा था.

मैं अब स्वर्ग का आनन्द महसूस कर रही थी. मुझे यह सब किसी सपने जैसा लग रहा था. अब उसका लंड मेरे मुँह से निकाल कर मेरी चुत के आसपास घूमने लगा. मेरी वासना अब चरम की तरफ बढ़ने लगी थी. इस वक्त मैं भी अपने कन्ट्रोल से बाहर हो रही थी.

मैंने उसे गाली देना शुरू कर दिया और कहा- आह … मादरचोद मत तड़पा … ऐसे तो सारी जिंदगी तड़पी हूँ … अब नहीं तड़फा …. डाल दे रे भोसड़ी के!

इस वक्त नामित मेरे पेट और मम्मों को अपनी जीभ से चाट रहा था. उन दोनों ने डेविड की बात को भुला दिया था. मुझे ऐसा लग रहा था कि कोई रुई से शरीर को सहला रहा है. मस्ती में अब मेरी आंख बंद ही चुकी थीं. अचानक डेविड ने एक धक्का मारा तो मेरी चीख के साथ आंख खुल गयी. उसके एक धक्के में उसका लगभग 6 इंच लंड मेरी टाइट चुत को चीरता हुआ अन्दर घुस आया. उसके मूसल लंड के घुसते ही मेरे मुँह से तेज आवाज निकल गई- आह … अअहह … माँआ … मर गई … उफ़्फ़ …

तभी निक ने अपने होंठ मेरे होंठ पे रख दिये और जीभ मेरे मुँह में अन्दर डाल दी. नामित मेरे बूब्स मसलने लगा. मैं सिर्फ छटपटा रही थी. तभी डेविड ने फिर से धक्का मारा और अब उसका 2 इंच लंड और अन्दर घुस गया. मैं चीखी तो डेविड रुक गया.

मुझे उसका लंड अपनी चूत की जड़ में लगता हुआ सा लगने लगा था. तभी डेविड बोला- जान मज़ा तो अब आएगा … आज तक तक तूने 8 इंच से बड़ा लंड नहीं लिया होगा, इसलिए तेरी चूत सिर्फ इतनी ही फटी है, अब अन्दर की सील टूटेगी, तब देखना.

मुझे उसकी ये सब बातें सुनाई तो दे रही थीं, पर मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था … क्योंकि एक तो मैं नशे में थी, ऊपर से निक और नामित मुझे इस तरह चाट और मसल रहे थे कि उनकी वजह से मैं कामवासना में डूबती जा रही थी.

अब डेविड ने थोड़ा सा अपना लंड निकाला और एक जोर का धक्का मार दिया. उसका लंड सीधे मेरी बच्चेदानी को छू रहा था, जो मुझे गड़ता सा महसूस हो रहा था. मैं इस बार के प्रहार से और जोर से चिल्लाने लगी- अअअई मरररर गई रे … साले ने फाड़ दी … आह मार डाला ऊऊफ़्फ़ … अब नहीं अअहह … उहह!

तभी वो उतना ही लंड अन्दर बाहर करने लगा और फच्च फच्च की आवाज़ पूरे घर में गूंजने लगीं. कुछ ही देर में मेरी चूत को मजा आने लगा. हालांकि मुझे दर्द हो रहा था लेकिन नशे के कारण मुझे मीठा मीठा मजा आने लगा था. साथ ही नामित और निक अपनी चटाई और मसलाई करके मेरी वासना को और बढ़ा रहे थे.

मैं ऐसा आनन्द ज़िन्दगी में पहली बार ले रही थी. मुझे बिल्कुल भी होश नहीं था और अब डेविड ने स्पीड बढ़ा दी और चुदाई के कारण मेरी आवाज और तेज हो गयी थी. मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया था, इसलिए कमरे में बड़ी तेज आवाज ‘फच्च फच्च फक फक घप घप घचघच …’ गूँज रही थी. मैं भी ‘ऊऊहह अअअहह ओहह … उफ़्फ़ …’ करने लगी.

मेरे मजे का कोई ठिकाना नहीं था. मेरी किसी विदेशी मर्द से चुदने की पुरानी ख्वाहिश आज पूरी हो रही थी. अब मुझे मेरे बेटे का या किसी और का डर नहीं रहा था. इधर डेविड ने मेरी दोनों टांगें अपने कंधों पर रखी और मुझे लगातार पेलता रहा. मैं बिस्तर के किनारे पर पड़ी डेविड के लम्बे लंड से चुदे जा रही थी.

तभी निक ने ज़मीन पर लेट कर मेरी गांड में एक धक्का दिया और अपना 8 इंच का लौड़ा मेरी गांड में पेल दिया. इससे मुझे बहुत तेज दर्द हुआ … क्योंकि इससे पहले ज़िन्दगी में नामित ने कल रात ही मेरी गांड पहली बार मारी थी. कल भी दर्द बहुत हुआ था.

आज तो मेरे दोनों छेदों में लंड घुस जाने से मैं चीखने लगी- ऊफ़्फ़फ़ अअहह … ओहह … नहीं रे … बाहर निकाल ले भोसड़ी के!
पर वो दोनों लगातार धक्के मारे जा रहे थे और मेरे दोनों छेदों को ठोके जा रहे थे.

तभी नामित ने मुझे चिल्लाते देख झट से एक ही बार में अपना पूरा लंड मेरे मुँह में घुसेड़ दिया और मेरा मुखचोदन करने लगा. वो मुँह में लंड पेलने के साथ मेरे निप्पलों को भी मसलते हुए सहला रहा था.

अब मैं और डेविड झड़ने वाले थे और फच्च फच्च की आवाज़ बदल कर अब लिक लिक लिक की आवाज आने लगी. मेरा बहुत सारा माल छूटा और तभी डेविड के लंड का माल भी निकल गया. मैं उसके गर्म माल से चूत की परपराहट से स्वर्ग का आनन्द महसूस करके शांत हो गयी थी.

इसके बाद डेविड ने अपना लंड निकाला और मेरी चूत चाटने लगा. पर निक अभी भी लगातार मेरी गांड मार रहा था.

मेरी चूत साफ करने के बाद डेविड उठकर कपड़े पहनने लगा, तो निक ने भी मेरी गांड से अपना लंड निकालकर मेरी चूत में घुसेड़ दिया और धक्के मारने लगा. मैं इसके लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी. इस वक्त मेरी झड़ी हुई चुत में दूसरे लंड के धक्के मुझे अब घायल कर रहे थे. लेकिन निक लगातार चुदाई की स्पीड बढ़ाने लगा. उसने थोड़े ही टाइम में मेरी चूत में ही अपना माल छोड़ दिया और खुद मेरे ऊपर ढेर हो गया.

दो पल बाद निक ने अपना लंड मेरी चूत से बाहर खींचा तो मेरी चूत भोसड़ा बन चुकी थी. उसने वहां पड़ी वाइन की बोतल मेरी चुत में डाल दी और वाइन को चूत में भर दिया. इसे बाद वो वाइन उगलती मेरी चूत को चाटने लगा.

मैं अपने मुँह से कुछ आवाज़ नहीं निकाल पा रही थी क्योंकि नामित लगतार मेरा मुखचोदन कर रहा था.

मेरी चूत में वाइन डालकर पीने के बाद अब निक भी खड़े होकर तैयार होने लगा.

तभी नामित भी मेरे मुँह में ही अपना माल छोड़ दिया. आज पहली बार मैंने मुँह में किसी का माल पिया था, मुझे इस वक्त थक जाने के कारण भूख लग आई थी. इसलिए नामित के लंड का माल खाना मुझे बहुत अच्छा लगा.

लंड रस खाने के बाद मैं वहीं नंगी चित पड़ी रही. तभी मैंने देखा डेविड ने नामित को कहा- यार बड़ा मस्त माल थी. तेरा प्रमोशन पक्का हो जाएगा … मैं इसे फिर से चोदने आऊँगा, अभी मेरी बीवी मुझे फ़ोन कर रही है, तो जा रहा हूँ.

वो चल पड़ा तो निक ने भी बोला- सच में बे, तेरी माल बड़ी मस्त है … सचमुच चुदाई में मजा आ गया. अब मैं भी चलता हूं … इस रंडी को कभी मेरे को अकेले में देना … साली को दिल से खुश करूँगा. इसको कुतिया बना कर चोदूँगा. आज तो मुझे जाना होगा.

यह कह कर वो भी चल पड़ा. मैं अभी भी वैसी ही नंगी चुदी पिटी पड़ी थी.

उधर नामित भी कपड़े पहनने लगा. वो मुझसे बोला- जाओ डार्लिंग, तुम भी जाकर अपने रूम में सो जाओ. माँ और विराट आने वाले होंगे … तुम कपड़े पहनकर ही सोना. मैं भी अपने रूम में सोने जा रहा हूँ.
मुझमें चलने की हिम्मत नहीं थी, तो मैंने उससे बोला- नामित मुझे सहारा दे … मेरे रूम में मुझे पहुंचा दे.
उसने मुझे गोद में उठाकर रूम में ले जाकर बेड पे पटक दिया और चला गया. मैं कम्बल ओढ़ कर सो गई. पर मुझे ये पता था कि मेरी दवाई का असर खत्म नहीं हुआ है और मेरी आग अभी बुझी नहीं है. मुझे नामित से लंड खाने की उम्मीद थी, पर वो तो जा चुका था.

अब आगे क्या होता है … ये आगे कहानी में पता चलेगी.

मुझे मेल करते रहिएगा.
आपको आपकी निशा का गर्मागर्म चुम्मा ऊऊम्मआह!

मेरी कामवासना बेटे के लंड से तृप्त हुई (Meri Kamvasna Bete Ke lund Se Tript Hui)

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हाय दोस्तो, मैं निशा फिर से आपके लिए सेक्स का नया सफर करने को तैयार हूं.

आप लोगों ने जैसा कि मेरी पिछली कहानी
तीन मर्द और मां की चुदाई
में पढ़ा था कि मेरे बेटे विराट ने तीन मर्दों को बुला कर मुझे उनसे चुदवाया था, उन तीनों ने कामोत्तेजक दवा खिला कर मेरे साथ रासलीला की थी. उनमें से तो मेरे बेटे का दोस्त ही था.

अब हम आगे बढ़ते हैं:

मैं अपनी आपबीती आपको बताती हूँ कि उन सबके जाने के बाद मेरे साथ क्या हुआ.

अब तक नामित, निक और डेविड ने मुझे लगातार धुंआधार चोद डाला था और मैं लस्त होकर निढाल अपने रूम में बेड पर एक घंटे तक बिना होश के पड़ी रही थी.

