पुच्चु ने की पुच्चु की चुदाई

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पुच्चु ने की पुच्चु की चुदाई

प्रेषक : राजा बाबू

जब मेरा ट्रान्सफर जयपुर से जालन्धर हुआ तो अपने एक दोस्त की वजह से मुझे एक कर्नल साहब की कोठी में पेइंग-गेस्ट के रूप में रहने का ठिकाना मिल गया। कर्नल साहब करीब १० साल पहले भगवान को प्यारे हो गए थे, घर में उनकी ७० वर्षीया पत्नी, ४० वर्षीय पुत्र तथा ३६ वर्षीया बहू कुल जमा तीन प्राणी रहते थे। रहने के लिहाज से घर और घर वाले बहुत अच्छे थे। कर्नल साहब की पत्नी का नाम राजबीर कौर था, वो एक बहुत ही शिष्ट, सौम्य, गंभीर और आकर्षक महिला थीं, उनको देखकर बार बार मन में एक ही बात आती थी कि काश ये मेरी माँ होतीं। उनके पुत्र का नाम महिंदर सिंह था, वह सुंदर, लम्बा और योग्य आदमी था। महिंदर की पत्नी का नाम मंजीत कौर था, वह गोरी, सुंदर और सेक्स से भरपूर महिला थी। दुर्भाग्य से इनके कोई संतान नहीं थी।

यहाँ रहते हुए मुझे २ महीने हो गए तो मैं मंजीत का दीवाना हो चुका था, जब वो चलती तो उसके भारी भारी चूतड़ मेरे लंड को खड़ा कर देते। ४-६ दिन में एक बार मुठ मार कर अपनी गर्मी निकालने के अलावा और कोई रास्ता समझ नहीं आ रहा था।

एक दिन पता चला कि दिल्ली में मंजीत के भाई की शादी है और वो अपने पति के साथ १५ दिन के लिए दिल्ली जा रही है। मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरी जान निकाल ली हो।

जिस दिन ये लोग दिल्ली गए, मैं शाम को घर आया तो माँ जी अकेली थी, माँ जी को वो लोग बीजी कहते थे, इसलिए मैं भी बीजी कहने लगा। मैंने कहा- बीजी, जो काम मेरे लायक हो बता दीजिएगा, मैं कर दूंगा।

मैंने खाना बनाने में बीजी की मदद की, दोनों ने खाना खाया और मैं अपने कमरे में चला गया। मेरा और बीजी का कमरा अगल-बगल था और दोनों के बीच एक कॉमन बाथरूम था जिसका दरवाजा दोनों कमरों में खुलता था।

मैं अभी लेटा ही था कि जोर से कुछ गिरने की आवाज आई, मैं बाहर आया तो देखा किचन में बीजी गिर गई हैं, मैंने जल्दी से उन्हें उठाया और सहारा देकर उनके कमरे में लाकर बेड पर लिटा दिया। बीजी लगभग ५’६” लम्बी और टीवी / फिल्म स्टार रीमा लागू की तरह भरे बदन की थीं। लेटने के बाद भी बीजी का कराहना कम नहीं हो रहा था, मेरे पूछने पर बताया कि बांह और कूल्हे पर बहुत दर्द हो रहा है।

मैंने देखा कि उनकी दाहिनी बांह कुहनी के पास काफी लाल थी।

बीजी ने कहा- पुत्तर, सम्मने बारी विच मूव पई ऐ, कड से ल्या !

मैंने मूव निकाली और बीजी से कहा- लाइए, मैं लगा देता हूँ।

बांह पर मूव लगाने के बाद मैंने कहा- बीजी, आप उल्टे लेटो, मैं हिप पर भी लगा दूं !

एक पल की हिचक के बाद बीजी पलटीं और बोलीं- ला दे पुत्तर, रब्ब तेरा भला करे, तैन्नू सुखी रखे, जे आज्ज तूं नां हुंदा ते मैं ताँ उठ के कमरे विच बी नई आ पादीं।

बीजी पेट के बल लेट गईं तो मैंने उनके गाऊन को कमर तक उठा दिया, उनकी केले के तने जैसी चिकनी, सुडौल और गोरी गोरी टाँगे देखकर मेरा मन मचल गया। मरून कलर की पैंटी उनके जिस्म की शान में चार चाँद लगा रही थी। मैंने तुंरत अपने आप को कोसा, खुद को काबू में किया कि ये तो माँ है।

बीजी की कमर पर कुछ नहीं दिखा तो मैंने पूछा कहाँ दर्द है बीजी ?

बीजी ने अपने दाहिने चूतड़ पर हाथ रखकर कहा- ऐत्थे !

मैंने बीजी की पैंटी थोड़ी नीचे खिसकाई तो देखा मेरी हथेली के बराबर जगह एकदम लाल थी, मैंने छुआ तो बीजी कराह उठीं। मैंने पैंटी थोड़ा और और नीचे खिसकाई ताकि मूव अच्छे से लग सके। हलके हलके हाथों से मूव लगाई और पैंटी ऊपर करके गाऊन नीचे कर दिया। मैंने बीजी से कहा- मैं आपके लिए हल्दी डालकर दूध लाता हूँ, आप पियोगे तो सारा दर्द चला जाएगा।

किचन में जाकर दो गिलास दूध गरम किया, एक गिलास खुद पी लिया और दूसरे में हल्दी डालकर बीजी के लिए ले आया। बीजी को सहारा देकर उठाया और वो धीरे धीरे दूध पीने लगीं। बीजी दूध पी रही थीं और मेरी आँखों के सामने बार बार उनकी गोरी टाँगें और चूतड़ आ रहे थे। मैंने तय कर लिया कि आज बीजी की बजानी है। बीजी के दूध पीने के बाद उनसे खाली गिलास लेकर किचन में रखा और आकर बीजी से पूछा- अब दर्द कैसा है?

तो बोली- अज्जे ते औंवे ई हैगा पुत्तर।

मैंने कहा- बीजी, एक बार मूव फिर लगवा लो, सुबह तक आराम आ जाएगा।

हाथ का सहारा देते हुए बीजी को उल्टा किया और उनका गाऊन कमर से और थोड़ा ऊपर तक उठा दिया। मूव की ट्यूब उठाई और अपने पास रखकर बीजी की पैंटी नीचे खिसकाने लगा। पैंटी नीचे खिसकाते खिसकाते उनके घुटनों तक कर दी। अपनी हथेली पर मूव ली और उनके चूतड़ों पर मलने लगा। मेरा ध्यान मूव मलने में कम और चूतड़ सहलाने में ज्यादा था। इस बीच मेरा लंड ७० साल की औरत को चोदकर एक नया अनुभव करने के लिए तैयार हो चुका था और लुंगी के अन्दर फड़फड़ा रहा था।

जब मैं काफी देर तक सहलाता रहा तो बीजी ने कहा- पुत्तर ! तेरे अंकल जी नू गए १० साल हो गे ने, आज्ज तूं मैंन्नू ओन्ना दी याद ल्या दित्ती ऐ ! ओ वी ऐन्जे ई सहलांदे रहंदे सी ! मैंन्नू बौह्त चान्हदे सी, रोज जैतून दे तेल नाल मेरियां लत्तां दी मालश करदे सी ! फ़ेर लत्तां से विच ई वड़ जांदे सी। मैं ओन्ना नूँ प्यार नाल पुच्चु कहंदी सी ते ओ वी मैंन्नू प्यार नाल पुच्चु कहंदे सी।

मैंने कहा- बीजी, क्या मैं आपको पुच्चु कह सकता हूँ ?

कहने लगी- आहो पुच्चु ! तूं मैंनू पुच्चु कह सकना ऐ।

मेरा काम लगभग बन चुका था।

मैंने कहा- पुच्चु ! वो जैतून का तेल कहाँ रखा है ?

