आंटी का मीठा मीठा दर्द

Filed Under (Hindi Stories) by admin on 03-09-2010

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प्रेषक : राज मेहता

हाय दोस्तो, मुझे हिंदी लिखनी नहीं आती पर कोशिश कर रहा हूँ, मेरी गलतियों को नज़रान्दाज़ कर दें।

मेरा नाम राज है, मैं इन्दौर का रहने वाला हूँ। मैं जब भी अपने घर जाता था तो हमेशा पड़ोस की आँटी को चोदने के बारे में सोचता रहता था।

इस बार जब मैं अपने घर गया तो मेरे ऊपर कृपा हो ही गई, मुझे चोदने का मौका मिल ही गया। मैं जिम जाने लगा था जिसका असर मुझे घर पर मालूम चला। आँटी के पति दुबले पतले थे और दिन भर को़र्ट में रहते थे।

उस दिन आँटी का हीटर ख़राब हो गया था। हमारे शहर में कई लोग हीटर पर खाना बनाते हैं। आँटी का भी खाना नहीं बना था, मैं गाय को रोटी देने बाहर आया तो आँटी बोली- राज, मेरा हीटर खराब हो गया है, उसे सुधार दो !

मैंने मजाक में कहा- आप तो खुद ही इतनी गर्म हो कि तपेली को हाथ से पकड़ लो तो पानी भाप बन जाये !

वो हंस दी, मैंने आज तो रास्ता साफ समझा और उनका हीटर सही करने उनके घर आ गया। उनकी लड़की जो दसवीं में है, स्कूल जा रही थी।

मैं हीटर को सही करने लगा, उनसे टेस्टर माँगा तो वो उसे लेकर खुद ही हीटर की स्प्रिंग को चैक करने लगी। तब उनके बड़े बड़े स्तन उनके ब्लाउज़ से बाहर दीखने लगे थे। मन तो कर रहा था कि उनके स्तनों को पकड़ कर मसल डालूँ पर मर्यादा मुझे रोक रही थी।

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दो बहनों की चुदाई

Filed Under (Hindi Stories) by admin on 02-08-2010

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प्रेषक : चोदू चोदू

मेरा नाम बबलू है और मैं आगरा का रहने वाला हूँ। मेरे घर में तीन ही लोग हैं, मैं, पिताजी और माँ।

बात उस समय की है जब मैं पढ़ता था। मेरे पड़ोस में शर्मा जी का घर था, उनकी दो बेटियाँ थी, एक तो मेरे साथ ही पढ़ती थी। मैं पढ़ने में काफी होशियार था इसलिए कई बच्चे मुझसे सवाल पूछा करते थे और मैं भी सबकी मदद कर देता था। मैं अपने मोहल्ले का काफी सीधा लड़का था।

अब मैं आप लोगो को शर्मा जी की बेटियों के बारे में बताता हूँ। बड़ी का नाम सीमा और छोटी का अंशु था। दोनों की जवानी उभार पर थी पर छोटी वाली तो कुछ ज्यादा आगे थी। सीमा का फिगर बड़ा मस्त था 24-36-24, पर रंग थोड़ा सांवला था। अंशु तो गजब की बाला थी, गोरा रंग और गजब का फिगर ! ऐसा कि देखते ही चोदने का मन करे और कई लड़के तो खड़े-2 मुठ मार दें ! फिर भी मैं इन सब पर ध्यान नहीं देता था।

एक दिन की बात है, मैं शाम को घर के बाहर टहलने निकला, तभी अंशु दौड़ती हुई मेरे पास आई और कहा- दीदी आपको बुला रही है, उन्हें कुछ पूछना है।

मैं चलने को तैयार हो गया और उसके पीछे पीछे उसके घर चला गया। वहाँ देखा तो सीमा कुछ पढ़ रही थी। उसके मम्मी-डैडी कहीं बाहर गए हुए थे और घर पर बस वही दोनों थी।

