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Horny desi couple fucking hard amateur sex video
Filed Under (Sex Scandal Videos) by admin on 25-03-2010
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Horny naked lady lying in bed showing her sexy ass before her hairy husband spreads her legs and pumps her choot nicely first in missionary position followed by doggy in this must watch MMS. File size: WMV - 4.70 MB, 3gp - 1.30 MB ; Playing time: 2:00 mins
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कंप्यूटर की प्रॉब्लम
Filed Under (Hindi Stories) by admin on 25-03-2010
Tagged Under : hindi sex stories, कंप्यूटर की प्रॉब्लम
प्रेषक : राज़ शर्मा
मैं सनी भोपाल से, मेरी उम्र ३० साल है।
यह बात उस समय की है जब मैं कंप्यूटर का कोर्स कर रहा था। मुझे उस समय कंप्यूटर ठीक करने के लिए लोगों के घर पर भी जाना पड़ता था।
एक बार की बात है, मेरे एक सीनियर ने मुझे एक पता दिया और कहा कि इस घर में जाकर इनकी प्रॉब्लम देखना है। मैंने जाने से पहले वहाँ काल किया तो उन्होंने कहा कि दो बजे के बाद आना।
मैं उनके घर अढाई बजे गया तो एक बहुत ही प्यारी सेक्सी लड़की ने दरवाजा खोला, उम्र कोई अट्ठारह-उन्नीस साल होगी। मैंने उससे पूछा कि कम्प्यूटर में क्या प्रॉब्लम है तो उसने कहा की काम करते समय कंप्यूटर कभी भी बंद हो जाता है।
मैंने कंप्यूटर ऑन किया और चेक किया तो पता लगा कि वायरस के कारण परेशानी हो रही थी। मैंने वायरस हटा दिया और उसे चेक करने को कहा। लेकिन उससे पहले उसने कहा कि आप क्या लोगे- चाय या ठंडा?
मैंने उसे कहा कि पहले चेक कर लो फिर देखते हैं।
उसने चेक किया और कहा कि आप कोई मूवी लगा कर छोड़ दो, कुछ देर में अगर बंद नहीं होता है तो ठीक है।
मुझे उसमें कहीं भी कोई मूवी नहीं दिखी तो मैंने उससे कहा- मूवी तो नहीं है !
तो उसने आकर एक फाइल खोल दी, वो अंग्रेजी मूवी थी। वो लगाकर किचन में चली गई। कुछ देर में उसमें सेक्स के सीन आने लगे तो मैंने फाइल को बंद कर दिया। उसने आकर कहा- प्रॉब्लम आई?
मैंने कहा- प्रॉब्लम तो नहीं आई !
तो उसने कहा कि मूवी बंद क्यों कर दी?
उसने फिर से मूवी चालू कर दी। जैसे ही मूवी में सेक्स के सीन आये तो मैं उठकर बाहर जाने लगा।
उसने कहा- क्या हुआ?
मैंने कहा- अगर ऐसी मूवी देखेंगे तो कुछ हो जायेगा !
वो बोली- कुछ नहीं होगा !
मैं भी बैठ गया लेकिन कुछ देर बाद वो मेरे साथ वाली कुर्सी के पास आकर खड़ी हो गई। अब मुझसे भी सब्र नहीं हो रहा था सो मैंने भी उसे पकड़ अपनी गोद में बिठा लिया। वो कुछ नहीं बोली। मैंने उसके वक्ष पर हाथ रख दिया तो बोली- यही प्रॉब्लम है ! फिल्म पूरी नहीं देख पाती ! अकेले में देखकर फिल्म बंद करनी पड़ती है !