करीबन 4 बजे मुझे होश आया. मैं नींद से उठी, तो अपने आपको बेड पर पाया. मेरी चूत से खून टपक कर सूख गया था … क्योंकि दस इंच से भी बड़ा लंड वाले डेविड ने पहली बार अन्दर पेल कर मेरी चूत फाड़ दी थी. चूंकि मेरी गांड भी मारी गई थी, इसलिए मेरी गांड भी छिल कर खून से सनी हुई थी.

मैं डर गई और बाथरूम की तरफ भागी. मुझे चलने में काफी दिक्कत आ रही थी. किसी तरह लड़खड़ाते हुए मैं बाथरूम में गई. उधर अपनी चूत और गांड को अच्छे से धोकर साफ किया और नहा भी ली.
फिर रूम में वापस आकर अच्छे से पूरे बॉडी की मालिश की. जब मैंने बॉडी में लोशन लगाने के लिए अपनी चुत और चूचों में मालिश की, तो उस टाइम हाथ फिराते ही मुझे मानो करंट सा वापस दौड़ने लगा क्योंकि एक तो मैंने डबल डोज़ दवाई ली हुई थी और डेविड और नामित ने एक एक राउंड ही चुदाई का खेल किया था. डेविड का लंड डलवा कर तो मेरा जोश और भी बढ़ चुका था.

कामोत्तेजना वाली औषधि के चलते मैं फिर से चुदने को तैयार हो उठी थी.

मैंने नेहा की वो सफेद नेट वाली नाइटी फिर से पहनी और बाहर निकली. मैंने देखा कि घर में कोई नहीं दिख रहा था. न निशा … न नामित …

मैं सोचने लगी कि अब मैं क्या करूँ. मेरी चुत की आग तो लगातार बढ़ रही थी और मैं सेक्स के भूख में सब कुछ भूल रही थी. मुझे इस वक्त सिर्फ लंड दिख रहा था.

जब बाहर नामित नहीं मिला, तो मैं और भूखी हो गयी. मुझे लगा कि वो ऊपर विराट के साथ सोया होगा, तो मैं ऊपर की ओर बढ़ी.

मैंने विराट का रूम के दरवाजा खोला, तो देखा कि अन्दर नाईट लैंप की रोशनी में विराट ही अकेला था. वो भी निक्कर में था … ऊपर से पूरा नंगा था. उसकी चौड़ी छाती के बाल मुझे बड़े मस्त दिख रहे थे. उसके निक्कर से लंड का आकार भी साफ दिखाई दे रहा था.

इस वक्त तो मैं चुदासी थी और लंड की भूखी थी. अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था, किंतु बेटे की मर्यादा को देखते हुए मैं कुछ कर भी नहीं पा रही थी.

तभी मुझे नीचे कुछ आवाज़ सुनाई पड़ी … तो मैं नीचे आ गयी. मैं देखा तो नेहा थी … मेरे बेटे विराट के दोस्त नामित की मम्मी.
उसने मुझसे पूछा- क्या हुआ?
मैंने कहा- बस कुछ अच्छा नहीं लग रहा है.

नेहा तो एक मिनट में समझ गयी. उसने कहा- मेरे साथ आओ.
वो मुझे अपने रूम ले गयी और बोली- खुल कर साफ़ बताओ … क्या बात है?
मैंने नेहा को बताया कि पहले मैं 2 साल से नहीं चुदी थी और इधर मुझे न जाने क्यों किसी भी लंड से चुदने का मन हो रहा है.

उसे तो मेरी चुदाई के बारे में सब मालूम ही था. उसने मेरी चुदास समझ ली और कहा- चलो कल सुबह कुछ सोचेंगे.
मैं बोली- नहीं … अभी मेरी आग भड़क रही है. अभी कुछ इंतजाम करो न.
नेहा बोली- अभी कौन का लंड लाऊँ, अभी तो नामित भी नहीं है.

मैं नामित का नाम सुनकर चौंक गयी और डर गई. मैंने पूछी- नामित कैसे … वो तो तेरा बेटा है न?
नेहा बोली- कोई बात नहीं … बेटा से चुदवाना तो और ज्यादा मस्त रहता है. घर का लंड घर में … कोई डर नहीं और पूरा मजा भी आता है. जवान और नया नया लौड़ा होता है. कोई बदनामी का डर भी नहीं रहता.

उसके मुँह से बेटे से चुदने की बात सुनकर मैं विराट को लेकर सोचने लगी.

तभी नेहा ने फिर आगे बोला- विराट तो है ऊपर … उसी से चूत शांत कर ले न.

मैं अन्दर से तो विराट से चुदाई करवाने का मन बना रही थी, पर थोड़ा झिझक रही थी. लेकिन नेहा ने मुझे विराट से चुदने की कह कर मुझे रास्ता दिखा दिया था.

तभी उतने में नेहा एक वाइब्रेटर ले आयी और मेरी ड्रेस के ऊपर से चालू करके मेरे बॉडी पर चलाने लगी. मैं पहले ही लौड़े के लिए तड़प रही थी और अब तो मैं अपने मुँह से सिसकारियां भरने लगी.

मेरे मुँह से ‘उम्म्ह … अहह … हय … ओह …’ की आवाज़ निकलना शुरू हो गयी थी.

मैंने नेहा के मम्मों को अपने हाथों में ले लिए और मसलने लगी. नेहा के होंठ अपने होंठों से चिपका लिए.

पर नेहा बहुत ही अच्छी खिलाड़ी थी. उसने अब भी मेरे शरीर में वाइब्रेटर फेरना चालू रखा. मैं उत्तेजना में मस्त हुई जा रही थी. इसी के चलते मैं एक हाथ से निशा के मम्मों को मसल रही थी और एक हाथ को अपनी चुत में डालने की कोशिश करने में लगी थी.

तभी निशा ने मेरी ड्रेस उतार दी. मैं नंगी होकर वाइब्रेटर के वजह से बिना पानी की मछली की तरह लंड के लिए तड़प रही थी. तभी नेहा ने वाइब्रेटर और खुद को मुझसे दूर कर लिया. मैं बेड पर अकेली रह गई थी. नेहा की इस हरकत से मैं तिलमिला रही थी कि तभी मैंने दरवाजे की ओर देखा, तो वहां विराट सिर्फ निक्कर में खड़ा था और मुझे उसका खड़ा लंड दिखाई दे रहा था.

मैं सेक्स के लिए इतनी भूखी थी कि मैंने उसे देखते ही अपनी दोनों टांगें फैला दीं. अपनी चुत उसके मुँह की तरफ उठाते हुए दिखा दी.

वो मेरी चूत को देख ही रहा था कि तभी निशा ने उसे इशारा कर दिया.
वह अन्दर आया, तो नेहा ने बोला- जा बेटा … अपनी मॉम को खुश कर दे.

यह कहते हुए नेहा ने उसका निक्कर नीचे खींच दिया. विराट का लंड मेरे सामने फुंफकार मारने लगा. उसके लहराते लंड को देख कर मुझसे रहा नहीं जा रहा था.

मैं उसे चिल्लाई- आह बेटा आ जा … डाल दे मेरी चूत में जल्दी से.
नेहा ने बोला- साली कुतिया ऐसे कैसे डाल देगा … पहले इसके लंड को चूस तो … और सुन तुझे ये अपना बेटा दिख रहा हो, तो भूल जा कि ये तेरा बेटा है. ये सिर्फ एक लंडधारी है और तू लंड की प्यासी है. बस जल्दी से जा और चूस ले इसका लंड और अपनी चूत की खुजली मिटवा ले.

ये सब बात अभी हो ही रही थी कि विराट मेरे करीब आ गया. मैं बिस्तर से उठी और उसके गले से झूल गई.

विराट ने मुझे वापस बिस्तर पर धकेला और 69 के पोज़ आकर मेरे मुँह में अपना लंड और मेरी चुत अपने मुँह में ले ली और चाटने लगा.

एक मर्द की जीभ को अपनी चूत पर पाते ही मेरी सीत्कारें निकलने लगीं- आहाह … अअहह … ऊऊम्म …
विराट की चूत चटाई में मुझे बहुत आनन्द आने लगा. मैं भी अपने मर्द बेटे के लंड को बहुत बेरहमी से चूस रही थी.

कोई पांच मिनट की लंड चूत की चटाई के बाद मैंने उससे कहा- बेटा अपना लंड मेरी चूत में डाल दे.

ये सुनते ही उसने मेरी दोनों टांगें अपने कंधों पर लीं और एक करारा धक्का मार कर अपना लंड मेरे अन्दर घुसेड़ दिया.

मैं विराट के मर्द लंड को अन्दर पाते ही चीख उठी- ऊऊऊईई मॉम मर गई … अअअहह क्या मजेदार लंड है तेरा … ऊऊफ़्फ़ रोज चोदना मुझे …
उसके बाद मैं भी उसका साथ देने लगी और अपनी गांड उछाल उछाल कर अपने बेटे से चुदने लगी.

विराट भी मुझे स्पीड में धक्के मारने लगा. विराट मुझे चोदते समय मेरी चूचियों को मसले जा रहा था. मेरे गालों पर अपने गाल रगड़ते हुए मुझे हर तरफ चूम चाट रहा था. उसके हाथ कभी मेरी गांड पर आ जाते और कभी मेरे मम्मों को मसलने लगते. कभी वो मेरी चूचियों के निप्पलों को चूसते हुए मुझे तेज तेज धक्कों से चोदने लगता.

मैं मस्त हो कर ‘ऊऊऊह आआह ओह …’ कर रही थी और वो मुझे एक रंडी समझ कर चोदते हुए गाली दे रहा था- साली कुतिया रंडी … तेरी चुत अब मेरी है … भैन की लौड़ी रांड … साली तुझे अब मैं रोज चोदूंगा मादरचोदी … ले लौड़ा खा … आआह … क्या मजा है तेरी चुत में!

वो अंधाधुंध मुझे चोदने लगा.

कोई 15 मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए और बिस्तर पर निढाल होकर लेट गए.
निशा भी लेट गयी.

आगे की कहानी मेरे बेटे विराट की जुबानी:

करीब 15 मिनट की चुदाई के बाद मैं और मेरी मम्मी दोनों एक साथ झड़े और थक कर बिस्तर पर लेट गए.
मेरी मम्मी निशा भी लेट गयी.

अभी सुबह के दस बज रहे थे. मैंने मॉम से कहा- मुझे आगे के काम के लिए दो दिन बाद विदेश जाना पड़ेगा, तो मैं आज आपको पापा के पास घर में छोड़ देता हूं … फिर वहीं से निकल जाऊँगा.