बीजी ने अलमारी के ऊपर वाले खाने की ओर इशारा कर दिया। मैं उठा बाथरूम गया, पेशाब किया और अपना अंडरवियर उतार कर रख आया। जैतून के तेल का डिब्बा निकाला, बीजी यानि अपनी पुच्चु की पैंटी उतार दी और टांगों पर जैतून के तेल से मालिश करने लगा।

कुछ देर बाद मैंने कहा- पुच्चु, आप सीधे हो जाओ तो आगे भी कर दूं।

वो सीधी होकर पीठ के बल लेट गईं। मैं उनकी टांगों के बीच बैठ गया और हल्के हल्के हाथों से उनकी जांघो को सहलाने लगा, धीरे धीरे मैं थोड़ा सा आगे खिसक गया और लुंगी में से अपना लंड बाहर निकाल कर पुच्चु की चूत से छुआया तो बड़ी सेक्सी आवाज में बोलीं- की कर रहया ऐ पुच्चु ?

मैंने लंड को अन्दर सरकाते हुए कहा- कुछ नहीं पुच्चु।

मेरा पूरा लंड ७० साल की बीजी की चूत में चला गया था, ताज्जुब यह था कि बीजी की चूत किसी २० साल की कुंवारी चूत से कम नहीं थी।

उस रात बीजी को दो बार चोदा, हम दोनों संतुष्ट होकर सोये। उस दिन से आज तक हमें जब भी इच्छा होती है रात को बाथरूम के रास्ते एक कमरे में आ जाते हैं और मजे लेते हैं।

सब कुछ सिखा दूंगी !

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सब कुछ सिखा दूंगी !

प्रेषक : राजेश

सबसे पहले सभी प्यासी चूतों को मेरे लण्ड का सलाम !

मेरा नाम राजेश कुमार है, मैं आप सब प्यासी चूतवालियों का अपने ७ इंच के खड़े लण्ड के साथ आप लोगों का स्वागत करता हूँ !

मैं अन्तर्वासना का बहुत पुराना पाठक हूँ। मैं २४ साल का नवयुवक हूँ मेरा कद १७५ सेमी और मेरा वजन ६५ किलो है और मैंने बहुत साहस करके अपनी खुद की वास्तविक कहानी आप लोगों का बता रहा हूँ।

वैसे आप सब लोगों को बता दूँ कि मैं एक नम्बर का चूत का चुस्सू हूँ, मुझे चूत चाटने, चूसने और उसका रस पीने में बड़ा मजा आता है। वैसे मैं एक कॉल बॉय बनना चाहता हूँ।

मैं राजस्थान का रहने वाला हूँ और अभी गांधीनगर, गुजरात में रह रहा हूँ, गांधीनगर में मैं एक सिक्योरिटी कम्पनी में नौकरी करता हूँ और हर ३-४ महीने बाद घर जाता हूँ।

अभी मैं अपनी कहानी पर आता हूँ, मैं अपने परिवार के साथ गाँव में रहता था, मेरे घर के पिछवाड़े में एक परिवार रहता है। उस घर में एक बड़ी सेक्सी औरत रहती है, उसका नाम श्वेता है। उसका साईज ३६ इंच, ३२ इंच, ३८ इंच है।

उसका पति फौज में है, मैंने उस औरत को कैसे चोदा और कब चोदा इस कहानी में बताउंगा।

यह बात उन दिनों की है, जब मैं ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ता था, तब मेरी उम्र १८ साल और ६ महीने थी।

जब मैं दोपहर को स्कूल से आता तो हमारे घर पर कोई नहीं होता था, एक दिन मैं स्कूल से जब घर आया तो मेरा घर बंद था तो मैं अपने पिछवाड़े की तरफ गया तो देखा कि श्वेता नीम के पेड़ के नीचे आधी नंगी होकर नहा रही है।

जैसे ही मैंने उसे देखा मेरा तो लंड उसकी ३६ इंच की चूची देख के खड़ा हो गया, हमारे पिछवाड़े में एक छप्पर है जिसमें हमारी भैंसें बंधती हैं, मैं उस छप्पर में घुस गया और उसकी तरफ देखा तो श्वेता मेरी तरफ ही देख रही थी। तो मैंने उसे दिखाते हुए अपनी पैन्ट उतारी और उसे नहाता देखते हुए मुठ मारने लगा, अब वो अपने बदन पर साबुन लगा रही थी और तिरछी नजर से मेरे ७ इंच लंड को मुझे मुठ मारते हुए देख रही थी, लेकिन वो जैसे ही मेरी तरफ देखती, मैं छप्पर की दीवार कर आड़ में हो जाता। पर उसे पता था कि मैं उसे नहाते देख के मुठ मार रहा हूँ।

अब वो अपना पेटीकोट ऊपर करके अपनी जांघों पर साबुन लगा रही थी मुझे उसकी जांघें साफ दिखाई दे रही थी। मैं उसे नहाते हुए देख मुठ मार रहा था और वो कभी अपनी चूचियों को दबाती कभी अपनी जांघों को सहलाती और अचानक उसने अपना पेटीकोट ऊपर उठाया और अपनी चूत पर साबुन मलने लगी। अब मेरे हाथ की स्पीड बढ़ गई थी और मैं झड़ने लगा।

मैंने अपनी पैन्ट पहनी और छप्पर से बाहर निकल कर घर का पिछला दरवाजा खोल अन्दर जाते हुए उसे देखा तो वो मेरी तरफ ही देख रही थी और मुझे अपनी ओर देखते हुए देख के मुस्करा गई।

अब तो मैं उसे रोज उसे नहाते देखता हुआ मुठ मारने लगा और अब मैं धीरे-२ खुल के मुठ मारते हुए नहाते देखता और वो मुझे देखती हुई नहाते हुए अपनी चूची दबाती।

एक महीने बाद मेरी माँ और मेरा छोटा भाई मेरे मामा के घर गये तो मेरी माँ श्वेता को मेरे खाने के बारे में बता के गई क्योंकि मुझे खाना बनाना नहीं आता था।

जब मैं स्कूल से घर आया तो श्वेता ने मुझे बताया कि मेरी माँ मेरे मामा के घर गई है और आज से वो मुझे खाना खिलायेगी।

तो मैंने कहा- ठीक है !

उसने कहा- तुम आज शाम ७ बजे खाना खाने आ जाना !

फिर मैंने खाना खाया और फिर पिछवाड़े में आ गया तो श्वेता ने कहा- मैं नहा लेती हूँ।

मैंने कहा- ठीक है !

और मैं अपने छप्पर की ओर जाने लगा तो श्वेता ने कहा- वहाँ जाने की कोई जरूरत नहीं है, तुम यहीं बैठ के मुझे नहाते हुए देखो।

मैंने कहा- मैं तो कभी आपको नहाते हुए नहीं देखता !

तो वो बोली- मैं तुम्हें रोज देखती हूँ ! तुम रोज मुझे देखते हुए वहाँ छप्पर में मुठ मारते हो और अब झूठ बोल रहे हो !

तो मैंने कुछ नहीं कहा और वहीं बैठ गया, वो अपने कपड़े खोलने लगी और मुझसे पूछने लगी- तुझे मेरी कौन सी चीज बहुत अच्छी लगती है?

तो मैंने कहा- मुझे तो तेरी चूचियॉं बहुत अच्छी लगती हैं !

उसने कहा- तो फिर यहाँ आओ और इन्हें अच्छी तरह देखो !

मैं डरते हुए उसके पास गया और देखने लगा तो उसने डाँटते हुए कहा- इन्हें जोर-२ से दबाओ !

और मैंने उसकी दोनों चूचियों को जोर-२ से दबाना शुरू कर दिया।

फिर श्वेता ने मुझ से पूछा- राजेश क्या तूने कभी किसी को चोदा है या किसी को चुदाते हुए देखा है आज तक?

तो मैंने मना कर दिया।

तुम चुदाई के बारे में कुछ जानते हो क्या?

मैंने जवाब दिया- मैं चुदाई के बारे में कुछ नहीं जानता हूँ !