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माँ बेटी की चुदाई

Filed Under (Hindi Stories) by admin on 18-07-2010

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प्रेषक : राकेश रंजन

दोस्तो, जैसा कि आप सभी जानते है कि मैं चंदा और उसकी बेटी छवि दोनों की चूत और गांड दोनों चोद चुका हूँ। अब मैं दोनों को एक साथ चोदना चाह रहा था जिससे कि मैं जब चाहूँ किसी की गांड या चूत में अपना लंड पेल सकूँ। यह सोच कर मैं समय की इंतजार करने लगा। शायद ऊपर वाले को मुझ पर जल्दी ही तरस आ गया।

छवि का फोन आया कि उसकी मम्मी अभी बाहर से नहीं आई है और उसके चूत में खुजली हो रही है जो मेरे लंड को अपने अंदर लेकर ही ठीक होगी। मैं छवि की चूत और गांड में अपने लंड पेलने को पहले से ही तैयार था, केवल उसके फोन का इंतजार कर रहा था कि कब छवि का फोन आये और मैं अपना सात इंच लंड उसकी चूत में पेल दूँ।

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वो कौन थी

Filed Under (Hindi Stories) by admin on 24-06-2010

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लेखक : मुन्ना (मुन्नेराजा)

दोस्तो,

एक लम्बे अंतराल के बाद आपसे फिर मुखातिब हूँ, एक अचरज-कथा प्रस्तुत कर रहा हूँ !

पता नहीं किसी से मेरे बारे में सुनकर मेरे पास एक महिला का फोन आया और उन्होंने मुझसे बोला कि वो किसी जरूरी कार्य से मुझसे मिलना चाहती हैं।

मेरे पूछने पर बोलीं कि फोन पर बताना तो संभव नहीं है, आप यदि मुझे समय दे सकें और अपना पता बता दें तो आपकी मेहरबानी होगी, मैं काफ़ी परेशान हूँ और इसलिये आपसे मिलकर बात करना चाहती हूँ।

फिर मेरे और पूछने पर बताया- मुझे मेरे ही किसी मिलने वाले ने आपसे मिलने को कहा है, जो आपको बहुत अच्छे से जानते हैं …

मैंने बहुत पूछा कि कौन हैं आपके मिलने वाले?

तो जवाब मिला कि गोपनीयता के कारण वो नाम नहीं बताना चाहती …

यह सारा घटना-क्रम दिसम्बर और जनवरी महीने का है।

एक स्त्री के मुँह से मेहरबानी और परेशानी में सहायता की बात से मुझे तकलीफ हुई और मैंने उनको अपने कार्यस्थल का पता देते हुए मिलने का समय बता दिया।

सटीक नियत समय पर एक आकर्षक महिला का मेरे ऑफिस में पदार्पण हुआ, उन्होंने मुझसे पूछा- मुन्ना जी !! ??

मैंने हाँ में गर्दन हिलाई और उनको मेरी मेज़ के विपरीत कुर्सी पर बैठने का संकेत किया।

वो कुर्सी पर विराजमान हुईं और मेरे ऑफिस का मुआयना करती हुई बोलीं कि समस्या मेरी व्यक्तिगत है और मेरे पति से सम्बंधित है।

मैंने मेरी काउंसलर को मेरी कुर्सी पर आने को कहा और चाय वाले को चाय बोलने को कहकर, उनको लेकर ऑफिस के अन्दर के हिस्से में चला गया।

महिला और मैं आमने सामने कुर्सी पर बैठ गए, वो कुछ देर तक मुझे हौले हौले ताकती रहीं जैसे कि तौल रही हों कि कुछ बताएं या नहीं।

फिर बोली- मेरा नाम रेखा है और मैं जयपुर के ही बाहरी इलाके जगतपुरा में रहती हूँ। मेरी शादी आज से दो साल पहले हुई थी। मेरी ननद की शादी हो चुकी है और अब मेरे परिवार में मेरे सास-ससुर हैं और हम हैं, अच्छा घर बार है, पति देखने में अच्छे हैं और परिवार के सभी सदस्य मिल जुल कर रह्ते हैं !