अब वो खुल कर मेरा साथ दे रही थी। बोलने के बाद उसने अपनी जीभ मेरे मुंह में अन्दर कर दी। अब मैं भी उसे चूसने लगा। धीरे-धीरे मेरा हाथ उसके स्तनों को मसलते हुए उसके पेट तक चला गया। मैंने फ़ौरन उसका टॉप उतार दिया।
कसम से ऐसे स्तन अपने जीवन में कभी नहीं देखे। जैसे ही वो ब्रा से आजाद हुए, मैंने एक चुचूक को मुंह में भर लिया। उसे भी जवानी का मजा आने लगा। उसने जोश में आकर मेरी पैंट के अन्दर हाथ डालकर मेरा लंड पकड़ लिया और उसे आगे पीछे करने लगी। अब हम दोनों अपने बस में नहीं थे। मैंने बिना देर किये उसका स्कर्ट उतार दिया और उसकी क्रीम रंग की पैंटी उतार दी। उसकी चूत पे हल्के से बाल थे। मैंने उसकी चूत में एक ऊँगली डाल दी। उसने एक हल्की सी आह भरी। अब वो अपने पंजे के बल बैठ कर मेरी पैंट खोल के मुझे पूरा नंगा किया, एक झटके से वो मेरा लंड पकड़ कर अपने मुंह में लेकर प्यार से चूसने लगी। मैं तो जन्नत की सैर कर रहा था।
अब वो कहने लगी- फिल्म को पूरा करो!
मैंने उसे वहीं सोफे पे लिटाया और उसके चुचूक चूसने लगा। साथ में उसकी चूत में ऊँगली करने लगा और वो आह आह कर रही थी।
वो बोली- अब सब्र नहीं हो रहा है, कर दो पूरा !
मैंने उसकी टाँगें उठाकर अपने लंड को उसकी बुर के मुंह पर रखा और एक हल्का सा धक्का दिया। लेकिन वो कुंवारी थी इसलिए लंड आसानी से नहीं गया तो मैंने उससे कहा- थोड़ा दर्द होगा !
तो वो बोली- परवाह मत करो ! लेकिन आज खुश कर दो !
इस बार मैंने उसे कमर से पकड़ के लंड को बुर के मुंह में रखकर तेजी से धक्का दिया मेरा लंड सीधे उसके बुर में तीन इंच तक चला गया। उसके आंसू आ गए और निकालने को कहने लगी। लेकिन मैं कुछ देर रुका और उसके स्तन चूसने लगा। इससे उसे दर्द कुछ कम लगा और नीचे से कमर उठाने लगी। फिर मैं उसके होठों को चूमने लगा और उसकी कमर को कस के पकड़ के एक जोर से धक्का मारा। इस बार मेरे पूरा लंड उसकी चूत की गहराई में चला गया लेकिन होंठों पर होंठ रखे होने के कारण उसकी आवाज बाहर नहीं आ पाई। थोडी देर शांत रहने के बाद वो बोली- अब जितनी तेजी से कर सकते हो, करो !
फिर मैं भी जोर से अन्दर बाहर करने लगा और वो भी इस काम में मेरा साथ देने लगी, वो कहने लगी- मेरे अन्दर से कुछ निकल रहा है !
थोड़ी देर में मुझे भी लगा कि मेरा भी निकल रहा है तो मैंने उसके मुंह में दे दिया। वो प्यार से चूसने लगी। मैंने उसके मुंह में अपना सारा रस दे दिया, वो भी प्यार से पी गई। इसके बाद उसने मेरे लंड को चाट के साफ कर दिया तो मैंने पूछा- अब तो कोई प्रॉब्लम नहीं कंप्यूटर में?
तो वो हंस के बोली- अब प्रॉब्लम होगी तो काल कर दूँगी।
मैंने उससे कहा- कंप्यूटर ठीक करने का चार्ज ऑफिस में देना होता है !
तो वो बोली- ऑफिस के चार्ज के अलावा तुम्हारा इनाम भी लो !
उसने मुझे दो सौ रूपये ऑफिस के और मुझे एक प्यारा चुम्बन और एक हजार रूपये दिए और कहा- प्रॉब्लम होने पर आ जाना !
मैंने भी उसे एक किस देकर वादा किया और वहां से चला गया। उसके बाद उसने अपनी एक सहेली को बुलाया और मैंने उसकी भी प्रॉब्लम ख़त्म की लेकिन वो फिर कभी !