मॉम बोलीं- नहीं अब मैं उस आदमी के साथ नहीं रह सकती और अब मैं बिना चुदे भी नहीं रह सकती. तू मुझे अपने साथ ले चल … या फिर यहीं छोड़ दे.

यह सुनकर नेहा बोली- विराट, मेरी विदेश जाने की बहुत दिनों से इच्छा है, तुम कहां जा रहे हो?
मैंने बोला- कनाडा.
नेहा बोली- हाँ मुझे जाना है. वहां मेरी एक पंजाबी फ्रेंड शीला रहती है. वो उधर अपने बेटे के साथ ही रहती है. वो भी खुल कर सेक्स का मजा लेती है.

नेहा के मुँह से उसकी सहेली की चुत की बात सुनकर मैं खुश हो गया. मॉम भी खुश थीं. उन्हें पता था कि अब वो पंजाबी जवान लड़के से चुदने वाली है.
मैं तो इसलिए खुश था कि मैं कनाडा में तीन चुदक्कड़ों को एक साथ चोदूंगा.
मैंने उन दोनों को हां बोल दिया.

मैंने उन दोनों के जाने के कागज आदि रेडी करवाए. फिर तय रात को मैं, नेहा और मॉम निकल गए. दूसरे दिन हम सभी कनाडा पहुंच गए. वहां एयरपोर्ट में हमें लेने कार आई हुई थी. ड्राइवर ने हमें पिक किया. वो ड्राइवर भी विदेशी था. एक मस्त गोरा 6 फिट का जवान आदमी था. उसकी उम्र लगभग 40 साल की रही होगी. वो हमें कार में बैठा कर घर ले आया.

शीला का घर बहुत ही अच्छा घर था. वहां नेहा की फ्रेंड शीला ने दरवाजा खोला. मैंने उसे देखा कि उसकी बॉडी बड़ी मस्त थी. वो नाटे कद की लगभग 5 फिट की औरत थी. उसका शरीर गदराया हुआ था. थोड़ी मोटी जरूर थी मगर मस्त फिगर 42-36-48 का था. एकदम गजब की पंजाबन थी. उसकी उम्र 42 साल की थी.

फिर शीला ने हमें हॉल में बैठाया. मैंने उससे पूछा- आंटी आपकी फैमिली के बाकी और सब कहां हैं?

तो शीला ने बताया कि उसके हस्बैंड दुबई में जॉब करते हैं और घर में वो उसका बेटा और उसके गांव का एक नौकर रहता है और ये ड्राइवर.

मुझे खेल समझ आने लगा.

फिर उसने बोला- तुम सब फ्रेश हो जाओ.

उसके बाद मॉम और नेहा एक रूम में और मैं एक रूम में घुस गया. मैं नहाने गया और फ्रेश होकर आया, तो बाहर शीला आंटी थीं. मैं सिर्फ टॉवल में था और उन्हें देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया.

उन्होंने मेरे लंड की हरकत को नोटिस कर लिया. फिर मैंने अपने लंड को हाथ में पकड़ लिया.

आंटी हंस कर बोलीं- कोई बात नहीं … मुझे नेहा ने फ़ोन पर सब बता दिया था. अब तो इसे मुझे अन्दर लेना ही है. अभी एक बार दिखा दो.

शीला की बात सुनते ही मैंने टॉवल उतार दिया. उन्होंने मेरे लंड को हाथ में पकड़ लिया और हिलाने लगीं.

मैं भी उनके मम्मों को मसल रहा था. वो एकदम से गरम हो गयी थीं. उन्होंने मेरे सीने को चाटना शुरू कर दिया और एक हाथ से अपने चुत को कुरेदने लगीं.

मैंने उन्हें वह बेड पर पटक दिया और उनके कपड़े उतार दिए. अब मैं उनके पैरों को चाटने लगा और चाट कर मैं चुत तक पहुंच गया. मैं अपनी जीभ से लगातार चुत चाट रहा था.

शीला की कामुक आवाजें ‘अअअ हहह ऊऊम्म्म ऊउफ़्फ़..’ कमरे में गूंजने लगी थीं.

कुछ देर बाद मैं अपने हाथ से शीला के मम्मों को मसल रहा था. उनकी आवाज़ भी तेज हो गयी थी और वो भी तेज स्वर में चिल्लाने लगी थीं- अअह … उहहह और जोर से … हां लगे रहो.
अब मैंने 69 में होकर अपना लंड शीला के मुंह पर लगा दिया तो उसने झट से मेरा लंड मुंह में लिया और चूसने लगी.

थोड़ी देर बाद वो चरम सीमा पर आ चुकी थीं और मेरी झमाझम चुत चटाई के बाद झड़ गईं. मैं भी उनके मुंह में ही झड़ गया.

फिर मैं वहां से रेडी होकर काम के लिए निकल पड़ा.

अब मेरे यानि विरत की मॉम निशा के शब्दों में:

मैं कमरे के बाहर खड़ी थी. विराट और शीला की चूत लंड की चुसाई और चटाई को देख रही थी. इसके आगे क्या हुआ, वो अगली चुदाई की कहानी में मैं आप सभी को लिख कर बताऊंगी.

आप अपने मेल मुझे करते रहिएगा, मैं सभी के मेल पढ़ती हूँ … तो बहुत अच्छा लगता है.

आपकी निशा और विराट.

चूत लालच ने करवाया चूतियापा (Choot Lalach Ne Karwaya Chutiyapa)

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दोस्तो, मेरा नाम नीरज कुमार है और मैं 48 साल का एक तलाक़शुदा मर्द हूँ। अभी 4 महीने पहले ही मेरा तलाक हुआ है। अभी मैं बिलकुल कुँवारा और अकेला हूँ, तो अगर कोई ज़रूरतमन्द महिला या लड़की हो, तो मुझसे कांटैक्ट कर सकती है.
हा हा हाहा, खैर ये तो मज़ाक की बात थी।

दरअसल मैं आपको अपने तलाक की कहानी सुनाना चाहता हूँ। अब आप कहोगे, यार तलाक की कहनी में क्या नई बात है, बहुत दुनिया के होते हैं। मगर मेरी कहानी सुन कर आप कहोगे,
यार तेरे जैसी किस्मत हमारी क्यों नहीं हुई, तो सुनिए।
बात तक की है, जब मैं सिर्फ 42 साल का था और तब तक मेरी शादी नहीं हुई थी। दरअसल एक बड़े सरकारी ओहदे पर था, और इसी वजह से मेरे अपने दफ्तर की और मेरे अधीन दूसरे दफ्तर की बहुत सी लेडीज़ से मेरे संबंध थे।

सीधी बात यह है कि मैं एजुकेशन बोर्ड में काम करता हूँ और टीचर लोग के तबादले मैं ही करता हूँ। तो अपने तबादले रुकवाने के बदले बहुत सी मैडम बहुत बार मेरे को खुद ही ऑफर कर देती थी.
अब दो चार से बात बनी तो फिर तो मैंने उनके जरिये और भी बहुत सी मैडमों को बजाया। घर में एक बाई थी, जो साफ सफाई और खाना बनाती थी. वो तो पहले से ही मेरे साथ सेट थी. तो भोंसड़ी की कोई कमी नहीं थी. तनख्वाह भी अच्छी थी। बाई को उसकी पगार से डबल पैसे देता था, तो वो भी छोड़ के जाने का नाम नहीं लेती थी।

जो कोई मैडम मेरी सेटिंग होती, उसे भी मैं अपने घर ही लाता था और बाई को भी पता था कि मैं अपनी जवानी का जम कर मज़ा लूट रहा हूँ।
कई बार तो बाई के सामने ही किसी नई मैडम को घर पे लाता और सरेआम उसकी भोंसड़ी मारता, बाई ने बहुत बार मुझे और औरतों की फुद्दी मारते देखा था। तो बाई, अरे यार उसका नाम है
सुषमा। तो सुषमा के सामने मैंने खूब चोदापट्टी की है।

अब ऐसे में ही हुआ यूं कि हमारे ही शहर की एक लड़की की मैंने बदली करी। मैं तो उसे नहीं जानता था मगर वो लड़की सोनिया मेरी एक जानकार मैडम के माध्यम से मुझसे मिलने आई।
करीब 35-36 साल की वो लड़की, गोरा रंग, कद काठी साधारण … मगर देखने में वो मुझे बड़ी भोली सी लगी।

अब शहर से बाहर गाँव में तबादला हो गया तो आना जान मुश्किल हो गया उसको। उसने अपनी सहेली से बात की, वो उसकी सहेली थी तो मेरी भी सहेली थी।
उसने सोनिया से सेटिंग करी और वो दोनों एक शाम मेरे घर आई। अब गीता साथ आई थी, तो मुझे लगा कि सोनिया घर से ही मूड बना कर आई होगी।

मगर जब मैंने गीता से पूछा तो गीता ने बताया- सोनिया के घर के हालात बहुत खराब हैं, इसका एक भाई है जो नशेड़ी है, एक विधवा माँ है, और घर की सारी ज़िम्मेवारी इस लड़की पर है। इसी लिए इसने अभी तक शादी नहीं की।
मैंने पूछा- तो क्या अब तक कुँवारी है?
गीता बोली- शायद हो भी सकती है।

मैंने गीता से कहा- यार गीता, तुम्हें तो पता है कि मैं तो खुल कर खेलता हूँ, तुमने मुझे झेला है, क्या ये भी मुझे झेल पाएगी?
गीता बोली- मैं इस से डीटेल में बात कर लूँगी और पूछ कर आपको बता दूँगी. मगर इसको इतना मैंने ज़रूर बता दिया था कि अगर अपनी बदली रुकवानी है तो अपनी सलवार का नाड़ा ढीला करना पड़ेगा। और उसके लिए इसने थोड़े से असमंजस के बाद हामी भर दी थी।

मतलब सोनिया चुदने के लिए तो तैयार थी, मगर अभी तक उसे ये नहीं पता था कि उसका पाला किस बैल से पड़ने वाला है, जो अपने नीचे पड़ी लड़की को आटे तरह गूँथ कर रख देता है, रुला देता है, तड़पा देता है।

खैर मैंने गीता को सोनिया से सारी बात समझा कर, सब कुछ उसे खोल कर बता कर फिर उसकी राय पता करके मुझे बताने को कहा, और भेज दिया। और ये भी आश्वासन दे दिया कि उसकी बदली मैं करवा दूँगा, जहां वो कहेगी, वहाँ।

दो एक दिन बाद मैं बाज़ार में घूम रहा था कि अचानक से सोनिया मेरे सामने आई.
नमस्ते के बाद मैंने उसे पूछा- अरे तुम यहाँ बाज़ार में कुछ लेने आई हो?
वो बोली- नहीं सर, हमार घर यही है, पास में!
और वो मुझे अपने घर ले गई।