तो श्वेता कहने लगी- तुम आज रात हमारे घर ही सोना, आज मैं तुम्हें सब सिखाउंगी कि चुदाई कैसे करते हैं और चुदाई का कैसे मजा लेते हैं !

मैं मन ही मन बहुत खुश हुआ कि आज जमके चोदने को मिलेगा।

फिर मैं शाम को ७ बजे श्वेता के घर गया तो श्वेता सज धज के बैठी थी।

यारो, मैं तुम लोगों को बताना भूल गया था कि श्वेता के दो बच्चे भी हैं एक लड़का ३ साल का और एक लड़की १ साल की !

उसने पहले अपने बच्चों खिला के सुला दिया, फिर हम दोनों ने खाना खाया और टीवी देखने लगे। उस समय पर ये सीडी प्लेयर नहीं चले थे। श्वेता के घर में एक पुराना वीसीआर था तो श्वेता ने अपने वीसीआर में एक कैसेट लगाई और बोली- आज तुझे सब कुछ सिखा दूंगी !

थोड़ी देर में जब कैसेट चली तो उसमें दो लड़कियाँ एक लड़के को नंगा कर रही थी, एक ने उसकी शर्ट निकाली और एक ने पैन्ट ! जिस लड़की ने उसकी पैन्ट निकाली, उसने उसकी अण्डरवीयर निकाली और लण्ड पकड़ कर उसे चूसना शुरू कर दिया।

अचानक श्वेता ने मुझे खड़ा कर के मेरी भी पैन्ट निकाल के मेरा लण्ड चूसना शुरू कर दिया तो मुझे ऐसे लगा जैसे मैं स्वर्ग में पहुंच गया हूँ और श्वेता मेरे हाथों को अपनी चूचियों पर लाकर बोली- अब इन्हें जोर-जोर से दबाओ और चूसो भी !

तो मैं उसकी चूचियों को दबाने और चूसने लगा। थोड़ी देर बाद हम एक दूसरे के होंठों को चूस रहे थे। फिर श्वेता ने मुझे टीवी की ओर इशारा किया कि देखो वो लड़का कैसे उन लड़कियों की चूत चूस रहा है ! तुम भी मेरी चूत भी ऐसे ही चूसो !

फिर मैंने उसका पेटीकोट खोल दिया, मैंने देखा कि उसने नीचे कुछ नहीं पहना है और मुझे उसकी झाँटों से छिपी चूत नजर आने लगी। पहले मैंने उसकी चूत को चूमा और अपनी जीभ चूत के अन्दर डाल दी और चूसने लगा- वाह ! क्या स्वाद था उसकी चूत का ! थोड़ा नमकीन थोड़ा खारा ! मुझे तो मजा आ गया चूत चूसने में, श्वेता जोर-जोर से आ़ऽऽऽ….. और जोर सेऽऽ चूसोऽऽ ! और जोर….. से चूसो ….. बड़ा मजा आ रहा है ….. आह ….. ओह …… अब मैं झड़ने वाली हूँ ….. आह ……. ओर जोर से …….. आह …..मैं गई…..

और अचानक उसकी चूत का रस बुरी तरह बहने लगा तो श्वेता ने मुझसे कहा- मेरा रस पीओ !

तो मैं उसका पूरा चूत-रस पी गया, वो भी मेरा लण्ड बड़े प्यार से चूस रही थी।

श्वेता के झड़ने के थोड़ी देर बाद मेरा वीर्य भी निकलने लगा तो श्वेता मेरा पूरा वीर्य पी गई और कहने लगी- राजेश, मैंने आज तक तेरे वीर्य जैसा गाढ़ा और स्वादिष्ट वीर्य किसी का नहीं पिया !

फिर मैंने कहा- श्वेता, मुझे झांटों वाली चूत अच्छी नहीं लगती, और फिर टीवी की ओर इशारा करके बोला- मुझे उन लड़कियों की तरह सफाचट और साफ चूत पसंद है !

तो श्वेता बोली- मेरे राजा, तुम्हें थोड़ी मेहनत करनी पड़ेगी, मैं शेविंग का सामान लाती हूँ ! तुम मेरी चूत की शेव कर दो ! फिर दबा के चोदना !

मैंने कहा- हाँ यह ठीक रहेगा !

फिर वो शेविंग का सामान ले आई।

मैंने उसकी उसकी चूत पे शेविंग क्रीम लगाई और ब्रश को रगड़ने लगा। ब्रश के मुलायम बाल जब चूत के अन्दर गुदगुदी करते तो श्वेता आह…… ओह …… करने लगती। फिर जब खूब झाग बन गये तो मैंने रेजर लिया और शेव करना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद चूत चमकने लगी और मैं दोबारा चूत चाटने लगा तो श्वेता बोली- क्या चूत ही चाटते रहोगे या चोदोगे भी !

मैं बोला- मुझे तो चोदना आता ही नहीं है !

श्वेता बोली- चोदोगे तभी तो चोदना सीखोगे ! चूत ही चाटते रहोगे तो चाटना ही सीखोगे।

फिर श्वेता चारपाई पर लेट गई और बोली- मेरे राजा यहाँ आओ और अपना यह मूसलचंद मेरी इस ओखली में डाल के दबा के कुटाई करो !

तो मैं बोला- मेरी चुद्‌दो रानी ! मेरी तो कुछ समझ में नहीं आया कि तुम क्या बोल गई ?

तो वो हंस के बोली- मेरे बुद्धू चोदू राजा ! अपना यह लम्बा लण्ड मेरी इस में घुसा दो !

और उसने अपनी टाँगें फैला दी, मैंने अपना लण्ड उसकी चूत पे रख कर धक्का मारा तो लण्ड फिसल के साईड में चला गया तो श्वेता बोली- मेरे प्यारे चोदू राजा, यह ऐसे ही अन्दर चला जाता तो हर आदमी चोदू बन जाता !

और फिर अपने हाथ से मेरा लण्ड पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर लगाया और बोली- अब मारो धक्का, जोर से मारना कि पूरा लण्ड एक ही झटके में चूत को फाड़ के अन्दर चला जाये और फिर धुँआधार झटके मारना, मेरे दर्द की परवाह मत करना !

फिर मैने एक जोर का झटका मारा और पूरा लण्ड एक ही झटके में चूत के अन्दर पेल दिया, श्वेता जोर से चिल्ला पड़ी- आह ……… थोड़े धीरे, साले मारेगा क्या ………..

मैंने कहा- तुम ही तो बोली थी कि जोर से पेलना !

इतने जोर से पेलने को थोड़े ही बोला था ?

तो मैं रुक गया।

वो बोली- रुक क्यों गया साले?

तो मैं बोला- साली कभी रुकने को बोलती है कभी चोदने को !

तो वो बोली- कि मैंने तुझे पहले कहा था कि मैं कुछ भी बोलूँ तू रुकना मत ! जोर-जोर से धक्के मारते रहना ! तो तू रुका क्यों? अब जोर -जोर से धक्के मारते हुए चुदाई कर !

और चूचियों को भी खूब दबा और चूस !

तो फिर मैंने राजधानी मेल की तरह धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी। ३० मिनट तक दबा के चुदाई चली। इस दौरान श्वेता ३ बार झड़ी और जब मैं झड़ने वाला थ तो मैंने कहा- मेरा निकलने वाला है !

तो श्वेता बोली- राजा तुम अपना ये अमृत मुझे पिलाना ! मेरी चूत को मत पिलाना !

तो मैंने अपना लण्ड उसकी चूत से निकाल कर उसके मुंह में डाल दिया और वो मेरा पूरा वीर्य गटागट पी गई। उस रात उसने मुझे अलग-अलग आसनों से चोदना सिखाया और फिर हम रोज चुदाई करते ! जब उसका पति छुट्‌टी आता तो हम छुप के चुदाई करते।

फिर एक बार उसकी बड़ी बहन की लड़की उसके घर आई तो मैंने उसे भी चोदा ! उसका नाम बीरबती था, वो १९ साल की थी और उसके जेठ की लड़की विमला को कैसे चोदा और विमला की गांड कैसे मारी ये आपको अगली कहानी में बताउंगा !