मुझे आप सबके जवाब का इन्तजार रहेगा।
मुझे ईमेल करें
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Horny European girl sucking cock and fucked doggy style video
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Tagged Under : Sex Scandal Videos
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Horny European girl sucking her boyfriends dick sitting on the couch and then removing her pants and bending over to get fucked hard doggy style in this homemade sex video. File size: WMV - 17.75 MB, 3gp - 5.10 MB ; Playing time: 7:45 mins
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तांत्रिक की साधना
Filed Under (Hindi Stories) by admin on 25-03-2010
Tagged Under : hindi sex stories, तांत्रिक की साधना
प्रेषक : अरनब बनर्जी
मैं अन्तर्वासना की एक नियमित पाठक हूँ। मैंने एक बात पर ध्यान दिया कि यहाँ तांत्रिक की कोई कहानी नहीं है जबकि तांत्रिकों को लेकर कई मनघड़न्त कहानियाँ हैं हमारे देश में।
यह कहानी है आज से पाँच सौ साल पहले के भारतवर्ष की। उस ज़माने में इस देश में तांत्रिकों और औझाओं का बड़ा दबदबा था। बड़े बड़े राजा-महाराजा किसी न किसी तांत्रिक की शिष्य थे। ऐसे ही एक राजा थे महाराजा प्रताप सिंह !
वे विलासपुर के महाराजा थे। यह कहानी उनकी बेटी राजकुमारी सुजाता की है। राजकुमारी सुजाता सर्वगुण-सम्पन्ना थी। वो सुन्दर, सुशील, शांत और सब कलाओं में निपुण थी। उसका कद 5 फीट 2 इंच, रंग सांवला, घट की तरह वक्ष और ढोल की तरह नितम्ब थे। इतनी भारी भरकम नितम्ब लेकर वो ज्यादा तेज़ नहीं चल पाती थी, बिलकुल राजहंस की तरह वो चलती थी। जब गाना गाती थी तो ऐसा लगता था जैसे सारी कायनात (दुनिया) गूंज उठी हो।
राजकुमारी सुजाता जब उन्नीस साल की हो गई तब महाराजा प्रताप सिंह ने उसके स्वयम्बर का प्रबंध किया।
उनके तांत्रिक गुरुदेव बाबा गोरबनाथजी उन्हें सलाह दी कि स्वयम्बर के एक सप्ताह पहले वे सुजाता को गोरबनाथजी के पास भेजें। राजा उन पर पूर्ण विश्वास करते थे। राजा ने सुजाता को भेजने का प्रबंध किया।
उस रात बहुत बारिश हो रही थी। सुजाता अकेली एक घोड़े पर सवार हो कर गोरबनाथजी के आश्रम आई। आश्रम में बाबा के भक्तों ने सुजाता को एक कुटिया में बिठाया और एक लड़की आकर सुजाता के पैर धोने लगी। उस लड़की नाम अंजना था। कुछ ही देर में दोनों में दोस्ती हो गई।
सुजाता(सु): मुझे क्या करना है यहाँ?
अंजना(अ): तुमको पता नहीं? तुम्हें किसी ने नहीं बताया?
सु: नहीं !
अ: तुम्हें इस पवित्र गंगा-जल से नहाना पड़ेगा, तब तुम शुद्ध होगी।
सु: उसके बाद?
अ: तुम नग्न अवस्था में बाबा के पास जाओगी, तब बाबा तुम्हें नीवी पहनायेंगे।
सु: नग्न होकर? नहीं बाबा, मुझसे यह काम नहीं होगा।
अ: तो फिर तुम कभी भी माँ नहीं बन पाओगी ! बाबा की सेवा करनी होगी तुम्हें आज रात को ! तब बाबा तुम्हें आर्शीवाद देंगे, तब तुम माँ बनोगी।
सु: अच्छा, ठीक है ! सेवा करूंगी !
अ: यह हुई न बात ! जाओ उस पवित्र गंगाजल से नहा कर आओ !