इतना कहकर वो चुप हो गई … तो मैंने बात को आगे चलाने के मकसद से बातचीत शुरु की।

मैंने कहा कि यह सब तो बहुत अच्छी बात है फ़िर आपको दिक्कत कहाँ है ?

इस सबके बाद भी वो मुझे टुकुर टुकुर ताकती रही, उनके मुँह से आगे के बोल नहीं निकल रहे थे …

इस पर मैंने उनको समझाया कि यदि आप कुछ बोलेंगी नहीं तो आपके आने का मकसद भी पूरा नहीं होगा और मैं भी आपकी कोई मदद नहीं कर पाउंगा।

इस पर उनकी नजर नीचे हो गई और एक लम्बी सांस छोड़ते हुए बहुत हलके शब्दों में बोलीं - दिक्कत मुझे मेरी विवाहित जिन्दगी से है …

मेरे मुँह से सिर्फ़ इतना निकला- ओह …

कुछ समय हम दोनों ही चुपचाप बैठे रहे और गनीमत हुई कि उस वक्त चायवाला चाय दे गया तो उन्होंने मुझसे चाय लेने को कहा तो मैंने उनको बताया कि मैं चाय नहीं पीता हूँ, प्लीज आप चाय लीजिये …

चाय पीने के दौरान वो बहुत हद तक सामान्य हो गई थीं और हम दोनों में छोटी मोटी घर बार की इधर उधर की बातें होती रहीं …

चाय खत्म करने के दौरान हम दोनों में उनकी परेशानी वाले विषय पर और कोई बात नहीं हुई।

चाय खत्म करने के बाद एक बार फ़िर वो मेरा मुँह देखने लगी तो मैंने कहा कि आप अपने वैवाहिक जीवन में किसी समस्या के बारे में मुझसे कोई बात करने वाली हैं और यह मानिये रेखा जी कि यदि आप चुप बैठ जायेंगी तो मैं अन्तर्मन की बातें जानने वाला नहीं हूँ कि उसके बाद मैं आपसे सीधे ही आपकी समस्या पर आपसे बात करने लग जाउंगा या कोई समाधान बताने लग जाउंगा … इसलिये प्लीज आप बेहिचक अपनी बात शुरु कीजिये … वैसे तो कहीं ज्यादा अच्छा होता कि आप अपने पति के साथ आतीं तो बात करने में हिचक वाली कोई बात नहीं होती और जहाँ तक मैं समझ पा रहा हूँ आप जिस प्रकार से हिचक रही हैं उससे आपकी समस्या सेक्स से सम्बन्धित कोई परेशानी होनी चहिये, लेकिन असली बात तो आप ही मुझे बतायेंगी …

वो फ़िर नीचे जमीन की तरफ़ देखने लगी और बोलीं कि आप कहते तो सही हैं कि यह बात करनी तो मेरे पति को ही चाहिये थी लेकिन क्या करूं वो तो कहीं आने जाने को तैयार ही नहीं हैं … , शादी के बाद जो लड़की के अरमान होते हैं वो उनमें काफ़ी हद तक तो अच्छा घर बार और परिवार ही होते हैं लेकिन … … फ़िर वो लम्बी सांस छोड़ते हुए चुप हो गई।

इस पर मैंने कहा- आप सही कह रही हैं शादी तो शादी, बिना शादी के भी सेक्स बहुत हद तक सभी जीवों के जीवन में बेहद महत्व रखता है।

तो वो बोलीं कि एकदम ठीक बात कह रहें हैं आप, मेरे पति अच्छे बदन के मालिक हैं लेकिन सेक्स करते समय मुझसे पहले वो … बल्कि यों कहें कि जल्दी ही … …

मेरे मुँह से अनायास ही निकल गया - ओ ओ ओह ह ह्ह …

लेकिन यह बात तो नितान्त ही आपके पति से सम्बन्धित हैं तो मैं आपकी सहायता किस प्रकार से कर सकता हूँ ??