आपको मेरी कहानी कैसी लगी, कृपया मुझे मेल करें !

नीलम के साथ एक दिन की मस्ती-2

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नीलम के साथ एक दिन की मस्ती-2

प्रेषक : पप्पू बनारसी

इस कहानी का पहला भाग आप अन्तर्वासना पर पहले ही पढ़ चुके हैं !

अब पेश है दूसरा भाग :

करीब आधे घण्टे बाद हम दोनों जागे …. दिन भर की बेताबी तो निकल चुकी थी, हम दोनों को होटल पहुँच कर फ़्रेश होने तक का ख्याल नहीं रहा, उस वक्त नौ बज चुके थे, हम दोनों बारी-2 से बाथरूम गये, चाय मँगाई, फ़िर सलाद और चिकेन चिल्ली, सोडा आदि का आर्डर किया, साथ ही डिनर भी मँगा लिया ताकि डिस्टर्ब न हों। मेरे पास एक अच्छे ब्राण्ड की व्हिस्की थी, हमने पैग बनाये और आपस में जाम टकराये ….. बातें करते रहे और दूसरा पैग भी खत्म कर दिये हमने आधे-पौन घण्टे में …… अब तक शरीर में गरमाहट आ चुकी थी तथा पहली चुदाई की खुमारी भी उतर चुकी थी। नीलम मेरी गोद में आ के बैठ गई और लगी मेरा गाल सहलाने ….. छाती सहलाने और चूमने …… दो पैग व्हिस्की उसकी आँखों से बोलने लगी थी ….. हम दोनों एक दूजे के होठों को किस करने लगे, हमारी गरमागरम साँसें आपस में टकराने लगी और वो बेतहाशा मेरे होठों को चूसने लगी ….. ओह्ह्ह्ह्ह्ह्….. क्या मस्त होके मुझे प्यार कर रही थी नीलम ….. मेरा तो लौड़ा फ़िर फ़नफ़नाने लगा और मैं भी उसे जोर-2 से चूमने लगा और उसके होठों को चूसने और दाँतो से काटने लगा।

उसका एक हाथ मेरे लण्ड को सहलाने लगा और मैं उसकी चूँचियों को दबाते हुए बुर पर हाथ फ़ेरने लगा …….. और वह अपनी दोनों जाँघो के बीच मेरे हाथ को दबाने लगी …….. मैंने उसके निप्पल को मुँह में लिया तो वह उछल पड़ी और मुझे जोर से जकड़ लिया ……उईईईईइ ….. राजा क्या करते हो??? मार ही डालोगे आज इस प्यासी आत्मा को ? ……… ओह्ह्ह्ह …….. क्या जादू है तुम्हारे मुँह में लेते ही मैं बेकाबू हो जाती हूँ मेरे दोस्त …. मेरे सनम …….. काश मैं तुम्हारी बाँहो में हमेशा-2 के लिये कैद हो जाती ! पर जानती हूँ तुम बीबी-बच्चे वाले हो, तुम और तुम्हारा घर सलामत रहे ! मैं तो इतने प्यार से ही खुश हूँ मेरे राजा …….. फ़िर वह अचानक ही मेरे लण्ड को अपने मुँह के पास ले जाकर टिप को अपने मुँह में डालकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी ….. ओऽऽऽहऽऽह् ….. मैं तो बेहाल होने लगा, फ़िर वो मेरे लण्ड को अपने मुँह में पूरा भर कर जीभ से चाट-2 कर रस ले-ले कर चूसने लगी और मेरी आँखों में आँखें डाल कर नशीले अन्दाज में बोली- आप भी मेरी चूसिये ना प्लीज ……..

चूँकि वो बहुत सुन्दर नहीं थी अतः मेरा मन उसकी चूत चाटने का नहीं हुआ पर मैंने कहा- मुझे यह अच्छा नहीं लगता और मैंने आज तक किसी की चूत पर मुँह नहीं लगाया है, बस मैं लण्ड से चुदाई करता हूँ और मस्ती अनलिमिटेड ……… इस बार मैं तुम्हारे हवाले हूँ जैसे मर्जी हो वैसे चुदाओ ! समझी जानेमन…

इस पर वो बोली- अच्छा तो अब आप मेरे हवाले हैं ना ?

मैंने कहा- हाँ।

ठीक है जानू अब आप नहीं चोदियेगा मुझे ! मैं ही आपकी चुदाई करूँगी ! मन्जूर है?

मैंने कहा- चाहे छुरी खरबूजे पर चले या खरबूजा छुरी पर …… कटना तो खरबूजे को ही है नीलम रानी !

इस पर उसने एक मोहक मुस्कान फ़ेंकते हुये मुझे लिटा दिया तथा मेरे लण्ड को सहलाते हुये अपनी चूत को मेरे लण्ड पर टिका कर दबाई तो थोड़ा सा अन्दर गया…….. उसने और दबाया तो आधा लण्ड उसकी बुर में घुस गया ………..

फ़िर उसने मेरे ऊपर झुक कर मेरे गालों पर एक जोरदार चुम्मा देते हुए मेरे होठों को चूसना शुरु किया और फ़िर एक जोर का धक्का मार कर मेरा पूरा लण्ड अपनी बुर में ले लिया ……..

मैंने भी उत्तेजना में उसको अपनी बाहों में जकड़ लिया और जोर-2 से उसके होठ चूसने लगा……..

ओऽऽऽहऽ साली क्या चुम्मा लेती थी ओह …. पूरी जीभ अन्दर डालकर जोर-2 से चूसते हुए वो लगी धका-धक अपने चूतड़ ऊपर-नीचे करने और कमरे में फ़च-फ़च-फ़च-फ़च की रसीली आवाज गूँजने लगी………..

यारों क्या कमर हिला-2 के वो मुझे चोद रही थी और बीच-2 में झुक कर मेरे होठ चूसने लगती ! ओऽहह्……मैं भी उसकी चूँचियों को मसल रहा था ….. उसके चूतड़ सहला रहा था ….. कमर सहला रहा था और नीचे से धक्का भी मार रहा था, वाह क्या मस्ती और रिदम था नीलम की चुदक्करी में ! मुझे कभी लगता कि मैं लड़की हूँ और मुझे कोई लड़का उचक-उचक के चोद रहा है।

बहुत देर तक वो यूँ ही मुझे पेलती रही और मैं नीचे से धक्का लगाता रहा। एकाएक वो गनगना गई और जोर से मुझ पर गिर के मुझसे चिपक गई और बोलने लगी …..आऽआऽ आऽहहह मेरे राजा आपकी नीलम तो गई काम से ….. ओह राजाऽ आऽऽऽआ आपने तो मेरा सोया हुआ नारित्व जगा दिया आज तो मैं झरने की तरह झर रही हूँ ……. ओऽह आपने तो मेरा मन मोह लिया जानू ….. आई लव यू …….. मैं तो बिन मोल बिक गई मेरे राजा ! आज तो आपने जिन्दगी में पहली बार इतना मजा दिया कि मन कर रहा है कि सारी जिन्दगी आपके लण्ड को अपनी बुर में ही रखे रहूँ मेरे सनम…. मेरे दोस्त …. उसने मेरे दोनों गालों पर बारी-2 से चुम्मा लिया …….. बल्कि यूँ कहिये कि दाँतो से काटा। फ़िर मेरे बालों को सहलाते हुए मुझे प्यार करने लगी और कहने लगी- आप कहें तो मैं सारी जिन्दगी आपकी सेवा करने को तैयार हूँ, मैं खुद अपने लिये कमा लूँगी, बस आप मुझे कभी-2 प्यार करते रहा करिये।