यह कहकर अंजना सुजाता को एक जलप्रपात के पास ले आई, सुजाता के सारे कपड़े उतार दिए और उसे नहलाना शुरू किया।. उन दोनों में से किसी को नहीं पता चला कि और भी कोई है जो इस स्नान-दृश्य को बड़े गौर से देख रहा है।
नहाने के बाद सुजाता नग्न अवस्था में जब बाबा गोरबनाथ के पास पहुँची तो बाबा की आँखें फटी की फटी रह गई। इतनी सुन्दर नारी बाबाजी ने पहले कभी नहीं देखी थी। मन ही मन वे सुजाता के यौवन की तारीफ़ कर रहे थे।
उसका उन्नत वक्ष-स्थल, मदमस्त कर देने वाले पृष्ट-उभार देखकर ही बाबाजी गरम होने लगे। उन्होंने तय किया कि आज इस नारी की मस्त जवानी का रस खूब पियूँगा।
अंजना नीवी लाई। बाबाजी काम्पते हुए हाथ से उस सुंदरी सुजाता को नीवी पहनाने लगे। सुजाता मुस्कुराई।
पहली बार किसी मर्द की हाथ का स्पर्श पाकर सुजाता एक अजीब सी आनंद में खो गई। ऐसा क्या जादू था उस स्पर्श में ! बाबा का जादूभरा स्पर्श पाकर सुजाता खिल उठी। बाबाजी उसके मन की बात को समझ कर मुस्कुराए- आ जाओ जान आज की मदमस्त रात तुम्हारी इस मदमस्त जवानी के नाम !
बाबा गोरबनाथ बड़े सिद्ध पुरुष थे। उनके पास कई सिद्धियाँ थी। उनमें से एक है वशीकरण ! वो किसी भी प्राणी चाहे वो इंसान हो या जानवर, किसी को भी अपने वश में कर सकते थे। दरअसल बात यह थी कि बाबाजी ने महाराजा प्रताप सिंह को अपने वश में किया हुआ था। वे स्पर्श से, आँख से और बातों से भी वशीकरण कर सकते थे। सुजाता को उन्होंने अपने स्पर्श से वशीभूत किया। अंजना अब सुजाता को लेकर एक पास वाली कुटिया में गई।
उस कुटिया में गुलाब की महक थी, एक चारपाई थी, उस चारपाई पर एक थाली थी, थाली में एक गिलास था जिसमें शरबत था। अंजना के कहने पर सुजाता ने वो शरबत पी लिया और धीरे धीरे उसे एक अजीब सा नशा छाने लगा। दरअसल वो एक खास किस्म का नशीला शरबत था, उसे जो पीता उसे ही नशा हो जाता। आज से ५ साल पहले बाबाजी ने इसी शरबत को पिलाकर राजा को वश किया। आज राजकुमारी सुजाता की बारी है।
आधी सोई आधी जगी सुजाता को अंजना बाबा की यज्ञ भूमि पर लाई। बाबा ने उसके सर पर हाथ रखके एक मंत्र का उच्चारण किया और सुजाता जाग गई। उसे सब कुछ अच्छा लगने लगा। आज तक जो कुछ उसे बुरा लगता था वो भी अच्छा लगने लगा। उसने बाबा गोरबनाथ को कामुक नजर से देखा और अपने आप ही घुटनों के बल बाबाजी के सामने बैठ गई और धोती से उनका लण्ड निकालकर देखने लगी। बाबा गोरबनाथ की उम्र पैन्तालीस साल थी पर लुंड दस इन्च का था। सुजाता ने जिंदगी में पहली बार इतना मोटा और लम्बा लण्ड देखा पर उसे डर नहीं लगा। ऐसा ही असर था बाबाजी के मंत्र का ! सुजाता पूरी तरह से उनके वश में थी, वो अपने होश खो चुकी थी।
वो बाबाजी का मोटा लण्ड मुंह में लेकर चूसने लगी। बाबाजी तो तब सातवें आसमान पर थे। जब उन्हें लगा कि अब वो झड़ने वाले हैं तो उन्होंने कहा- अच्छा राजकुमारी जी, अब चूसना बंद कीजिये। आपने मेरी कामेच्छा को जगाकर मुझ पर बहुत दया दिखाई है, अब इस बालक को आपकी सेवा करने का अवसर दीजिये। अब कृपया विपरीत आसन में लेट जाईये इस बालक के ऊपर !
सुजाता ने मुस्कुराकर कहा- ठीक है बालक ! चलो लेट जाओ !