घर तो अच्छा था। घर में मैं सोनिया की माँ और भाई से भी मिला। उसकी माँ करीब 52-55 साल की होगी। देखने में गोरी चिट्टी, सुंदर थी, बाल डाई करती थी, तो जवान ही लगती थी। भाई को पता ही नहीं था कि उनके घर कौन आया है।
मुझे देख कर वो बाहर चला गया।

सोनिया ने मुझे चाय पिलाई, और अपनी ज़िंदगी की सारी कहानी सुनाई। उसकी दुख भरी कहानी सुन कर मेरा मन पसीज गया, मगर हरामी मन में बार बार यही ख्याल आ रहा था कि साली माँ और बेटी दोनों जबरदस्त हैं, अगर मैं इनमे से पटाऊँ तो किसको पटाऊँ।

माँ बेटी दोनों की आँखों में पानी था, मगर मेरा लंड पानी छोड़ने लगा।

उसके बाद ऐसे कई मौके आए, जब मुझे सोनिया के घर जाने का मौका मिला, धीरे धीरे हम दोनों एक दूसरे के करीब आते गए. मैंने ही पहले सोनिया के भाई को एक नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती करवाया. और जब वो ठीक हो गया तो उसके सिंगापुर जाने का इंतजाम करव्या।

अब घर में सिर्फ माँ बेटी बची थी तो मैंने खुल्लम खुल्ला, सोनिया को पटाने का हर जुगाड़ लगाया और मैं कामयाब रहा।

एक दिन होटल में कॉफी पीते हुये मैंने सोनिया को प्रोपोज किया और वो मान गई। बहुत ही जल्द हम दोनों शादी के बंधन में बन्ध गए।

शादी के बाद सोनिया मेरे घर मेरे बीवी बन कर आई, तो साथ में दहेज में मेरी सासु माँ भी आई। खैर सासु माँ से मुझे कोई ऐतराज नहीं था क्योंकि सारा दिन वो अपने कमरे में बैठी भजन बंदगी करती रहती थी। सिर्फ रात के खाने पर ही हमारे साथ होती थी।

मेरा घर दो मंज़िला है तो ऊपर वाली मंज़िल पर एक कमरा सासु माँ का था और नीचे सारा घर हम दोनों मियां बीवी के पास।
तो शादी के बाद तो मैंने अपनी बीवी के साथ खूब मस्ती की। रात को जब सासु माँ अपने कमरे में जा कर सो जाती तो हम मियां बीवी सारे घर में नंगे घूम घूम कर हर जगह सेक्स करते।

अब क्योंकि शादी से पहले तो मैं सिर्फ रंडियाँ ही चोदी थी, तो जब तक औरत चुदवाते हुये हाये तौबा न मचाए, मुझे तो मज़ा ही नहीं आता था। तो मैंने अपनी बीवी को भी खूब जोरदार तरीके से किसी रंडी की तरह ही चोदा, और धीरे धीरे उसे भी चुदवाते हुये शोर मचाना और हाय तौबा करने की आदत सी पड़ गई।

नई नई शादी के जोश में हम दोनों ये भूल गए के घर में एक और औरत भी है, जिसकी जवानी ने अभी उसका दामन नहीं छोड़ा है।
और यह बात मुझे एक दिन पता चली, कैसे वो सुनिए।

मैं अपने दफ्तर के काम से कई बार बाहर दौरे पर जाता था। और मेरी बीवी की नौ से पाँच की नौकरी थी। एक दिन किसी दौरे पर जाना था, मगर ऐन वक्त पर वो टूर कैंसल हो गया, तो मैंने घर वापिस आना ही उचित समझा।

जब घर आया, तो देखा सासु माँ घर के पिछवाड़े बैठी कपड़े धो रही थी। मगर बात सिर्फ इतनी नहीं थी। उन्होंने जो नाईटी पहनी हुई थी, वो पूरी भीग चुकी थी, और उसका बड़ा सारा गला सारा आगे सरका हुआ था, जिस वजह से उनके पेट तक का नज़ारा दिख रहा था।

दो लटके हुये मगर फिर भी बड़े और गोरे मम्मे देख कर मेरा भी मन मचल उठा। मगर सिर्फ मम्मे ही नहीं नीचे जो उन्होंने अपनी नाईटी अपने घुटनों तक उठा रखी थी, उस वजह से उनकी गोरी, मोटी मांसल जांघें भी नंगी दिख रही थी।

पहले तो मैं ये नज़ारा छुप कर खिड़की से देख रहा था, मगर फिर सोचा के क्यों न सासु माँ को थोड़ा सा अचंभित करूँ, देखूँ मुझे एकदम से अपने सामने देख कर वो कैसे रिएक्क्ट करती हैं।

तो मैं बड़े आराम से दरवाजा खोल कर उनके पास गया- अरे, आप यहाँ कपड़े धो रही हो, क्यों? छुट्टी वाले दिन सोनिया धो लेती न!
मुझे देख कर सासु माँ थोड़ी चौंकी तो ज़रूर मगर जितना मैंने सोचा था, उतना नहीं। न ही उन्होंने अपने कपड़े ठीक करने की कोई खास कोशिश करी।

उस वक्त मेरे दिमाग में घंटी बजी कि एक सास अपने दामाद से अपना नंगापन छुपाने में इतनी सुस्त क्यों है। क्या उसको इस से कोई फर्क नहीं पड़ता के उसका दामाद उसके आधे से ज़्यादा जिस्म को नंगा देख रहा है।
या वो सिर्फ इस लिए लापरवाह हैं कि वो मुझे अपने बेटे की तरह मानती है, मगर बेटे से भी माँ अपना नंगापन तो छुपाती ही है। या फिर वो जान बूझ कर मुझे ये सबा दिखाना चाहती है।
इस तीसरे ख्याल ने मुझे अंदर से झँझोड़ा।

मुझे लगा कि ये जो रात को मैं अपनी बीवी को रंडी की तरह पेलता हूँ, और वो जो शोर मचाती है, वो सब भी तो सासु माँ को सुनता ही होगा। तो क्या सासु माँ की जवानी भी मचलती है, वो रात को करवटें बदलती हैं, चुदवाने को तड़पती है, उसके जिस्म में भी काम वासना की आग जलती है।

उस वक्त मुझे मेरी सासु माँ अपनी बीवी से भी ज़्यादा सेक्सी लग रही थी।

मगर सासु माँ वहाँ से उठी और उठ कर रसोई में चली गई और मेरे लिए खाना बनाने लगी।

बेशक उन्होंने मुझे उनके अधनंगे बदन को घूरते हुये देख लिया था मगर उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाई, बिलकुल सामान्य रही। मगर मेरी पैन्ट में मेरा लौड़ा तड़प उठा।

बेशक मैंने सासु माँ को पहले भी कई बार प्यासी नज़रों से देखा था और उनके जिस्म को अपनी वासना भरी नज़रों से नाप चुका था। मगर आज तो जैसे सासु माँ भी चाह रही थी कि कोई बात नहीं दामाद जी, जितना जी चाहो जी भर के देखो मेरे बदन को।

जब सासु माँ खाने की थाली ले लेकर आई, तब उन्होंने अपनी नाईटी का गला ठीक कर लिया था. मगर फिर भी उनकी नाईटी का गला बड़ा था और जब झुक कर उन्होंने मेरे सामने खाने की थाली रखी तो उनके दोनों मम्मे, निप्पल, पेट और जांघें सब दिख गई मुझे।

मुझे मेरे कमीने दिमाग ने बता दिया कि बुढ़िया आंच पर है, और तभी इतना अंग प्रदर्शन कर रही है।
मैं सोचने लगा कि क्या करूँ, पहले खाना खाऊँ, या सासु माँ को पकड़ लूँ।

मेरे तो मुंह का स्वाद ही बिगड़ गया। मैंने एक दो कौर रोटी के चबाये मगर मुझे तो रोटी में कुछ मज़ा ही नहीं रहा था। मेरे दिमाग पर काम चढ़ रहा था। मेरा दिल कर रहा था कि जा कर सासु माँ की नाईटी फाड़ दूँ, और बुढ़िया को नंगी करके चोद डालूँ।
मैं बड़ी कशमकश में था।

तभी सामने से सासु माँ आ गई, हाथ में पानी का गिलास पकड़े, आकर गिलास मेरे सामने रखा.

मैंने हकलाते हुये कहा- माँ….जी, आज मन रोटी खाने का नहीं कर रहा है।
वो बोली- तो और क्या खाओगे?
मैंने कहा- तु…तुम्हें!

कह तो दिया मैंने … पर मेरी गांड फटी पड़ी थी। सासु माँ ने मेरी और देखा और उठ कर चल दी।
मैं और बेचैन हो गया।

फिर मैंने रोटी का निवाला थाली में रखा और उठ कर सासु माँ के पीछे गया, एकदम से उनको पीछे से अपनी आगोश में ले लिया।
सासु माँ चौंकी- अरे दामाद जी, ये क्या करते हो, छोड़ दो मुझे।

मगर मेरे सर पर काम सवार था, मैंने उनके दोनों मम्मे पकड़ कर मसल दिये और बोला- नहीं… पूनम… आज मत रोक मुझे आज तो मुझे मेरे मन की कर लेने दे.
और मैंने सासु माँ की नाईटी गले से पकड़ी और फाड़ने लगा।

नाईटी का पतला कपड़ा मेरे ज़रा से ज़ोर लगाने से ही फट गया. फिर तो मैंने उनकी पूरी नाईटी फाड़ कर उनके बदन से अलग कर दी। और मेरी प्यारी सासु माँ मेरे सामने फर्श पर नंगी पड़ी थी। मैंने अपनी पैन्ट खोली, कमीज़ उतारी, और पूरा नंगा हो कर सासु माँ के ऊपर लेट गया।

Sas Damad Chudai
Sas Damad Chudai
वो थोड़ा टेढ़ी होकर लेटी थी, तो मैंने अपना लंड उनकी गांड पर घिसाना शुरू कर दिया और उनके मम्मे पकड़ कर उनके चेहरे को चूमने चाटने लगा।

“ओह … मेरी जान … मेरी प्यारी पूनम, कब से तरस रहा था, तुम्हारे हुस्न का रस पीने को, आज मेरी मन्नत पूरी हो गई. ओह … मेरी … जान, मेरी सेक्सी सासु माँ … क्या मस्त बदन है तेरा, भरी हुई गोल गांड, मोटे मोटे मम्मे, सेक्स की देवी हो तुम तो!” कहते कहते मैंने उसके सारे बदन पर अपने हाथ फिरा दिये।