मैं बोला- अभी आज की बात करो यार … तुम तो दो बार झड़ चुकी हो, मेरा तो अभी एक ही बार गिरा है।

वह बोली- जानू चिन्ता मत करो ! अभी थोड़ी मोहलत दे दीजिये ठाकुर साहब ….. जल्दी ही मेरी मुनिया आपसे तिबारा चुदवाने को तैयार हो जायेगी …… इस बार उसका कचूमर निकाल दो यार …….. फ़ाड़ डालो साली को …….. मुझे बड़ा तंग करती है, आज ऐसा चोदो कि फ़िर महीनो नाम ना ले चुदवाने का… मैं देखने में दुबली पतली जरूर हूँ पर हूँ बड़ी सेक्सी।

वह मुझसे चिपक कर मेरे बगल में लेट गई और दोनों एक दूसरे को प्यार करने लगे। मेरा लण्ड तो तना ही था वह उससे खेलने लगी…….. और मैं उसके होठो तथा निप्पल को चूसने लगा। अहिस्ता-2 नीलम फ़िर उत्तेजित होने लगी …….. उसकी साँसे तेज होने लगी, वो मेरे लण्ड को दबाते हुए अपनी बुर पर रगड़ने लगी।

अब मुझसे रहा नहीं गया और एक झटके में उसे पटक के मैं उस पर चढ़ गया और दोनों टाँगो को फ़ैला कर उसकी बुर को आसमान की ओर करके मुहाने पर लण्ड टिका कर तत्काल एक ही बार में पूरा लण्ड नीलम की बुर में पेल दिया …….. वह तड़प उठी और चिल्लाई ….. उईऽऽऽमाँऽऽऽ अरे आपने तो मार ही डाला …….. कहते हुए उसने मुझे जकड़ लिया और आँखें बन्द कर ली तथा अपनी बुर को इतना टाइट कर लिया क्या बताऊँ….. लगा कि मेरे लण्ड का दम निकल जायेगा …….. ओऽह क्या सुखद अनुभूति थी ! लगा कि उसने मेरे लण्ड को लॉक कर दिया हो।

वह मुझे झुका कर धीरे से बोली- राजा थोड़ी देर इसे यूँ ही पड़ा रहने दो ….. अच्छा लगता है।

मैं भी उसी हालत में उसकी छाती आहिस्ता-2 सहलाने लगा, फ़िर दोनों चूँचियों को हौले-2 दबाने लगा, वह और उत्तेजित होने लगी ……… उसके काले चने के बराबर निप्पल कड़े हो गये और भाले के नोक की तरह तन गये …….. ओऽओऽहऽऽह्….. पिया ….. ओऽ मेरे रंगीले साँवरिया …. अब अपने इस मूसल से मेरी ओखली में दनादन कूटो मेरे राजा ……. वैसे ही जैसे हमारे क्षेत्र में धान कूटा जाता है, ऐसी कुटाई करो बलमू कि मेरी बुर से मांड़ का सोता बह निकले !!!!!!

अब क्या था……ऐसा खुला आमन्त्रण पाकर सिंह इज किंग हो गया और मेरा शेरू फ़ुफ़कारते हुये दे दनादन नीलम के बिल में अन्दर-बाहर करने लगा ……. नीलम भी मुझे ललकार रही थी और नीचे से अपनी चूतड़ उछाल-2 कर मेरे हर धक्के का इमानदारी से जवाब देने लगी एकदम एक लय-ताल में….. बस हमारी आह-ऊह…… ओह…… फ़च्… फ़च्… फ़च्… फ़चा-फ़च… की सेक्सी आवाजें गूँज रही थी कमरे में, हम दोनों बस एक दूसरे में डूबकर अपने आप को भूल चुके थे…… तकरीबन आधे घण्टे बाद सिर्फ़ उस जन्नत की मन्जिल पर पहुँच कर ही थोड़ा थमें जिसे आचार्य रजनीश ने “सम्भोग से समाधि” की अवस्था कहा है।

मैं तो लगा कि नीलम की बुर में अपना सर्वस्व ही बहा रहा हूँ एक गरम लावे के रूप में, और उसकी बुर स्खलित होने की प्रक्रिया में लगातार संकुचित और फ़ैल रही थी, उसने मुझे चिपक के जकड़ा हुआ था ऐसा कि साँस लेना भी मुश्किल था……

लगभग 10 मिनट तक हम यूँ ही पड़े रहे समाधि की अवस्था में, फ़िर अलग हुए तो देखा कि बिस्तर पर अच्छा खासा दाग लग गया है और नीलम की बुर से अभी भी मेरा वीर्य चू रहा था, उसने तौलिये से पौंछा और फ़िर मुझसे चिपट गई और प्यार से चूमने लगी और बोली- मैं तो कई साल से चुदवा रही हूँ, 4-5 लोगो से चुदाई हूँ, उनमें से एक का लण्ड आपसे भी बड़ा और मोटा था पर कसम खा के कहती हूँ जो आनन्द आपसे मुझे मिला वह कभी नहीं मिला…… यह रात मुझे जीवन भर याद रहेगी, आज लगता है मैं सुहागिन बन गई और ये मेरी सुहागरात है….. आपको मैं अपना पति मानती हूँ ऐसा कहते हुये वह मेरे पैरों पर अपना सिर रखकर प्रणाम करने लगी।

जब मैंने उसे उठाया तो देखा उसकी आँखे गीली हैं…

मैं भी भावुक होने लगा। फ़िर अपने को सम्भालते हुए व्यवहारिक बनते हुए बोला- पगली तुम जानती हो कि मैं एक शादी-शुदा बाल-बच्चेदार सम्मानित व्यक्ति हूँ, ऐसा सपना पूरा हो ही नहीं सकता, इसलिये यह सब सोचो ही मत, हाँ दुबारा मौका मिला तो फ़िर कभी मज़ा ले लेंगे।

मुझे बड़े जोर की भूख लग आई थी, देखा खाना ठण्डा हो चुका था, होता भी क्यों नही, रात के दो बज चुके थे। हम दोनों ने गरम-2 चुदाई के बाद ठण्डा-2 खाना खाया और नंग-धड़ंग कम्बल में घुस कर एक दूसरे को बाहों में ले के सो गये तो सुबह 8 बजे ही नींद खुली।

जागने पर वो फ़िर मुझसे चिपटने लगी, गरमाहट तो मुझमें भी आने लगी पर 9 बजे डी पी ने जगतगंज बस स्टैण्ड पर पहुँचने को कहा था ताकि नीलम और उसके भाई को चन्दौली की बस पर बैठा कर विदा किया जा सके।

मैंने कहा- जल्दी से तैयार हो जाओ ! चुदी हुई मत दिखो।

करीब नौ बजे हमने होटल छोड़ा, रास्ते में वह बोली- अभी जी नहीं भरा है, 2-3 दिन साथ रहते तो शायद मुझे भरपूर मस्ती मिलती।

और यह भी कहा कि मैं बस से नहीं जाऊँगी, जैसे इज्जत से लाये थे वैसे इज्जत से कार से ही छोड़िये।

मैंने हँस के कहा- तुम्हारी इज्जत अब बची कहाँ? रात भर तो मुझे लुटाती रही …..