तो वो एक बार फ़िर से मेरे मुँह को ताकते हुए बोलीं- मैं इसी सम्बन्ध में तो आपसे सलाह और सहायता लेने आई हूँ, वैसे तो मैंने मेरे पति को सलाह दी कि वो क्यों नहीं किसी डाक्टर से सलाह लेते हैं तो वो बहुत हिचक के बाद तो माने और बड़े अस्पताल के जाने-माने डाक्टर के पास गये,

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कुँवारी बुर

Filed Under (Hindi Stories) by admin on 20-06-2010

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प्रेषक : वी हैकर्स

हाय ! मैं समीर, मेरी पहली कहानी “मार डाला रे” आप लोगों ने पसन्द की और मुझे मेल भी किया… इसके लिये धन्यवाद। मैं आज आपको अपनी एक और यौन-कथा अन्तर्वासना के माध्यम से बताने जा रहा हूँ।

मैं गुड़गांव में रहता हूँ। यह बात उस समय की है जब हमारे पड़ोस में एक लड़की अपने मामा के यहाँ रहने आई। उसका नाम मोनिका था। वो बिहार की रहने वाली थी, उसका रंग सांवला था पर उसके स्तन एकदम सेब की तरह टाइट थे। उसके कूल्हे मस्त थे, जब वो चलती थी तो उसके कूल्हों की उठा-पटक देख कर गली के लड़कों के लंड ज़िप तोड़ने के लिये बेकरार हो जाते थे।

वो कभी-कभी हमारे घर टीवी पर मूवी देखने आ जाती थी। जब वो हमारे यहाँ आती थी तो मेरी नजरें सिर्फ़ उसके कूल्हों पर ही रहती थी। उसके स्तन उसकी चोली को फाड़ने के लिये बेबस होते नजर आते थे।

एक दिन हमारे घर के सभी लोग एक शादी में गये थे। उस दिन जब वो हमारे यहां आई तब मैं अपने घर में इंगलिश मूवी देख रहा था, वो चुपचाप आकर मेरे पीछे खड़ी हो गई मैंने उसे नहीं देखा, मूवी में चुदाई का सीन आ रहा था, लड़का अपना लंड लड़की की गांड में दे कर चुदाई का मजा लूट रहा था। मैं भी अपने मोटे लंड को हाथों में लेकर बैठा था, मेरा लौड़ा टाइट होता जा रहा था, अचानक पीछे रखे गिलास के लुढ़कने की आवाज आई तो मैंने घूम कर देखा तो मोनिका मेरे पीछे खड़ी मूवी को बड़े ध्यान से देख रही थी, उसकी आंखें बिल्कुल लाल हो रही थी। मैंने जल्दी से पास पड़े तौलिए को उठा कर अपने लौड़े पर डाल लिया।

वो भी सकपका गई। मैंने उसको अपने पास बैठने के लिये बोला तो वो आकर बैठ गई। मैंने उससे पूछा- तुम कब आई?

तो वो शरमाते हुए बोली- जब हीरो हिरोइन को किस कर रहा था, तब !

मैं समझ गया कि उसने पूरी चुदाई देखी है। मैंने उसके हाथ को छुआ तो वो पूरी कांप रही थी, मेरे हाथ पकड़ने का उसने कोई विरोध नहीं किया। मैं समझ गया कि आज तो जिंदगी का मजा लूटा जा सकता है। मैंने उससे पूछा- आज हमारे यहीं रूकोगी क्या ? क्योंकि आज हमारे यहां भी कोई नहीं है।

मैं यह जानना चाहता था कि उसके मन में क्या है, तो वो बोली- मुझे डर लगता है !

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