वो नीचे लेटी मुझे मना करती रही- नहीं दामाद जी, आप मेरे बेटे जैसे हो, आप ये पाप मत करो, आप मुझे मम्मी जी कह कर मेरे पाँव छूते हो, मेरी इकलौती बेटी के पति हो. आप को ऐसा नहीं करना चाहिए।
मैंने कहा- मुझे पता है कि मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए. मगर पूनम, जो ये तेरा हुस्न है, अगर इसको नहीं चखा तो मेरी ज़िंदगी का क्या फायदा, अब मुझे रोक मत, जो होता है हो जाने दे।

और मैंने अपनी सास को सीधा करके लेटाया … और और … उसकी टाँगें खोली।
बुढ़िया … लगता है अक्सर अपनी फुद्दी के बाल साफ करती रहती होगी, इसी लिए उसके झांट बहुत कम थे।

मैंने जितनी जल्दी हो सका अपना तना हुआ लंड उसकी फुद्दी पे रखा और फिर अंदर पेल दिया। बुढ़िया की फुद्दी भी गीली हो चुकी थी तो मेरा लौड़ा बड़े आराम से अंदर को फिसल गया। दूसरे ही धक्के में मेरा पूरा लंड मेरी सास की फुद्दी में था।

मैंने अपनी सास के दोनों हाथ पकड़े और खींच कर पीछे ले गया और फिर उसके होंठ, गाल, ठुड्डी, कंधे, मम्मे सब ज़ोर ज़ोर से चूसे, मम्मे अपने दाँतों से काट खाये, उसके निप्पल चबा डाले। बुढ़िया बहुत तड़पी और मेरे इन कुकृत्यों से उसकी काम वासना भी भड़क उठी।

जो औरत अभी मुझे रोक रही थी, वो बड़े आराम से अपनी दोनों टाँगें फैला कर लेटी थी और चुम्बनों में मेरा बराबर साथ दे रही थी।
अब उसकी बातें ही बदल चुकी थी ‘रहने दो दामाद जी, छोड़ दो दामाद जी’ की जगह ‘पेलो दामाद जी, और ज़ोर से पेलो’ बोलने लगी थी।

उसकी ढलती हुई जवानी की उफान पर आई कामवासना मेरे जोश को भी बढ़ा रही थी।

मैं उठा और अपनी सास को हाथ पकड़ कर अपने बेडरूम में ले गया और उसे बेड पे गिरा दिया।

“पूनम, इसी बिस्तर पर तेरी बेटी रोज़ मुझसे चुदवाती है, आज तू भी इसी बिस्तर पर अपनी आबरू मुझे देगी.”

मैं उसके ऊपर धड़ाक से गिरा और उसने झट से अपनी टाँगें खोल कर मुझे अपनी आगोश में कस लिया।
“अब कोई बेटी नहीं, कोई माँ नहीं, कोई दामाद या सास नहीं … अभी सिर्फ हम हैं. सिर्फ हम दो प्यार करने वाले … और कुछ नहीं बस।

मेरी सास ने मेरा लंड पकड़ा और अपनी फुद्दी पर रख लिया।

मैंने फिर से लंड पेला. और इस बार सासु माँ को धन्य कर दिया। क्योंकि मेरा तो स्टाइल ही पावर प्ले का था तो मैंने तो उसे भी किसी रंडी की तरह बेदर्दी से ही पेला।

आधे घंटे की लंबी चुदाई के बाद जब मैं अपनी सास की सवारी से उतरा, तो उसकी फुद्दी से मेरा गाढ़ा सफ़ेद वीर्य चू कर बाहर आ रहा था। उसके मम्मों पर और बदन के बहुत से हिस्सों पर मेरे होंठों के चूसने और दाँतों के काटने से निशान बने थे। मम्मे और चूतड़ मेरी मर्दाना हाथों की मार खा खा कर लाल हुये पड़े थे।
एक लुटी हुई औरत जैसी उसकी हालत हो गयी थी जिसको उसके दामाद ने ही लूट लिया था।

मैं उठ कर बाथरूम गया, नहा कर वापिस आया, तब सासु माँ मेरा बिस्तर फिर से सेट करके जा चुकी थी।

मैंने झटपट से अपनी गाड़ी उठाई और वापिस दफ्तर चला गया.

दफ्तर जाकर मैंने काफी सोचा कि जो आज मैंने किया, क्या वो सही किया या गलत किया।
मगर पराई औरत को चोदने का लुत्फ ही कुछ और है, और मैं भी इस लुत्फ में डूब गया।

मैं अक्सर खाना खाने घर आने लगा।
खाना बाद में खाता मैं … पहले सासु माँ को जम कर चोदता। वो भी मेरा इंतज़ार करती, मेरे कहने पर ही वो मुझे बिलकुल नग्न हो कर खाना खिलाती, खाना खाते वक्त मेरा मनोरंजन करती, मुझे नंगी हो कर नाच नाच कर दिखाती, मैं रोटी खाता तो वो टेबल के नीचे मेरा लंड चूसती।

कुछ ही दिनों में मैंने अपनी सासु माँ की गांड का उद्घाटन भी अपने लंड से कर दिया।

कभी दिल दिल करता कि काश कोई मौका हो जब मैं रात को भी अपनी सासु माँ के साथ मस्ती कर सकूँ। मगर अब जब सारा ससुराल ही मेरे साथ था, तो बीवी का मायके जाने का तो कोई सवाल ही पैदा नहीं होता था।

5-6 महीने तक हम दोनों की ये काम क्रीडा बहुत बढ़िया चली। सासु माँ ने अपने तन मन से मुझे अपना पति मान लिया था। जब घर में हम अकेले होते तो वो मुझसे बिल्कुल ऐसे ही बात करती जैसे वो मेरी पत्नी हो. सिर्फ मेरी बीवी के सामने मेरे से कम ही बात करती थी।

मगर अक्सर खुशी के बाद गम भी आता है।

एक रोज़ जब मैं खाना खाने घर आया, तो सासु माँ ने बड़े प्यार से मुझे खाना परोसा। अब जब सेक्स का प्रोग्राम था तो हम दोनों ने अपने अपने कपड़े पहले ही निकाल दिये थे। दोनों बिल्कुल नंगे एक साथ टेबल पर बैठ कर खाना खा रहे थे कि तभी सामने से मेरी बीवी अंदर आ गई।

हमें तो ये था कि वो 5 बजे के बाद आएगी।
मगर ये कैसे हुआ, वो कैसे वापिस आ गई?

उसने जो हमारी हालत देखी तो उसके तो गुस्से का ज्वालामुखी फट पड़ा। हम दोनों को उसने खूब गाली, दी, खूब खरी खोटी सुनाई। बल्कि गुस्से में उसने तो ख़ुदकुशी करने की भी कोशिश की, मगर मैंने उसे बहुत समझाया। बेशक बीवी का गुस्सा तो ठंडा हो गया, मगर उसने मुझसे तलाक की मांग की।

मैंने भी सोचा कि अब ये रिश्ता और नहीं निभ सकता तो मैंने भी हामी भर दी। तलाक हो गया, दोनों माँ बेटी मेरा घर छोड़ कर अपने पुराने घर में चली गई।
मैं फिर से अकेला हो गया।

मगर एक दिन मुझे बाज़ार में मेरी सासु माँ मिल गई। मैंने उनसे बात की। पहले तो वो बात नहीं करना चाहती थी, मगर मैंने उनको राज़ी कर ही लिया।

हम दोनों एक कॉफी शॉप में बैठे और मैंने उनसे काफी देर बात करी, उनको बहुत समझाया। उसके बाद हम दोनों फिर से मिलने लगे। फिर एक दिन मैं सासु माँ को अपने घर ले कर आया, और उस दिन मैंने फिर से उसे चोदा।

वो भी शायद यही चाहती थी, महीनों की प्यासी उसकी फुद्दी ने खूब पानी छोड़ा।

चोदा चुदाई के बाद जब वो जाने लगी तो बोली- नीरज, अब मैं तुम बिन नहीं रह पाती, दिन रात तुम्हारी याद आती है। तुम्हारी और सोनिया का तो तलाक हो चुका है. क्या ये हो सकता है कि तुम मुझसे शादी कर लो और हम दोनों फिर से एक हो जाएँ।
मैंने पूछा- और सोनिया का क्या करोगी?

जब मैं सोनिया का पति था, तो मेरे लालच ने मुझ से एक चूतियापा करवाया कि मैंने अपनी सास को ही चोद डाला। कल को जब तुम मेरी पत्नी बन कर आओगी और मेरी ही पूर्व पत्नी मेरी बेटी बन जाएगी, तब अगर मेरा मन उस पर मैला हो गया तो क्या करोगी? सोनिया मेरी पत्नी रही है, मैं उसे भी बहुत भोगा है, हर तरह से उसको चोदा है, फिर से उसको चोदने का दिल करे, या कहीं हमारी फिर से सेटिंग हो गई, तो फिर तुम क्या करोगी? सोनिया अपनी ही माँ को अपनी सौत बनते देख नहीं पाई। क्या तुम बर्दाश्त करोगी, गर तुम्हारी ही बेटी तुम्हारी सौत बन गई तो?
सासु माँ ने कुछ सोचा- क्योंकि वो पहले तुम्हारी पत्नी थी, और तुमने उसका जिस्म भोगा है, तो अगर तुम दोनों में फिर से रिश्ते कायम हो जाते हैं, तो मुझे कोई ऐतराज नहीं होगा।

उसके कुछ देर बाद सासु माँ चली गई। मैं सोचने लगा कि कैसा लगेगा मेरे साथ एक ही बिस्तर माँ और बेटी दोनों। जब दिल किया माँ चोद दी, जब दिल किया बेटी चोद दी। या फिर दोनों माँ बेटी
एक साथ। आप क्या कहते हो, क्या मुझे और एक चूतियापा करना चाहिए या नहीं।

चचेरी बहन की कुंवारी चूत खोली (Chacheri Behan Ki Kunwari Chut Kholi)

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अन्तर्वासना के पाठकों को मेरा नमस्कार! मेरा नाम राज (बदला हुआ) है. मेरी आयु 23 वर्ष है. मैं अपने परिवार के साथ जोधपुर, राजस्थान में रहता हूं. मैं पहली बार कोई सेक्स कहानी लिख रहा हूं. हो सकता है कि कहानी को लिखते समय मुझसे कुछ गलतियां हो जायें तो कृपया सबसे निवेदन है कि गलतियों पर ध्यान न दें.

जो कहानी मैं आप लोगों को बताने जा रहा हूं वह मेरे साथ हुई एक वास्तविक घटना है. कहानी को शुरू करने से पहले मैं आप लोगों को अपने बारे में बताना चाहता हूं.