इस पर वह बनावटी गुस्से से मुझे मुक्के मारने लगी।

मैंने कहा- मेरा लखनऊ जाना आवश्यक है, रिजर्व आटो कर देता हूँ तुम दोनों चले जाओ।

फ़िर वो मान गई। बस स्टैण्ड पर डी पी उसके भाई के साथ इन्तजार करता मिला, हमने एक आटो तय किया और उसे किराया देकर नीलम को कार से निकालने मैं अकेला ही गया, चूँकि

उसका भाई पास ही में खड़ा था अतः वह सिर्फ़ मेरा हाथ जोर से दबा कर उतर गई और आटो में बैठकर बोली- फ़िर मिलियेगा और अगली बार डी एम साहब से जरूर मुलाकात करवा दीजियेगा और धीरे से एक आँख मार कर मुस्करा दी….. टा-टा करते हुए चल दी।

मेरी सत्यकथा आपको कैसी लगी, जरूर बताइयेगा…

नीलम के साथ एक दिन की मस्ती-1

Filed Under (Hindi Stories) by admin on 31-12-2009

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नीलम के साथ एक दिन की मस्ती-1

प्रेषक : पप्पू बनारसी

हाय दोस्तो,

खासकर प्यारी-प्यारी महिलाओ, आज मैं अपने जीवन के एक यादगार हसीन दिन की दास्तान सुना रहा हूँ……. आशा ही नहीं पूरा विश्वास है कि आप सब गीले और मस्त हो जायेंगे।

यह बात सन 1996 के दिसम्बर के पहले सप्ताह की है। मैं उन दिनों लख्ननऊ में रहता था और अक्सर बनारस के पास अपने गाँव जाया करता था, वहाँ मेरा लंगोटिया यार डी पी रहता था। हम जब भी मिलते खाने-पीने का दौर चलता।

उस रात को उसने बताया कि कुछ दिन पहले वह और उसके गाँव का एक लड़का चंदौली की नीलम नाम की एक लड़की को अपने फ़्लैट पर स्कूटर से ले आये थे और दिन भर में दोनों ने 3-3 बार चुदाई की थी। लड़की मस्त थी और जम के चुदवाई कराई थी। अगर मैं चाहूँ तो वो कोशिश करके उसको ला सकता है, पर इसके लिये हमें अपनी मारुति कार से चन्दौली चलना पड़ेगा, कार देखकर वह आसानी से तैयार हो जायेगी। (उन दिनो मारुति का क्रेज़ था)।

डी पी ने बताया कि लौण्डिया बहुत ही चुदक्कड़ है तथा थोड़ा बहुत व्हिस्की भी पीती है, थोड़ी व्हिस्की पीकर बहुत ही मज़ा देगी। यह सुनकर मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अगले दिन हम दोनों चन्दौली गये और मुझे गली में छोड़कर वह नीलम से मिलने उसके घर चला गया। किसी तरह मौका पाकर उसने मेरे बारे में बताया और साथ में बनारस चलने को कहा। उसने अगले दिन सुबह चलने को कहा तो हम लोग पास ही स्थित अपने गाँव चले गये। नीलम को मैं देख तो पाया नहीं था पर अगले दिन उसके साथ मस्ती की कल्पना से ही मुझे रात भर नींद नहीं आई और रात भर लण्ड महाराज तने ही रहे। दरअसल कई सालों से बीबी के अलावा कोई दूसरी लड़की या औरत मिली ही नहीं थी……स्वाद बदलने की कल्पना से ही मैं बेचैन था।

खैर अगले दिन हम दोनों दोस्त चन्दौली गये और पिछले शाम की तरह मैं गली में अपनी कार में बैठा रहा और डी पी उसके घर में चला गया। करीब आधे घण्टे बाद वह बाहर आया और बोला कि एक समस्या आ गई है। दरअसल नीलम को कुछ बहाना बना के घर से जाना था तो उसका छोटा भाई जो दसवीं में पढ़ता था वह भी कार देखकर साथ चलने की जिद करने लगा तो घर वालों ने कहा उसको भी लेती जाओ। नीलम ने डी पी को इशारा किया कि लेते चलो कोई रास्ता निकल आयेगा ।

उसने कहा कि थोड़ा रिस्क तो है पर चलते हैं कोई न कोई रास्ता तो निकलेगा ही।

कुछ देर बाद हम चारों चल दिये। डी पी नीलम के साथ कार में पीछे बैठा और रास्ते में ही उसने मेरे बारे में बताकर साथ रात गुजारने की पेशकश की तो वह झट तैयार हो गई (बाद में उसने बताया कि मेरा भव्य व्यक्तित्व देखकर उसका मन खुद ही मुझसे चुदवाने को मचलने लगा था) वैसे वह तो जान ही रही थी कि डी पी इसी काम के लिये बनारस ले जा रहा है। हाँ उसने साफ़ कह दिया कि उस दिन की तरह दोनों को नहीं झेल पायेगी, दरअसल वह मुझसे पूरी मस्ती के मूड में थी। डी पी ने भी उसे बता दिया कि मैं काफ़ी शौकीन हूँ तथा किसी अच्छे होटल में ही रात गुजारूँगा, अच्छा खाना…..अच्छी शराब और नीलम का शबाब …. बस मस्ती ही मस्ती…..।

उन दोनों ने योजना बनाई कि डी पी अपनी दुकान पर पाण्डेपुर उतर जायेगा और हम तीनों दिन भर सारनाथ घूमेंगे तथा शाम को डी पी नीलम के भाई को अपने फ़्लैट पर यह कह कर लेता जायेगा कि मुझे नीलम को किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति से किसी जरूरी काम के सिलसिले में मिलाना है। दरअसल नीलम उन दिनों थोड़ी-2 राजनीति और समाजसेवा में शुरुआत कर रही थी तथा उसके अभिभावक भी उसके बाहर आने-जाने तथा कभी-2 रात में भी बाहर रुक जाने पर आपत्ति नहीं करते थे। रात बाहर रुकने के लिये वह कोई न कोई बहाना बना देती थी और हम दोनों उन्हें छोड़ कर किसी होटल में जाकर रात गुजारेंगे, उसके भाई को डी पी कुछ बहाना बना कर हमारे फ़्लैट पर न लौटने का कारण बता कर फ़ुसला लेगा।

नीलम करीब 22 साल की दुबली पतली सी गोरी लड़की थी, उसका चेहरा मोहरा औसत ही था वह देखने में कोई खास तो नहीं लग रही थी पर बुरे काम के लिये बुरी नहीं थी ….. और डी पी ने उसके चुदवाने की जो तारीफ़ की थी तथा जिस बाँकी नज़र से वो मुझे देख रही थी …. आ…ह…ह…ह ….. मेरा दिल तो बल्ले-बल्ले कर रहा था।इधर कई सालों से बस अपनी धर्मपत्नी के साथ धर्म की चुदाई ही करता रहा, कभी स्वाद बदलने का मौका ही नहीं मिला, इसलिये भी मैं अत्यन्त उत्तेजित था …… बस अब मन्जिल कुछ घण्टों की दूरी पर थी …. बस एक काँटा नीलम का भाई था, डी पी के बनाये प्लान के मुताबिक शाम को वह सेट हो जाये तो रात अपनी थी।

हम तीनों दिन भर सारनाथ घूमते रहे। बीच-2 में उसके भाई को कहीं किसी बहाने से भेजकर हम सम्भावित मस्ती की बातें भी कर ले रहे थे। दोनों का ही इन्तज़ार में बुरा हाल था। एक बार तो उसको कहीं भेज कर हम दोनों कार लेकर फ़ुर्र हो गये और करीब आधे घण्टे बाद लौटे और बहाना बना दिया कि आशापुर चले गये थे सर दर्द की दवा लेने।

नीलम ने बड़ी ही बेबाकी से बताया कि उसे सेक्स की बड़ी प्यास रहती है परन्तु अच्छे साथी तथा मौका नहीं मिल पाता। मेरे यह कहने पर कि तने लण्ड के कारण मेरा बुरा हाल है, वह बोली कि मेरी भी तो पैण्टी गीली हो रही है, क्या करूँ?

मैंने पूछा कि गरम होने पर कैसे शान्त होती हो तो वो बोली- जब कोई उपाय नहीं होता तो काफ़ी देर तक ठण्डे पानी से नहाती हूँ तो तन की गरमी शान्त हो जाती है।

लन्च के समय वह मेरे बगल में बैठी तथा अपनी जाँघों से मेरी जाँघ रगड़ती रही तथा मौका पाकर पैण्ट के उपर से मेरे लण्ड को सहला देती। उसकी हरकतों से मैं तो पागल हो रहा था और शाम होने का इन्तज़ार बहुत खल रहा था। यही हाल कमोबेश नीलम का भी था। मन तो कर रहा था कि नीलम को लेकर सारनाथ के आस पास के किसी अरहर या गन्ने के खेत में घुस जाँऊ ……. और …..