बाबाजी लेट गए अपनी चारपाई पर ! उसके ऊपर 69 पोज़िशन में सुजाता लेट गई। बाबाजी सुजाता की चूत को चाट रहे थे, चूस रहे थे। सुजाता आनंद में झूम रही थी और ऊहऽऽ आह कर रही थी और बाबाजी का मोटा लण्ड चूस रही थी। बाबाजी भी चिल्ला रहे थे- आह क्या बात है, आह ऊ आअ हह आह !
इतने में सुजाता दो बार झड़ी। कोई साधारण लड़की होती तो निढाल पड़ जाती पर बाबाजी के मंत्र के जोर से उसकी ताक़त और कामेच्छा बिल्कुल कम नहीं हुई।
अब बाबाजी भी इतना चूसने के बाबजूद झड़नेवाले नहीं थे, उनकी अजीब शक्ति थी। ये जो वो सुजाता के साथ कर रहे हैं इसे भैरभी साधना कहते हैं। इसमें नारी होती है देवी माँ जो अपने भक्त की कामना पूरी करती है, भक्त उन्हें जिस रूप में चाहे पूजा कर सकता है। यहाँ बाबा गोरबनाथ उन्हें कामदेवी के रूप में पूज रहे हैं।
बाबाजी ने अब कहा- हे माते, अब आप पद्मासन में अपने बालक की काम-इच्छा पूरी कीजिये, मेरा लिंग धारण करके मेरी वासना पूरी कीजिये !
सुजाता ने कहा- जैसी तेरी इच्छा बालक ! आज मैं तेरी हर मनोकामना पूरी करूंगी, अपने बालक की हर मनोकामना उसकी माँ ही पूरी करती है ! चल तैयार हो जा !
बाबाजी ने पद्मासन में बैठ गए और सुजाता उनके ऊपर आसन जमा कर बैठ गई. सुजाता की योनि ने बाबाजी के लण्ड को आसानी से ले लिया। कमाल का मान्त्रिक है बाबा गोरबनाथ।
पद्मासन में एक दूसरे को धक्के लगाते- लगाते दोनों ही सिसकारियाँ भर रहे थे। सुजाता को बहुत आनंद आ रहा था, वो चिल्ला रही थी- आ आ अह ऊ ओहऽऽ !
तभी अचानक बाहर उल्लू ने आवाज लगाई। बाबाजी को पता चल गया कि क्रिया का अंतिम चरण आ गया है, उन्होंने उसी हालत में सुजाता के कान में एक और मंत्र पढ़ दिया और सुजाता पर से पहले के मंत्र का असर ख़त्म हो गया।
सुजाता आखरी बार चीखी- ऊ ऊओह्ह्ह्ह ! ई ऊऊ मा आऽऽ !
कहते कहते वो जोर से झड़ने लगी। उस समय बाबाजी ने धक्के मारना बंद किया और एक पात्र में सुजाता का योनि-रस भरने लगे। पात्र पूरा भर चुका था। तभी सुजाता ने बाबाजी के लण्ड पकड़ कर दो बार मुठ मारी और बाबा ने भी अपना माल उसी पात्र में गिरा दिया। बहुत ही गाढ़ा और गर्म था बाबाजी का रस।
अब दोनों निढाल पड़ गए और एक दूसरे की बाहों में सो गए।
कुछ देर बाद जब बाबाजी उठे, उन्होंने सुजाता को उठाया और कहा- अब यह पवित्र शर्बत पी लो !
शर्बत और कुछ नहीं दोनों का मिलाजुला रस जो बाबा ने उस पात्र में भरा था। सुजाता ने वो पी लिया और फिर बाबा ने कहा- जाओ बेटी ! महल लौट जाओ ! अब तुम सुखी और सौभाग्यवती होगी। मेरा आर्शीवाद तुम्हारे साथ है !
सुजाता घोड़े पर सवार हो कर महल लौट रही थी, अब वो एक नई सुजाता थी- काम-क्रीड़ा में निपुण !
बाबा के मंत्र ने उसे हमेशा के लिए बदल दिया।
कहानी कैसी लगी? अपनी राय जरूर भेजें !