मैं देखने में ज्यादा स्मार्ट तो नहीं हूं, फिर भी ठीक ही दिखता हूं. भगवान ने मेरे अंदर किसी चीज की कमी नहीं रखी है. मेरे लंड की लम्बाई 6 इंच है जो किसी भी लड़की या भाभी को संतुष्ट करने के लिए काफी है.

सेक्स के बारे में मेरा अनुभव काफी अलग रहा है. सेक्स करने के लिए जोश से ज्यादा महत्व मैं सेक्स करने के तरीके को देता हूं. अगर सेक्स करने का तरीका सही है तो फिर औरत को संतुष्ट करना कोई मुश्किल काम नहीं है.

मैं मार्केटिंग का काम करता हूं और घर पर बहुत कम रहता हूं. मेरा ज्यादातर काम बाहर का ही रहता है. अब मैं अपनी कहानी पर आता हूं. कहानी मेरे और मेरे रिश्तेदार की लड़की के बारे में है.

एक बार मैं जोधपुर में काम से गया हुआ था. मुझे गांव में एक रिश्तेदार के घर रुकना पड़ा. मुझे 15 दिन के लिये वहीं रहना था. मैं उनको चाची कहकर बुलाता था. उनके दो बच्चे भी हैं. उनके यहां एक बेटा है और एक बेटी है.

बेटी कॉलेज की पढ़ाई कर रही थी. बेटा बड़ा था और जॉब में था. यह कहानी उनकी बेटी रीना (बदला हुआ नाम) के बारे में है. रीना की उम्र 20 से ऊपर ही थी. उसने अपनी जवानी में कदम रखा ही था.

रीना देखने में काफी सुंदर थी या फिर ये कहूं कि वह काफी सेक्सी थी. उसकी चूचियां काफी बड़ी हो गयी थीं. नई नई जवानी थी इसलिए उसके बदन में भराव आना शुरू हो गया था. गांड और चूचियां देख कर किसी का भी लंड उसको चोदने के लिए तड़प सकता था.

रीना का फीगर था 32-30-36. उसके साथ सेक्स करने के लिए मेरे मन में पहले दिन से ही ख्याल आने लगे थे. मगर समझ नहीं आ रहा था उसको अपने दिल की बात कैसे बताऊं कि मैं उसके साथ ये सब करना चाहता हूं.

मेरे चाचा चाची खेत में काम करने के लिए चले जाते थे. तो उन दिनों जब मैं अपने चाचा चाची के घर में रुका हुआ था, उस दिन मैं घर पर अकेला था. उनका लड़का जॉब में गया हुआ था. उनकी बेटी रीना अपने कॉलेज में गयी हुई थी और चाचा चाची खेत में थे.

उस दिन रीना अपने कॉलेज से जल्दी घर आ गयी थी. उस समय मैं दूसरे कमरे में अपने लैपटॉप में सेक्स कहानियां पढ़ रहा था. अन्तर्वासना पर सेक्स कहानी पढ़ना मुझे बहुत पसंद था. मैं पूरे मजे लेकर कहानियों का लुत्फ उठा रहा था. मेरा लंड भी तना हुआ था.

फिर गेट पर पोस्टमैन आ गया.
रीना ने आवाज लगाई कि भैया जाकर एक बार बाहर देख लो.
मैंने अपने लंड को अंदर दबाया और मैं उठ कर बाहर चला गया. उस वक्त रीना शायद कपड़े बदल रही थी.

मैंने लैपटॉप को वहीं पर छोड़ दिया था. पोस्ट लेकर मैंने वहीं पास में रख दी क्योंकि मुझे पेशाब लगी थी. मैं बाथरूम में चला गया. पेशाब करने लगा. उसके बाद मेरा मन लंड को हिलाने के लिए करने लगा क्योंकि उत्तेजना तो पहले से ही थी. मैं बाथरूम में ही लंड हिलाने लगा.

मुझे गये हुए दस मिनट हो चुके थे. जब मैं वापस आया तो रीना बाहर आ चुकी थी और मेरे लैपटॉप में देख रही थी. उसका हाथ उसकी चूत पर था. मैंने उसे चुपके से देखा और पाया कि वो अपनी चूत को सहला रही थी.

यह देखकर मैं वहीं साइड में खड़ा हो गया. मैं उसको देखने लगा कि ये आगे भी कुछ करती है या नहीं. कुछ देर के बाद उसने अपनी चूची को बाहर निकाल लिया और उसको दबाने और मसलने लगी. मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा.

मेरे मन में उसको चोदने के ख्याल आने लगे. अब मौका भी सही था. मैं एकदम से खांसते हुए उसकी तरफ निकल कर आया तो एकदम से हड़बड़ा गयी.
मैंने मौके का फायदा उठाते हुए उससे कहा- ये क्या कर रही थी तुम मेरे लैपटॉप में?
मैं जानता था कि वो भी सेक्स कहानियों का मजा ले रही थी. मगर फिर भी मैं उसको फंसाना चाहता था.

फिर मैं उसके करीब आ गया. मेरा लौड़ा भी मेरी पैंट में तन चुका था. उसने नीचे ही नीचे मेरे लंड की तरफ देखा और मुझे सॉरी बोलने लगी.
वो कहने लगी कि मैं इस बात के बारे में चाचा चाची को कुछ न बताऊं.
मैं हंसते हुए उसके पास बैठ गया और उससे कहा- मैं तो मजाक कर रहा था. जवानी में तो ये सब नॉर्मल होता है.

मेरा मूड देखकर वो खुश हो गयी और मुझे गले से लगा लिया. जैसे ही उसकी चूचियां मेरी छाती से लगीं तो मेरे बदन में करंट सा दौड़ गया. मैंने उसको पीछे हटाया और उसके होंठों को देखने लगा. हम दोनों के होंठ आपस में कब मिल गये हमें पता भी नहीं चला.

दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे. वो मेरे होंठों को चूस रही थी और मैं उसके होंठों को चूस रहा था. हम दोनों गर्म होने लगे और पांच मिनट के बाद ही रीना के बदन पर केवल ब्रा और पैंटी ही रह गयी थी. मैं उसको वहीं बेड पर लिटा कर उसके बदन को चूम रहा था.

फिर उसने मेरे कपड़े निकालना भी शुरू कर दिया. मेरी शर्ट को निकाला और फिर पैंट को. वो मेरे लंड को पकड़ना चाह रही थी मगर फिर भी अभी थोड़ा शरमा रही थी.

मैं अंडरवियर में था और मेरा लौड़ा फटने को हो रहा था. जबकि रीना की चूचियां उसकी ब्रा में कैद थीं. उसकी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था जिससे उसकी पैंटी गीली दिखाई देने लगी थी.

वो काफी देर से अपनी चूत को सहला रही थी. इसलिए उसकी चूत में पहले से ही गर्मी आ चुकी थी. फिर मैंने उसकी ब्रा को खोल दिया तो उसके चूचे नंगे हो गये.

जवान लड़की की नंगी चूचियां जैसे ही मेरे सामने आईं मैं उन पर टूट पड़ा. मैं उसकी चूचियों को दबाते हुए पीने लगा. वो भी कामुक हो चुकी थी और उसके मुंह से सिसकारियां निकल रही थीं.

पांच मिनट तक मैंने उसके दूधों को पीया और फिर उसकी पैंटी को भी निकाल दिया. मैंने उसकी चूत को नंगी कर दिया. उसकी चूत गीली हो चुकी थी.

मैंने उसकी चूत पर मुंह रख दिया और उसको चाटने लगा. अब उससे भी रहा न गया और हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गये. वो भी मेरे अंडरवियर को निकाल कर मेरे लंड को चूसने लगी. मैं उसकी चूत में जीभ दे रहा था और वह अपनी जीभ को मेरे लंड के टोपे पर फिरा रही थी.

हम दोनों ही पागल हुए जा रहे थे. मुझे बहुत मजा आ रहा था. एक तरफ तो मेरा मुंह उसकी चूत में था और दूसरी तरफ वो मुझे लंड चुसवाने का मजा दे रही थी.

काफी देर तक हम दोनों एक दूसरे के सेक्स अंगों को चाटते और चूसते रहे. उसके बाद मैंने उसकी टांगों को चौड़ी कर दिया. उसकी कमर के नीचे तकिया लगा दिया. उसकी चूत ऊपर आ गयी थी.

मैंने देखा कि रीना की चूत एकदम से लाल हो गयी थी. वह फूल चुकी थी. रीना बहुत ही ज्यादा गर्म हो चुकी थी. मगर उसकी चूत को देख कर लग रहा था कि उसने अभी तक लंड नहीं लिया था.

रीना की चूत पर मैंने अपने लंड को लगा दिया और उसकी चूत के दाने को लंड से रगड़ने लगा. वो एकदम से सिहर गयी. मुझे भी उसकी कुंवारी चूत को लंड से छेड़ने में गजब का मजा मिल रहा था.

जब उससे रहा न गया तो वो बोली- बस अब जल्दी डालो, अब और नहीं रुका जा रहा है.
मैंने उसकी चूत में लंड के टोपे को घुसाने की कोशिश की मगर चिकनाई की वजह से मेरा लंड फिसल गया.

मैंने दोबारा से लंड को सेट किया और अबकी बार जोर लगाकर धक्का दिया तो मेरा लंड उसकी चूत में जा घुसा. जैसे ही लंड का टोपा उसकी चूत में घुसा रीना की आंखें जैसे बाहर आ गयीं.

वो तड़पने लगी. मुझे पीछे धकेलने लगी. मगर तभी मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया. उसकी चूचियों को दबाने लगा. थोड़ा सा विराम देकर मैंने उसकी चूत में लंड को धकेलना शुरू कर दिया.

मैंने आधा लंड उसकी चूत में घुसा दिया. उसकी चूत एकदम से तप रही थी. मैंने एक और धक्का मारा और पूरा लंड उसकी चूत में घुसा दिया. वो मेरे बदन से लिपट गयी.

पूरा लंड रीना की चूत में घुस चुका था. फिर थोड़ा सा रुक कर मैंने उसकी चूत को चोदना शुरू कर दिया. दो मिनट के बाद वो सामान्य होने लगी. मैंने नीचे झांक कर देखा तो उसकी चूत से खून निकल गया था. मुझे पता था कि उसकी चूत की सील टूट गयी है.

मैं उसकी कुंवारी चूत को खोल चुका था. अब वो आराम से मेरे लंड को अपनी चूत में लेकर चुदने लगी. थोड़ी ही देर में उसने खुद ही अपनी चूत को मेरे लंड की तरफ धकेलना शुरू कर दिया.