तो भैया किसी तरह दिन ढला और शाम हुई और हम वापस पाण्डेपुर पहुँचे और डी पी उसके भाई को लेकर अपने फ़्लैट पर चला गया और मैं नीलम को लेकर होटल की तलाश में। चूँकि शाम हो चुकी थी अतः 2-3 होटलों में जगह नहीं मिलने के बाद कैन्टोमेन्ट के एक अच्छे होटल में अपने बज़ट में कमरा मिल गया। तकरीबन आठ बजे हम कमरे में चेक-इन किया और दरवाजा बन्द करते ही नीलम मुझसे जोर से चिपट गई और लगी मुझे चूमने ……. वाह क्या चीज थी नीलम भी …. क्या प्यास था उसकी आँखों में …… क्या उत्तेजना थी ……. मैं तो एकदम गरमा गया और उसे जोर से अपने सीने में भींच कर उसके गालों पर चुम्बनों की बौछार कर दी।

वह भी दोगुने जोश से पलटवार कर रही थी ……. यानि मेरे गालों पर और होठों पर अपने चुम्बनों की बौछार शुरू कर दी ……. खड़े-खड़े ही हम दोनों गुत्थम-गुत्था होकर एक दूसरे के होंठ चूसने लगे …. दोनों मानो एक दूजे के होंठों को खा जाना चाहते हों। होठों का ज्वार कुछ कम हुआ तो दोनों बिस्तर पर आये और मैंने उसकी चूँचियों को ऊपर से दबाना शुरू किया। नीलम की चूँचियाँ छोटी-2 थी, पर उत्तेजना से कड़ी हो गई थी। मैंने उसकी शमीज उतार दी, अन्दर वह किशोरियों वाली अन्डर-शमीज पहने थी ….. कोई जवान की तरह ब्रा नहीं पहने थी, यह देख कर मुझे हँसी आ गई तो उसने पूछा- हँस क्यों रहे हो ?

मैंने कहा- तुम्हारी अन्डर-शमीज देख कर मुझे लग रहा है कोई स्कूल की छोकरी को फ़ुसला कर गलत काम कर रहा हूँ।

इस पर नीलम बोली- चूँचियाँ छोटी-2 हैं, अतः ब्रा नहीं पहनती, परन्तु आपको मुझसे पूरी मस्ती मिलेगी ! मैं कोई कुवाँरी नहीं हूँ, खेली-खाई हूँ, चूँचियों की कसर मेरे निप्पल चूस-2 कर निकाल लीजिये …… चाहे जितने जोर से चूसिये, मैं उफ़्फ़ नहीं करूँगी …. चाहो तो निप्पल काट लो मेरे राजा ……. अब देर मत करो मेरे ठाकुर साहब …….

यह कह कर उसने अपना निप्पल मेरे मुँह में घुसा दिया ……. और मैं लगा चूसने ! उसकी घुण्डियों को दाँतो से हौले-2 काटता हुआ !

और नीलम उत्तेजना से पागल हो के मेरा पैण्ट खोल के अण्डरवीयर से लण्ड बाहर निकाल कर हाथों से सहलाने लगी …… मैं भी सलवार के ऊपर से उसकी पैण्टी के अन्दर उसके गरम होती चूत को सहलाने लगा ……. ओफ़्फ़् …… सहलाते ही नीलम मचल उठी और जोर-2 से मेरे लण्ड को दबाने लगी और मेरे कपड़े उतरने लगी। और बोली- अब नहीं सहा जाता ! जल्दी से मेरी बुर में अपना लण्ड पेल कर मेरी बुर की प्यास बुझाइये मेरे सरकार ……. अब और नहीं सहा जाता !

मैंने उसकी सलवार और पैन्टी उतार के उसे पूरा नंगा किया और उसको सीधा लिटा कर दोनों टाँगें उठा कर बुर को ऊपर उठा कर उसकी बुर के मुँह पर अपना टनटनाया लण्ड रगड़ने लगा ….. नीलम तो जैसे पागल हो गई ….. मेरे गले में बाँहें डालकर जोर से मेरा एक चुम्मा लेकर बोली …. अब पेलो नाऽऽऽऽआऽऽऽऽआ ……. क्यों तड़पा रहे हो राजाऽआऽआऽआ ……

मैंने उसकी चूत के मुँह पर लण्ड रखा और लण्ड को घुसाया …….

सुपाड़ा जाते ही वो सिसकारी मारते हुए बोली …… आआआआहहहहह ……. रुको मत मेरे दोस्त ,पूरा लौड़ा पेल दो एक साथ ….. ओह …… ह …..ह……ह…… चिन्ता मत करो राजा मैं देखने में बच्ची जरूर लगती हूँ पर कोरी नहीं हूँ, पेल दो जोर से …….. भले ही फ़ट जाये नीलम की बुर ….. बस क्या था, मैं तो बौखला गया और एक ही धक्के में पूरा लण्ड उसकी चूत में पेल दिया ……

उसने उफ़्फ़ करके मुझे जकड़ लिया और मेरे सीने से चिपट गई और मेरे निप्पल को चाटने लगी। मैं थोड़ी देर वैसे ही लण्ड देव को चूत की गुफ़ा में डालकर विश्राम करने लगा, जब एकाध मिनट तक कोई हरकत नहीं हुई तो नीलम खुद ही अपनी चूत को हिलाने लगी और मेरे गालों को सहलाते हुए कान में बोली- राजा जी, अब और ना तड़पाओ ….. अब चोद डालो नीलम को …… मारो धक्का ……. अब मत रुको जानू……..

बस भैय्या, मैं तो शुरू हो गया और दे दनादन धक्का लगा कर नीलम की बुर को चोदने ….. हचा…हच् …हच्…हच् …..हच्….. फ़च्……फ़च्……फ़चा….फ़च्…… फ़च्…फ़च् …सटा-सट् …सट… पूरा कमरा फ़च-फ़च और नीलम की सिसकरियों से गूंज उठा ….. वो जोर-2 से अपने चूतड़ उठा कर मुझे जकड़ कर मेरे होंठ चूसने लगी और मुझे ललकारते हुए अपनी बुर को फ़ाड़ देने के लिये उकसाने लगी।

बड़ी देर तक मैं नीलम की बुर की चुदाई करता रहा। कमरे में बस हमारे साँसो तथा फ़चा-फ़च…..और बीच-2 में उसकी सिसकारियों की आवाज आ रही थी। ज्यादा गीली होने पर मैंने तौलिये से अपना लण्ड और उसकी चूत साफ़ की और फ़िर से चोदना शुरू किया……..

काफ़ी देर बाद हम दोनों ही लगभग एक साथ झड़े और उसने मुझे जकड़ लिया और हम दोनों लस्त-पस्त होकर सो गये।

शेष अगले भाग में !

सीमा और उसकी बेटी की चुदाई- 2

Filed Under (Hindi Stories) by admin on 31-12-2009

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सीमा और उसकी बेटी की चुदाई- 2

प्रेषक : राजा बाबू

सीमा को अलवर गए हुए एक हफ्ता बीत चुका था और इस एक हफ्ते में मैंने वो नजारे देखे थे जिनकी जीवन में कभी उम्मीद नहीं की थी। पायल जैसी हसीन और जवान लड़की मुझसे चुदवायेगी, मैंने सोचा न था।

खैर अगले दिन सुबह नाश्ता करके मैं बैंक चला गया और दोपहर को जब लंच करने आया तो पहले पायल की चूत मारी फिर खाना खाया और बैंक वापस चला गया। शाम को घर आया और कपड़े उतार कर सीधे नहाने के लिए बाथरूम घुस गया।

अभी नहाया ही था कि किसी ने दरवाजे पर दस्तक दी, मैंने जल्दी से तौलिया लपेटा और दरवाजा खोलने आ गया। दरवाजा खुलते ही देखा कि मेरी सीमा डार्लिंग हाथ में मिठाई और फ्रूट से भरी थाली पकड़े खड़ी थी, जो वह अलवर से लाई थी और मेरा हिस्सा मुझे देने आई थी। मैं दरवाजा खुला छोड़कर अपने कमरे की तरफ चल दिया मेरे पीछे पीछे वो भी मेरे कमरे में आ गई, सीमा ने थाली को पलंग पर रखा और मेरे सीने से लगकर मुझे चूमने लगी। मैंने अपने दोनों हाथों से उनके चूतड़ों को दबाया और उनका गाउन कमर तक उठाकर तौलिए में से अपना लंड निकला और पैंटी के ऊपर से ही उनकी चूत पर रखकर दबा दिया।

सीमा बोली- अभी जाने दो ! राजा रात को आऊंगी, दरवाजा खुला रखना।

मूल चंद और मैं जब रात को डिनर कर रहे थे तो सीमा बार बार गुनगुना रही थी- रस्ता हमारा तकना ! दरवाजा खुल्ला रखना !

इसका अर्थ सिर्फ मैं समझ पा रहा था। खाना खाकर अपने कमरे में आया तो तुरन्त नींद आ गई। जब से सीमा और पायल की पुंगी बजानी शुरू की थी, रात को नींद खूब आती थी। रात को लगभग १२ बजे मेरी नींद खुल गई, देखा सीमा मेरे बगल में लेटी है और मुझे सहला रही थी। मैंने उसे अपनी बाहों में ले लिया, नंगा किया और अपना लंड उसके हाथ में दे दिया, उसने पहले तो अपने हाथों से लंड को सहलाया, फिर अपने मुंह में ले लिया। थोड़ी देर चूसने के बाद जब लंड बहुत टाइट हो गया तो वह लेट गई, मैं उसकी टांगों के बीच आ गया, अपना लंड उसकी चूत के होठों पर रगड़ने लगा तो बोली- राजा, देर न करो ! बहुत भूखी है यह ! अब डाल दो।

मैंने देर नहीं की, एक तकिया उसकी गांड के नीचे रखकर अपने लंड का सुपाड़ा उसकी बुर के मुंह पर रखा और एक झटके में पूरा लंड अन्दर कर दिया तो मुझे चूमने लगी। डेढ़ घंटे तक चुदवा कर वो अपने घर चली गई।

अगले दिन से पायल ने स्कूल जाना शुरू कर दिया तो लंच के समय सीमा को चोदने में कोई दिक्कत नहीं थी। अब दिक्कत थी तो सिर्फ इस बात की कि पायल नहीं चुद पा रही थी, जिस वजह से मैं तो परेशान था ही, पायल मुझसे ज्यादा परेशान थी। आप खुद सोचकर देखिये १८ साल की जवान लड़की जो ८ दिनों में ३० बार चुदी हो और अब ४ दिन से उसने लंड का दीदार भी ना किया हो, वो परेशान होगी या नहीं?

मैंने इसका भी एक रास्ता निकाला, रात को खाना खाते समय मैंने पूछा- पायल तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है?

इससे पहले कि पायल कुछ जवाब दे, सीमा बोली- बाकी सब विषयों में तो ठीक है, लेकिन इसका गणित बहुत कमजोर है, डरती हूँ कहीं फ़ेल ना हो जाए।

मैंने कहा- आपको घबराने की कोई जरूरत नहीं है, मैं दो महीने पढ़ा दूंगा तो ८०% से ज्यादा नंबर लाएगी। बस समस्या समय की है, उसका भी कोई रास्ता निकल आएगा।

काफी देर के विचार विमर्श के बाद तय हुआ कि रात को खाना खाने के बाद १० से ११ बजे तक पायल मुझसे गणित पढ़ा करेगी और यह काम आज से ही चालू।

मैं खाना खाकर अपने कमरे में आ गया, करीब आधे घंटे बाद पायल आई और आते ही मुझसे लिपट गई। मैंने उसे अपने से दूर करते हुए कहा- एक दो दिन धैर्य रखो, अभी हो सकता है तुम्हारे घर वाले हम पर नज़र रख रहे हों !

मैंने उसे पढाना चालू किया, लगभग ११.३० बजे सीमा आई, दरवाजा खटखटाया, मैंने तुंरत खोला।

सीमा बोली- चलो बेटी ! बहुत देर हो गई, अब अंकल को सोने दो !

पायल ने कहा- बस ये सवाल कर लूं, फिर आती हूँ !

मैंने कहा- भाभी जी आप ५ मिनट रुकिए, इसका काम हो गया है।

दूसरे दिन रात के १२ बजे तक पायल पढ़ती रही तो सीमा आई और बोली- चलो बेटी, १२ बज गए, हमें सोना भी है।

तो पायल ने कहा- आप लोग सो जाओ। मैं यहीं दीवान पर सो जाऊंगी।

मैं तपाक से बोला- यहाँ कैसे सो जाओगी, यहाँ सोना है तो कल से सोना और अपना कम्बल लेकर आना, क्योंकि मेरे पास एक ही कम्बल है।

माँ बेटी दोनों हंस दीं और चली गईं।

अगले दिन शाम को मैं बैंक से लौटा तो चाय पीने सीमा के घर चला गया, कहने लगी- पायल पास तो हो जायेगी ना?

मैंने कहा- आप बिल्कुल फ़िक्र ना करें, अगर आप ना बुलाएं तो वो शायद २ बजे तक भी मुझे ना छोड़े, कहे पढ़ाते रहिये।

सीमा बोली- आज उसे एक कम्बल दे दूँगी, जब तक पढ़े, पढ़े, उसके बाद वहीं दीवान पर सो जायेगी।

रात को खाना खाकर पायल आई, अपना कम्बल दीवान पर रखते हुए उसने मुझे शरारती नज़रों से देखा तो मैंने कहा- १२ बजे तक पढ़ो, फिर देखेंगे।

ठीक १२ बजे पायल बोली- सर, १२ बज गए आज की कोचिंग खत्म। अब आप के फीस लेने का टाइम हो गया।

मैंने ड्राइंग रूम की लाइट बंद की और पायल को गोद में उठाकर अपने बेडरूम में ले आया। उसके कपड़े उतार कर नंगा कर दिया और अपने कपड़े उतारने लगा तो बोली- मैं एक मिनट में सुसू कर के आ रही हूँ !

मैंने कहा- रुको, मैं भी चलूँगा, मुझे भी सुसू आई है !

कहने लगी- मैं आपके सामने सुसू नहीं करूंगी ! मुझे शर्म आएगी !

मैंने खुले शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा- जिस चूत में मेरा लंड लेते हुए शर्म नहीं आती उसमें से मेरे सामने सुसू करने में शर्म आती है?

मैंने उसका हाथ पकड़ा और दोनों बाथरूम में घुस गए, बाथरूम काफी बड़ा था। सुसू करने के बाद मैंने वहीं उसकी एक टांग उठाकर अपने हाथ में ली और अपने लंड का सुपाड़ा उसकी चूत पर रख दिया।

पायल कसमसाते हुए कहने लगी- जान बेड पर ले चलो।

मैंने लंड को चूत के अन्दर किया और उसी हालत में उसे बेड पर ले आया।

उस रात के बाद से मेरा टाइम टेबल सेट हो गया- दिन के १ बजे सीमा की चूत और रात के १ बजे पायल की चूत।

श्री श्री मूल चंद जी मनवानी जब पहली तारीख को किराया लेते हैं तो उन्हें मालूम ही नहीं होता कि इस किराये के बदले में मैं क्या क्या सुविधा ले रहा हूँ।

आशा है आपको मेरी कहानी पसंद आई होगी।

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