रीना के मुंह से सिसकारियां लगातार निकल रही थीं. कुछ देर तक उसकी चूत को चोदने के बाद मैं नीचे आ गया और वो मेरे ऊपर आ गयी.

उसने खुद ही मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत में ले लिया और ऊपर बैठ कर चुदने लगी. मैंने उसकी गांड को पकड़ लिया और नीचे से धक्के लगाने लगा. उसकी चूचियां छोटी फुटबॉल की तरह मेरी आंखों के सामने उछल रही थीं.

मैंने उसकी चूचियों को पकड़ लिया और उनको दबाने लगा. अब वो और ज्यादा मदहोश होने लगी और मुझे भी गजब का मजा आने लगा. पांच मिनट में ही उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया.

उसका पानी निकलने के बाद उसकी चूत से पच-पच की आवाज आने लगी. मैं भी उसे चोदता ही रहा. मैंने अपनी स्पीड तेज कर दी और दो मिनट के बाद मैं उसकी चूत में झड़ गया.
हम दोनों ही थक गये थे. थक कर हम एक दूसरे के साथ लिपट गये और हांफने लगे.

उसके बाद रीना उठी तो उसका ध्यान बेड पर लगे खून के धब्बे की ओर गया. वो डर गयी. मगर मैंने उसको समझा दिया कि पहली बार में ये सब होना नॉर्मल सी बात है. उसके बाद उसको थोड़ी तसल्ली हुई. फिर वो उठ कर बाथरूम की तरफ जाने लगी तो उसके पैर लड़खड़ा रहे थे. वो गिर गयी.

मैंने दौड़ कर उसको संभाला और उठाया. रीना की चूत सूज गयी थी. फिर हमने साथ में ही शावर लिया. एक दूसरे को किस किया. शावर में ही दोनों का मूड फिर से बन गया.

नहाने के बाद चुदाई का दूसरा राउंड भी हुआ. अबकी बार मैंने उसको डॉगी की पोज में चोदा. इस तरह से उस दिन मैंने तीन बार उसकी चूत मारी. उसकी चूत का भोसड़ा बना कर रख दिया.

जब तक मैं वहां पर रहा मैंने उसकी चूत को चोदा. आज भी जब कभी मौका मिलता है तो हम दोनों चुदाई करते हैं. मैंने रीना की गांड भी चोदी हुई है. वह कहानी मैं आपको फिर कभी बताऊंगा.

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घर में चोदा कोचिंग क्लास की सेक्सी लड़की को (Ghar Mein Choda Coaching Class Ki Sexy Ladki Ko)

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मेरा नाम रोहन है. मैं आज आपको एक सच्ची घटना बताने जा रहा हूं. यह कहानी मेरी और मेरी कोचिंग फ्रेंड की है. यह आज से चार साल पहले की बात है.

उस वक्त मेरी उम्र 21 साल थी. जिस फ्रेंड के बारे में मैं बात करने जा रहा हूं वो मेरे साथ कोचिंग में पढ़ती थी. उसका नाम नेहा था. वो भी 21 साल के ही करीब होने वाली थी.

दोस्तो, पहले तो मैंने उस पर ध्यान नहीं दिया. फिर धीरे-धीरे जब हमारी दोस्ती हुई तो मैं उस पर ध्यान देने लगा. वो सच में कमाल दिखती थी. वैसे मैं भी हैंडसम था देखने में और मेरी बॉडी भी अच्छी बनी हुई थी.

मैं अपनी तारीफ नहीं कर रहा हूं मगर मेरी बॉडी और मेरे चेहरे को देख कर लड़कियां मेरे पीछे लट्टू हो जाती थीं. नेहा के साथ भी ऐसा ही हुआ था, जो मुझे बाद में पता चला.

तो हुआ यूं कि जब मैं कोचिंग क्लास में जाने लगा था तो शुरू के दिनों में पढ़ाई को लेकर काफी सीरियस था. मैं क्लास में सबसे पहले पहुंच जाता था. रोज ही मैं सबसे पहले पहुंच कर अपनी सीट पर बैठ जाता था.

उसके बाद सब लोग धीरे-धीरे आने लगते थे. मैंने उस वक्त नेहा पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया था मगर वो मेरी नजर में जरूर थी क्योंकि किसी खूबसूरत लड़की पर नजर चली ही जाती है.

एक दिन क्लास में टेस्ट चल रहा था. नेहा मेरे पीछे ही बैठी हुई थी.
उसने पीछे से मुझे हाथ लगा कर कहा कि मुझे आप टेस्ट में हेल्प कर देना. वो कहने लगी कि वो घर से तैयारी करके नहीं आई है.
मैंने हां में सिर हिला दिया.

फिर हमारा टेस्ट शुरू हो गया. उस दिन मैंने एक घंटे में ही टेस्ट पूरा कर लिया था. उसके बाद मैंने अपने आंसर शीट नेहा को दे दी और उसकी शीट लेकर बैठ गया. मैंने उसकी शीट पर भी आंसर लिख दिये ताकि उसके अच्छे मार्क्स आ जायें.

अगले दिन जब टेस्ट रिजल्ट आया तो नेहा के 50 में 38 नम्बर आये. वो अपने नम्बर देख कर बहुत खुश हो गयी. उसके चेहरे की रौनक उस दिन देखते ही बन रही थी. मैं भी खुश था कि मैंने उसकी मदद की और वह काफी खुश है.

फिर जब क्लास खत्म हुई तो सबके जाने के बाद वो मेरे पास आई और मुझे थैंक्स बोलते हुए हग करने लगी. उसने जब मुझे हग किया तो उसकी चूचियां मेरी चेस्ट से छू गयीं. मेरे बदन में करंट सा दौड़ गया.
फिर वो चली गयी.

इस तरह से हम दोनों के बीच में बातें शुरू हो गयीं. हम दोनों जल्दी ही बहुत अच्छे दोस्त बन गये. उसके बाद हम दोनों ने अपने फोन नम्बर भी एक्सचेंज कर लिये और दोनों के बीच में फोन पर भी बातें होने लगीं.
ऐसे ही धीरे-धीरे हम लोग बाहर घूमने भी जाने लगे.

एक दिन हम लोग पार्टी के लिए जाने लगे. उस दिन जब वो तैयार होकर आई तो मैं उसको देखता ही रह गया. मेरी नजर उससे हट ही नहीं रही थी.
नेहा ने उस दिन एक काले रंग का वन पीस ड्रेस पहना हुआ था. उसका फीगर उसमें अलग से ही पता चल रहा था.

वो इतनी हॉट लग रही थी कि मेरी आह निकल गयी उसको देखकर. उसका फीगर 36-24-32 था. मैं उसको देखता ही जा रहा था.
फिर वो बोली- ऐसे क्या देख रहे हो?
मैंने कहा- कुछ नहीं. बस ऐसे ही. आज तुम कुछ अलग ही लग रही हो.
फिर वो बोली- थैंक्स, तुम भी काफी हैंडसम लग रहे हो. चलो अब चलते हैं.

फिर हम पार्टी के लिए निकल गये. हम लोग बाइक से जा रहे थे. रास्ता काफी खराब था. मुझे बार बार ब्रेक लगाने पड़ रहे थे. उसके बूब्स बार बार मेरी पीठ पर टच हो रहे थे. उसकी चूचियां सच में काफी बड़ी थीं. मेरे बदन में झनझनाहट होने लगी थी. मेरा लंड खड़ा हो गया था.

बड़ी मुश्किल से कंट्रोल करके हम लोग पार्टी में पहुंच गये.
वहां पहुंच कर हम लोग साथ में डांस करने लगे. हमने उस दिन काफी ड्रिंक भी कर ली थी. नेहा ने थोड़ी ज्यादा ही पी ली थी. उससे खुद को संभालना भी मुश्किल हो रहा था.

मैंने ही उसको संभाला और इस दौरान हमारी नजरें मिलीं और हम दोनों वहीं पर स्मूच करने लगे. वो भी मेरे सिर को अपनी तरफ दबाते हुए मेरे होंठों को चूसने लगी.

वो होश में नहीं थी और मेरे पूरे बदन पर हाथ फिराने लगी थी. मैं भी उत्तेजित हो गया था लेकिन मैंने होश नहीं खोया था.
वो मेरे कान में कहने लगी- मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करने का मन कर रहा है.
मैंने उसको मना कर दिया. मैं ऐसी हालत में उसका फायदा नहीं उठाना चाह रहा था.

फिर वो वहीं पर बेहोश सी होने लगी. मैंने किसी तरह से उसको वहां से निकाला और बड़ी मुश्किल से उसे अपने घर लेकर पहुंचा. उसको घर लाकर मैंने बेड पर लिटा दिया. मैं खुद भी बेड पर गिर गया. मुझे भी नशा हो गया था और नींद जल्दी ही आ गयी.

उसके बाद जब अगले दिन हम दोनों उठे तो वो कहने लगी कि उसके सिर में बहुत दर्द हो रहा है.
वो पूछने लगी कि मैं कहां पर हूं?
मैंने कहा- रात में तुमने कुछ ज्यादा ही पी ली थी. तुम नशे में थी और पता नहीं क्या क्या बोल रही थी.
वो पूछने लगी- ऐसा क्या बोल दिया था मैंने?
मैंने कहा- रहने दो, मैं नहीं बताना चाह रहा.

वो जिद करते हुए बोली- नहीं बताओ, मुझे जानना है कि ऐसा क्या बोल दिया था मैंने!
मैं बोला- तुम मेरे साथ सेक्स करने की बात कर रही थी.
ये सुनकर वो एकदम से शरमा कर चुप हो गयी और फिर नजरें चुराने लगी.

फिर वो बेड से उठ गयी और बोली कि मुझे चेंज करना है.
मैंने नेहा को अपनी टीशर्ट और एक लोअर दे दी.

जैसे ही उसने मेरे कपड़े पहने वो अलग ही माल दिखने लगी. उसकी चूचियां टीशर्ट में बहुत सेक्सी लग रही थीं. उसकी गांड लोअर में बिल्कुल अलग ही शेप में दिखाई दे रही थी. उसकी चूचियां टीशर्ट में यहां वहां झूल रही थीं. मुझे साफ पता लग रहा था कि उसने नीचे से ब्रा भी नहीं पहनी हुई है.

मैं उसको घूर रहा था. वो मेरे पास बेड पर आकर बैठ गयी.
मुझसे कहने लगी- रोहन, मुझे तुमसे प्यार हो गया है. मैं तुम्हें पसंद करने लगी हूं.

मेरे पूरे शरीर में करंट सा दौड़ पड़ा.
अब मेरे अंदर भी सेक्स जाग चुका था. मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिये. हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे. यह हमारी पहली किस थी जो लगभग दस मिनट तक चली. मेरा लंड फटने को हो गया था.

फिर वो अलग होते हुए बोली- रोहन, आज मैं तुम्हारी हू. मैं अपने आप को तुम्हें सौंप रही हूं. तुम जो चाहो कर सकते हो.
हम दोनों फिर से एक दूसरे को बुरी तरह से चूमने और चूसने लगे. कभी गर्दन पर तो कभी गालों पर. कभी माथे पर तो कभी कानों पर. दोनों एक दूसरे को जैसे खा जाना चाहते थे.

उसके बाद नेहा ने मेरी टीशर्ट उतारनी शुरू कर दी और मेरी छाती को चूमने लगी. मेरे पूरे बदन में झनझनाहट हो रही थी. पहली बार कोई लड़की मेरे बदन को इतने प्यार से चूम रही थी.
वो बोली- मैं तुम्हें पहले दिन से ही पसंद करती थी. तुमसे चुदना चाह रही थी. जिस दिन से मैंने तुम्हें देखा था उसी दिन से मैं तुमको पाने की कोशिश कर रही थी रोहन.

नेहा मेरे बदन को बहुत ही मदहोशी में चूम रही थी. जैसे उसने कभी किसी मर्द के बदन को छुआ ही न हो. उत्तेजना मैं मैंने भी उसकी चूचियों को उसके टीशर्ट के ऊपर से दबाना शुरू कर दिया था.

काफी देर तक वो मेरे बदन को चूमती रही. फिर मैंने उसे नीचे कर लिया और खुद उसके ऊपर आ गया. अब मेरे अंदर का शैतान जाग गया था. मैंने उसकी टीशर्ट को निकलवा दिया और उसकी चूचियों को नंगी कर दिया.

Sexy Girl Nude
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मैं उसकी बड़ी बड़ी चूचियों को दबाते हुए पीने लगा. उसके मुंह से मजे के कारण सिसकारियां निकलने लगीं. आह्ह … रोहन … अम्म … आई लव यू … उफ्फ जान … स्सस … करके वो तेज तेज आवाजें करने लगी. मैं भी उसके बदन को जैसे निचोड़ने लगा.

नेहा मेरी पीठ पर नाखून गड़ाने लगी. वो मेरे बालों को पकड़ कर खींचने लगी. मेरे सिर को अपनी चूचियों पर दबाने लगी. मैं भी उसको जोर से चूसता रहा.

फिर वो बोली- मुझे आज तुम्हारे लंड की सैर करनी है जानू … मुझे अपने लंड की सवारी करवा दो।
मैंने कहा- हां मेरी जान … अभी करवाता हूं.

मैंने नेहा की लोअर को निकाल दिया. उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को चाटने लगा. मुझे पहली बार इतनी हॉट लड़की की चूत मिली थी. लाइन तो बहुत लड़कियों ने मारी थी मुझ पर लेकिन एक हॉट लड़की खुद ही चुदने के लिए बेताब थी आज.

फिर मैंने उसकी गीली पैंटी को निकाल दिया. जैसे मैंने उसकी पैंटी उतारी तो उसकी गुलाबी चूत मेरी आंखों के सामने नंगी हो गयी. मैंने एक दो पल तो उसकी चूत को देखा और फिर उसकी चूत को सूंघने लगा. उसकी चूत में से मादक सी खुशबू आ रही थी.

एकदम से मैं उसकी चूत को चूसने लगा. मैंने उसकी चूत में जीभ दे दी. उसकी चूत से पानी निकल रहा था. मैं उसकी चूत के पानी का स्वाद लेने लगा.

वो सिसकारने लगी- आह्ह रोहन … चूस लो इसको. आज ये तुम्हारी है.
वो मेरे सिर को पकड़ कर अपनी चूत पर दबाने लगी. मैं भी उसकी चूत में जीभ देकर उसको चाटता रहा.

जब उससे रहा न गया तो उसने मेरी लोअर को भी निकाल दिया. मेरे अंडरवियर को खींच कर मुझे नंगा कर दिया. उसने मेरे लंड को हाथ में ले लिया. वो नीचे झुकी और मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी.

वो सच में बहुत ही प्यासी थी. फिर मैंने उसको 69 की पोजीशन में कर लिया. वो मेरे लंड को चूसने लगी और मैं उसकी चूत को चाटने लगा.

मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था. ऐसा ही हाल नेहा का भी था.
उसने लंड को मुंह से निकाला और बोली- बस अब चोद दो यार … मैं पागल हो रही हूं.

मैंने उठ कर उसकी टांगों को फैला दिया. उसकी चूत को अपने हाथ से सहलाया तो उसकी सिसकारियां निकल रही थीं. वो चुदने के लिए तड़प रही थी.

मैंने उसकी चूत पर लंड को रख दिया. अब मेरा लंड उसकी चूत में जाने के लिए तैयार था. मेरे लंड का लाल सुपारा उसकी गुलाबी चूत पर रखा हुआ बहुत ही सुंदर लग रहा था. ऐसी हॉट लड़की की चूत मारने को मिल रही थी मुझे.

हॉट सेक्सी देसी गर्ल की चूत पर लंड को रख कर मैंने एक शॉट मारा लेकिन लंड फिसल गया. उसने मेरे लंड को चिकना कर दिया और उसकी चूत भी पानी छोड़ कर चिकनी हो गयी थी. वैसे भी नेहा की चूत काफी टाइट थी.

फिर मैंने उसकी चूत पर तेल लगाया और उसकी चूत पर फिर से अपने लंड का सुपारा रख दिया. जब मैंने धक्का मारा तो आधा लंड उसकी चूत में उतर गया.

इसके साथ ही मैं उसके ऊपर झुक गया और उसके होंठों पर अपने होंठों को रख दिया क्योंकि मेरा लंड काफी बड़ा था. वो चिल्लाती इससे पहले ही मैं उसके होंठों को चूसने लगा. मैं कुछ पल तक उसके होंठों को चूसता रहा और लंड को वहीं पर रखा.

फिर मैंने धीरे से दूसरी बार धक्का मारा और लगभग पूरा लंड उसकी चूत में घुसा दिया. इतने में ही उसकी आंखों से आंसू निकल आये.
वो बोली- बेबी, एक बार इसे बाहर निकाल लो. बहुत दर्द हो रहा है.
मुझे उस पर रहम तो आ रहा था लेकिन अगर मैं लंड को बाहर निकाल देता तो फिर दोबारा डालने में बहुत मुश्किल हो जाती.

मैं उसके होंठों को पीता रहा और रुका रहा. कुछ देर के बाद उसका दर्द कम हो गया. फिर मैंने धीरे धीरे नेहा की चूत को चोदना शुरू कर दिया. अब उसको भी मजा आने लगा और वो मेरा साथ देने लगी. अब वो खुद ही अपनी चूत को मेरे लंड की ओर उछाल कर चुदवा रही थी.

कुछ ही देर के बाद उसके मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं. वो बोली- उम्म्ह… अहह… हय… याह… रोहन मुझे अपनी रंडी बना लो. चोद दो मुझे जोर से… आह्हह … मेरी जान।
मेरा जोश भी पूरा बढ़ता जा रहा था. मैं तेजी से उसकी चूत को पेलने में लगा हुआ था.

दस मिनट तक मैंने उसकी चूत चोदी और फिर उसकी चूत में ही झड़ गया. हम दोनों काफी देर तक एक दूसरे के साथ नंगे पड़े रहे. फिर हम बाथरूम में गये और साथ में ही शावर लेने लगे.

नहाते हुए मैंने उसकी गांड में उंगली दे दी. मेरा लंड फिर से खड़ा होने लग गया था.
वो बोली- नहीं रोहन, अब नहीं. मैं बहुत थकी हुई हूं. अब और नहीं करना है. तुम गांड फिर कभी किसी और दिन मार लेना.

मगर मैं कहां मानने वाला था. बाथरूम में ही तेल की शीशी रखी हुई थी. मैंने अपने लंड पर तेल लगाया और उसकी गांड में लंड को लगा दिया. पीछे से मैं उसकी चूचियां दबाने लगा. हम दोनों के बदन भीगे हुए थे लेकिन गर्म होकर तप रहे थे.

मैंने धीरे धीरे उसकी गांड में लंड घुसाना शुरू कर दिया. जैसे ही लंड अंदर गया वो छूटने की कोशिश करने लगी लेकिन मैं उसकी पीठ पर चूमने लगा. फिर मैंने थोड़ा सा लंड और धकेला और इस तरह से पूरा लंड उसकी गांड में उतार दिया.

लड़की की गांड चुदाई का मजा पहली बार मिल रहा था मुझे. उसको दर्द हो रहा था मगर मैंने उसका मुंह अपनी तरफ कर लिया और उसके होंठों को चूसने लगा. फिर वो काफी देर के बाद सामान्य हुई और मैंने उसकी गांड को चोदना शुरू कर दिया.

मैंने बाथरूम के अंदर ही उसकी गांड चोद डाली. जब मेरा माल निकलने को हुआ तो मैंने कहा कि मेरा होने वाला है.
वो बोली- मैं पीना चाहती हूं तुम्हारा माल.
मैंने लंड को बाहर निकाल दिया.

नेहा अपने घुटनों के बल मेरे सामने बैठ गयी और मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी. एक दो बार धक्का देने के साथ ही मेरे लंड ने वीर्य उसके मुंह में छोड़ दिया.

उसने मेरे सारे वीर्य को पी लिया. वो उसको ऐसे निचोड़ रही थी जैसे उसको वीर्य पीना सबसे ज्यादा पसंद हो. उसने मेरे लंड को पूरा निचोड़ लिया.

चाट-चाट कर नेहा ने मेरा लंड साफ कर दिया. फिर मैं उसको गोदी में उठा कर बाहर ले आया और उसको बेड पर लिटा दिया. उसके बाद मैं भी उसके पास ही लेट गया और हम दोनों सो गये.

शाम को मैंने नेहा को उसके घर पर ड्रॉप कर दिया. उसके बाद हमने कई बार सेक्स किया. हमारे बीच में काफी कुछ हुआ. वो सब कहानी मैं आपको फिर कभी बताऊंगा कि कैसे हमने कोचिंग क्लास में भी सेक्स का मजा लिया.

इस सेक्स कहानी के बारे में अगर आपको अपने विचार प्रकट करने हैं तो मुझे मेल करें. कमेंट करके बतायें कि आपको मेरी यह रियल सेक्स स्टोरी पसंद आई या नहीं. मुझे आपके मैसेज का इंतजार रहेगा.

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